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कहानी: जेठजी

प्रमिला अपने पिता के बाद अगर किसी को सबसे अधिक सम्मान देती थी तो वो उसके जैठजी सुखरा थे सुखराम जी पुलिस में हैडकाँस्टेबल की नौकरी से रिटायर हुए थे  आज अस्सी वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था उनके निधन से प्रमिला को इतना दुख हुआ जितना उसके पिता के निधन के समय भी नहीं हुआ था  ।प्रमिला को वो सब कुछ याद आ रहा था जिसके कारण वो अपनी ससुराल में सुख पूर्वक रह सकी थी जिसमें उसके जेठ जी का बड़ा योगदान था।
प्रमिला की जब शादी हुई तब वो अठारह वर्ष की थी  सुखराम जी के सबसे छोटे भाई गिरधारी  जो सरकारी स्कूल में टीचर थे ।और कुँवारे थे सुखराम को उनकी शादी की चिंता थी।एक बार वे   पुलिस के किसी काम से इन्दौर आए थे यहाँ उन्हें पता चला  कि उनके जिले के  उनके समाज के रामप्रसाद जी रहते हैं जिनकी किराने की दुकान  है उनके यहाँ विभाग योग्य कन्या है तो वे पुलिस की वर्दी में ही उनके घर चले गए  रामप्रसाद जी उन्हें देखकर घबरा गए वे बोले साहब मुझसे कौनसा अपराध हो गया तो सुखराम जी सहज होकर बोले कोई अपराध नहीं हुआ मैं सरकारी डयूटी पर यहाँ आया था तो सोचा आपसे मिलता चलूँ जब उनके बीच परिचय का आदान प्रदान हुआ  तब वे एक दूसरे को अच्छी तरह पहचान गए प्रमिला को तब यह पता नहीं था चि वे उसे देखने आए हैं।  प्रमिला सहज भाव से उनकी आवभगत कर रही थी खाना उसी ने तैयार किया था जब वे खाना खाने बैठे तो उसी ने खाना परोसा भी  और आग्रह कर के खाना खिलाया भी खाना बहुत स्वादिष्द था।  सुखराम जी बहुत खुश थे ।खाना खाने के बाद रामप्रसाद जी बोले मेरी यह कन्या विवाह योग्य है इसके लिए कोई योग्य वर हो तो बताना ।तब उन्होंने सही बात बताई की  वे इसी सिलसिले में आए थे उनका छोटा भाई है गिरधारी जो सरकारी स्कूल में शिक्षक है  वो विवाह योग्य है उसी के लिए आपकी लडकी देखने आया था  जो मुझे अपनी अनुज वधू के रूप में पसंद  है मेरी और से रिश्ता पक्का  समझो  अब आप आकर लड़का देख लो अगर आपको पसंद आ जाए तो शादी का मुहुर्त निकलवाएँ। रामप्रसाद जी सुखराम जी की यह बात सुनकर खुशी से फूले नहीं समाए  उन्हें उनके किसी रिश्तेदार ने  गिरधारी के विषय में पहले ही बताया था।  दूसरे दिन ही रामप्रसाद जी गिरधारी को देखने आए उन्हें भी लड़का पसंद आ गया वे बाजार से मिठाई का पेकेट लाए कुछ रुपये और नारियल गिरधारी  के हाथों में देकर चले गए  गिरधारी को उनके भाई सुखराम जी ने ही पाला था पिता का निधन  हुआ तब   गिरधारी आठ वर्ष के थे गिरधारी अपने बड़े भाई को पितातुल्य मानते थे।  