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कहानी: फेल हो गई चालाकी

सूर्य प्रकाश जी की पंचायत चुनाव में भारी बहुमतों से जीत हुई थी। वे वर्तमान सरपंच  चैनसिंह को हराकर सरपंच चुने गए थे। उनका आज भव्य विजयी जुलूस निकला था और अपनी जीत के बड़े बड़े दावे करने वाला चैनसिंह तथा उसके समर्थक एकाएक जाने किस कोने में  छिप गए कुछ चैनसिंह के समर्थक ऐसे भी थे जो  मौका देखकर सूर्यप्रकाश जी के जुलूस में शामिल हो गए थे। 
सरपंच चुने जाने के पहले सूर्यप्रकाश जी जनपद सदस्य रहे थे। पूरे क्षेत्र के लोग यह अच्छी तरह जानते थे कि सूर्य प्रकाश जी एक सीधे सरल और नेक इंसान हैं  सौम्य हैं और सहज हैं। कम बोलते हैं। लंबा भाषण नहीं देते काम की बात करके चुप हो जाते हैं। दूसरी और चैनसिंह बातूनी चालाक चपल झूठा मतलबी अवसरवादी भ्रष्ट और बेईमान इंसान था। देर तक भाषण देना लुभावनी बातें करना उसे खूब आता था इसी खूबी के कारण वो पिछले चुनाव में गाँव का सरपंच चुना गया था ।लेकिन इन पाँच बरसों में लोग उसके भ्रष्ट और दोहरे आचरण से त्रस्त हो गए थे । चैनसिंह के पास सरपंच बनने से पहले कच्चा मकान था और मात्र चार एकड़ जमीन थी ।सरपंच बनने के बाद पाँच सालों में उसके पास पैंतीस एकड़ सिंचित जमीन हो गई थी इसके अलावा पंद्रह एकड़ सरकारी जमीन पर भी उसने कब्जा कर रखा था। बीसलाख  का उसका  चार पहिया वाहन था।  शानदार मकान था। इसके बाद भी वो खुद को ईमानदार कहता था। गाँव में  जातिवाद की राजनीति करता था। दूसरी ओर जनपद सदस्य रहे सूर्यप्रकाश जी ने  एक रुपये का भी भ्रष्टाचार नहीं किया था इन पाँच सालों में वे अपने घर के फूटे कवेलू तक नहीं बदलवा सके थे।  लेकिन जनता के हर  दुख सुख में शामिल होते थे जरूरत मंद की मदद करते थे वे भी इसी गाँव के रहने वाले थे।  उन्होंने अपने प्रयासों  से गाँव के लिए करोड़ों रुपये ग्राम विकास की योजनाओं में स्वीकृत कराए थे पर वे सब  सरपंच के भ्रष्टाचार का शिकार हो गए थे। जबकि चैन सिंह फिर भी अपने आपको सबसे ईमानदार कहता था जब  पंचायत चुनाव की घोषणा हुई तो  चैनसिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने की किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी  उसने साम दाम दंड भेद से अपने विरोधियों  को या तो तोड़ दिया  था या अपना समर्थक  बना लिया था।  जबकि जनता चैनसिंह को हराने का भन बना चुकी थी।  इधर चैनसिंह निर्विरोध चुनाव जीतना चाहता था ऐसी स्थिति में सबको यही लगा कि  चैनसिंह के विरोध  में  सूर्यप्रकाश जी को चुनाव लड़ाया जाए। गाँव के गणमान्य  लोग   सूर्यप्रकाश जी से इस संबंध में  मिले पर उन्होंने साफ मना कर दिया  बाद में जनता की जिद पर वे चुनाव  लड़ने के लिए  तैयार हो गए।  अपना नामाँकन भी भर दिया  चैनसिंह ने भरसक कोशिशे की   सूर्यप्रकाश जी का नामाँकन  रद्द कराने की पर वो उसमें सफल  नहीं हो सके।  सूर्य प्रकाश  जी को हराने के लिए चैनसिंह ने ऐड़ो चोटी तक  का जोर लगा दिया अपशब्दों का प्योग  किया घर घर पैसे बाँटे समूह भोज कराया झूठे आश्वासन दिए  पर सूर्य प्रकाश की सादगी इन सब पर  भारी पड़ी ।  चैनसिंह ने आखिरी में उन पर जानलेवा हमला कराने  का प्रयास भी किया पर सारे उपाय फेल हो गए।  क्योंकि सूर्यप्रकाश जी का  चुनाव जनता लड़ रही थी। यही खास कारण था।  कि वे भारी बहूमतों से चुनाव जीते थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


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