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कहानी: वकालत

फौजदारी के बड़े वकील राममोहन चौकसे अपने  पिताजी  हाईकोर्ट के पूर्व वकील हरिमोहन चौकसे जी  की छठवीं पुण्यतिथि मना रहे थे । आयोजन में जहाँ शहर के सभी गणमान्य नागरिक शामिल हुए थे वहीं प्रदेश के सी एम सुभाष  वर्मा जी जो चौकसे जी को अपना राजनैतिक गुरू मानते थे वे भी आए थे। आयोजन बहुत भव्य था हवन पूजन भण्डारा रक्तदान चिकित्सा शिविर लगाए गए थे। आयोजन में पूरा शहर ही शामिल हुआ था रात को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया था। राम मोहन चौकसे जी को रात के साढ़े तीन बजे फुरसत मिली थी आयोजन में दो करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
राम मोहन चौकसे को आज बाबूजी की बहुत सी बातें याद आ रही थीं उनके पिता हरिमोहन चौकसे  जी  साठ वर्ष पूर्व शहर से आठ किलोमीटर दूर स्थित सेमलखेड़ा गाँव के प्राथमिक  स्कूल में शिक्षक थे सायकिल से स्कूल जाते थे शाम को पाँच बजे घर आ जाते थे। शहर के सरकारी कॉलेज में शाम को छः बजे से सायंकालीन  एल एल बी की कक्षाएँ लगती थीं चौकसे जी बी ए पास तो थे ही उन्होंने एल एल बी में एडमीशन ले लिया था इसके पूर्व उनका प्रमोशन भी हो गया था  पर उन्होंने प्रमोशन को अस्वीकार कर अपनी पढ़ाई जारी रखी। एल एल बी करने के बाद भी हरिमोहन स्कूल में पढ़ाने जाते रहे। एक दिन शहरे के मशहूर वकील लक्ष्मीचंद जी ने उनसे कहा कि मेरा जूनियर  तीन दिन की छुट्टी पर है अगर तुम उसकी जगह काम करो तो आ सकते हो हरिमोहन चौकसे तैयार हो गए इन तीन दिनों में जो उन्हें पैसे मिले वो उनकी पन्द्रह दिन की तन्ख्वाह के बराबर थे उधर ए डी आई  एस विनोद उनसे नाराज थे क्योंकि उन्होंने उनके ऑफिस में अटेच होने से इंकार कर दिया था। वो  हरिमोहन से कसर निकालने का मौका ढूँढ रहे थे लक्ष्मी चंद विरोधी  पार्टी के नेता थे । विनोद ने इस अवसर का लाभ उठाकर हरिमोहन जी की शिकायत विधायक  राखीलाल जी से कर दी राखीलाल जी ने  हरिमोहन जी का तबादला शहर से दो सौ किलोमीटर दूर गाँव में करा दिया। तथा ये भी कहा कि अगर ये ज्वाइन कर भी लेता है तो वहाँ  से इसे सस्पेण्ड कर दिया जाएगा इसे मैं छोड़ने वाला नहीं हूँ। हरिमोहन जी ने यह सब बात लक्ष्मीचंद को बताई तो उन्होंने कहा कि यदि नौकरी छोड़कर मेरे सहयोगी  बनकर काम करना चाहते हो तो कल से आ जाओ मेरे साथ। दूसरे दिन हरिमोहन जी ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। विनोद उनका इस्तीफा देखकर तिलमिला गए इस्तीफा देने के बाद हरिमोहन ने विनोद से यही कहा कि तुम मेरा तो कुछ बिगाड़ नहीं पाए पर अब मैं स्वतंत्र हूँ और तुम्हें अपने किए का जब तक नतीजा नही दिलवा दूँगा तब तक चैन से नहीं बैठूँगा। हरिमोहन जी एक दैनिक अखबार के संवाददाता भी नियुक्त हो गए थे चौकसे जी ने जब अपने अखबार में उनके कारनामों की जानकारी दी तो शिक्षा विभाग में खलबली मच गई।  हरिमोहन जी के पास सबूत के साथ गवाह भी थे। छः महीने के भीतर उन्होंने विनोद को सस्पेण्ड कराकर ही दम लिया  हरिमोहन जी  आठ साल में जहाँ स्वतंत्र रूप से वकालत करने लगे वहीं नगर पालिका अध्यक्ष भी चुने गए थे। अपना कार्यकाल समाप्त कर वे विधायक के चुनाव में खड़े हो गए उसमें भी भारी मतों से जीत हासिल की। तथा राज्य सरकार में शिक्षा मंत्री बने। अपने कार्यकाल को पूरा कर वे अपनी वकालत करने लगे थे।उस वकालत में चौकसे जी ने खूब दौलत कमाई खूब मान सम्मान उन्हें मिला अपने बेटे राम मोहन को भी वकालत के पेशे में उतार दिया था। राममोहन जी ने अपना काम  खूब मेहनत से कर के अपने आपको सफल वकील बना लिया था।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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