कुछ बोले नहीं पर भाभी से उन्होंने यही कहा  कि भाईसाहब का अचानक लड़की पसंद कर शादी तय करना मुझे  समझ में नहीं आ रहा है। रामप्रसाद जी तो रिश्ता पक्का कर चले गए थे । इधर जब सुखराम जी से उनकी पत्नी सरला ने देवर के मन की बात कही तो  वॅ बॅले अगर वो शादी नहीं करना चाहता तो कोई बात  नहीं  लड़की तो मुझे पसंद मेरे चाचा का लड़का  हरिहर भी विवाह योग्य है  उससे शादी करा दूँगा पर  प्रमिला को इसी परिवार में बहू बनाकर लाऊँगा यह बात सुनकर गिरधारी घबरा गए भैया के पैर छूकर बोले आप नाराज मत होइए आप के निर्णय के विपरीत जाने की मैं सोच ही नहीं सकता मैं तो कुछ दिन यहीं रहकर आपकी सेवा करना चाहता था  मुझे मालूम है आपकी तनख्वाह कम है और खर्च ज्यादा है आपके तीन बच्चे हैं । अभी मेरी तनखा भिलाकर घर का खर्च आराम से चल रहा है। अगर मेरी शादी हो गई तो फिर  मुश्किल आएगी यह सुनकर सुखराम बोले तू उसकी चिंता मत कर मैं सब कुछ सँभाल लूँगा। इस तरह प्रमिल की शादी गिरधारो से हो गई विदा के वक्त  जब प्रमिला माँ से लिपटकर रोई तब सुखराम जी ने यही कहा  कि मेरी बिटिया भी चौदह साल की है गिरधारी को मैंने अपने बेटे की तरह पाला है तं भी बेटी की  तरह ही  रहेगी। और जो सुखराम जी ने कहा वो किया भी  कुछ दिनों बाद तो प्रमिला उनमें ऐसी घुल मिल गई जैसे इसी घर की बेटी हो।  उनके होते हुए गिरधारी की यह मजाल नहीं थी कि वो प्रमिला को डाँट भी दे पीटने की बात तो और थी। शादी के बाद गिरधारी ने प्रमिला से कहा था हम बड़े भाई साहब का बहुत सम्मान करते  हैं । पिताजी तो बचपन में ही गुजर गए थे । पिता के रूप में हमने भाईसाहब को ही देखा है। माँ तो पिता के मरने के सदमें से उबर ही नहीं पा रहीं थीं भैया ने तब आठवीं की परीक्षा पास की थी  और उसी समय पुलिस में भर्तियाँ निकली तो भाईसाहब भी चले गए उन्हें पुलिस की नौकरी मिल गई भैया ने हम सबको सम्हाल लिया था मेरा स्कूल में नाम लिखवाया मँझले भैया की नौकरी लगवाई शादी की बहन की शादी की ।  भैया के कारण ही मैं दसवीं पास कर सका था जब मैंने देखा कि भाई तंग हालत में रह रहे हैं तो मैंने दसवीं पास के बाद ही नौकरी कर ली थी भैया तो मुझे कॉलेज तक पढ़ाना  चाहते थे  पर मैं भाई पर बोझ डालना नहीं चाहता था इस लिए ये  नौकरी मैंने कर ली। थी भैया थोड़े नाराज  हुए भी तो भाभी ने उन्हें समझा दिया था । भैया ने नौकरी लगने के कुछ दिन बाद ही मेरी शादी तुमसे कर दी और साथ ही यह भी कह दिया की अगले महीने से  अपनी तनख्वाह भाभी को मत देना बल्कि बहं के हाथ में देना।  कुछ दिन बाद  अपने बगल के  किराये के मकान में सुराम जी ने गिरधारी और प्रमिला की गृहस्थी जमा दी थी  तबसे चालीस वर्ष हो गए थे प्रमिला को इसी तरह रहते हुए  जेठजी के होते हुए प्रमिला ससुराल में बिंदास होकर रहीं थी आज जेठजी के निथन ने प्रमिला को अनाथ कर दिया था। उसे रह रहकर उनका बड़प्पन याद आ रहा था।  उसकी निगाह में उसके जेठजी जैसा अच्छा और नेकदिल इंसान दुनिया में कोई दूसरा नहीं  था ।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप  


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