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कहानी: संघर्षशील बेटी

बचपन से ही संघर्षशील शारदा मुबई में अकेली रहकर एडवरटाइजिंग कंपनी चला रही थी चार सौ करोड रुपये सलाना उसका टर्न ओवर था उसका छोटा बाई निशाँत उसकी कंपनी में ही काम करता था वो वर्क फ्राम होम  करता था उसे प्रतिमाह वेतन शारदा अपनी कंपनी की मद से देती थी। 
शारदा के जन्म के पहले  उसकी माँ सावित्री की एक बेटी और थी रोशनी उसका नाम था वो अभी साल भर की भी नही हुई थी कि शारदा  गर्भ में आ गई  सावित्री इसके लिए तैयार नहीं थी उसे आशंका थी कि उसके गर्भ में लड़की ही पल रही है उसने अपने पति सत्यकाँत से कई बार कहा कि वो उसका गर्भपात करा दें लेकिन सत्यकाँत जी ने साफ मना कर दिया बोले में माँ भगवती का भक्त हूँ मैं ऐसा कभी नहीं होपे दूँगा। आखिर सावित्री की आशंका सही निकली शारदा  के जन्म पर वो बहुत रोई सत्यकाँत ने उसे खूब समझाया पर उस पर कोई असर नहीं हुआ। शारदा अपनी बहन रोशनी से पौने दो साल छोटी थी। सत्यकाँत कहते मेरी दोनों बेटियाँ बेटों से कम नहीं है मैं इन्हें पढा लिखा कर योग्य बनाऊँगा जबकि सावित्री  दो बेटी होने से दुखी रहती थी वो रोशनी से तो लाड़ प्यार करती थी पर शारदा से उसे चिढ़ थी उसके जन्म के चार साल बाद निशाँत का जन्म हुआ था निशाँत के जन्म पर सावित्री की खुशियाँ लौटी थीं। 
शारदा को कुछ भी आसानी से नहीं मिला ।उसे छोटी से छोटी चीज के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था। जो वस्तुएँ रोशनी और निशाँत के लिए सुलभ रहतीं वो उसे संघर्ष से प्राप्त होती थी। शारदा के पिता सत्यकाँत एक सेल्स एजें सी में एकाउण्टेन्ट थे। धीरे धीरे दोनों बच्चियाँ बड़ी हुई निशाँत जब स्कूल में पढ़ रहा था तब वे कॉलेज में पढ रही थीं रोशनी ने जहाँ एम  एस सी किया वहीं शारदा ने बी कॉम एडवरटाइजिंग से करने के बाद  आई  आई एम से  एम बी ए किया सत्यकाँत जी ने तो आगे पढाने से साफ मना कर दिया था। पर शारदा ने एजुकेशन लोन लेकर अपनी पढाई पूरी की पढाई के दौरान ही उसका कैंपस में ही सिलेक्शन भी हुआ अच्छे पैकेज भी मिले पर शारदा ने सब ठुकरा दिए। बाकी सब का प्लेसमेन्ट हो गया था एक दिन प्रिन्सीपल जी  ने उसे बहुत समझाया कि वो प्लेसमेन्ट में शामिल हो। एक बड़ी कंपनी उसे लेना चाहती है अच्छा पैकेज भी दे रही है। पर शारदा ने साफ इंकार कर दिया उसके इस निर्णय से उसके माता पिता भी नाराज हो गए थे सत्यकाँत जी ने कहा  कि नौकरी नहीं करेगी  तो एजुकेशन लोन कैसे चुकाएगी शारदा बोली उसकी चिंता आप मत करो  वो मेरी जिम्मेदारी है हारकर पापा बोले जो तेरे मन में आए वो कर नौकरी करने का एक बड़ा  नुक्सान शारदा को यह भुगतना पड़ा कि उसके बॉय फ्रेन्ड ॠतुराज ने उससे ब्रेकअप कर लिया शारदा ने यह सोचकर तसल्ली कर ली अगर अभी ब्रेक अप नहीं होता तो शादी के बाद तलाक होता ऋतुराज का प्लेसमेन्ट हो गया था और उसे अच्छा पैकेज मिला था उसने जल्दी ही एक नौकरीपेशा लड़की मालती से शादी कर ली थी इधर उसकी बहन रोशनी की भी शादी हो गई थी  पिताजी उसकी शादी भी  करके जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते थे पर शारदा ने शादी करने से साफ इंकार कर दिया था  एम बी ए करने के बाद वो अपनी दम पर मुँबई चली गई वहाँ एक एडवरटाईजिंग कंपनी में कमीशन बेस पर काम किया दो साल में वो सब कुछ सीख गई थी दो साल बाद शारदा ने कंपनी की नौकरी छोड़कर अपनी कंपनी खोल दी थी। शारदा के हर निर्णय का उसके मम्मी पापा विरोध करते पर वो अपना निर्णय कभी नहीं बदलती थी। शारदा ने कड़ी मेहनत कर पाँच सालों में अपनी कंपनी को एक प्रतिष्ठित कंपनी में बदल दिया था सैंकडों कर्मचारी उसके यहाँ काम करते थे जिन्हें वो अच्छी सेलरी देती थी । इधर निशाँत ने भी एम बी ए कर लिया था और वो बेरोजगार था  उसके माता पिता उसे शहर से बाहर नहीं जाने देना चाहते थे। ऐसे में समस्या का समाधान निकाला शारदा ने उसने निशाँत को अपनी  कंपनी में पैंतालीस हजार रुपये प्रतिमाह पर नौकरी पर रछ लिया था उसे वर्कफ्राम होम करना था इसके लिए वो फौरन तैयार हो गया । सत्यकाँत  रिटायर हो गए थे पैंशन स्कीम से उन्हें आठ हजार रुपये पैंशन मिल रही थी जो बहुत  कम थी उसी में वे अपना घर चला रहे थे शारदा की बहन जो शादीशुदा थी उसकी आमदानी भी ज्यादा  नहीं थी।  शारदा को पता चला कि  उसकी माँ गंभीर रूप से बीमार है तो उसने  तुरंत घर आना उचित समझा। हवाई जहाज से घर आई देखा तो उसकी  माँ  गँभीर बीमार थी यह  सुनकर कि उसके पिताजी माँ का इलाज  खैराती अस्पताल  में करा रहे  हैं  जहाँ के इलाज से  उसे कोई     लाभ नहीं हो रहा था। शारदा उसे तुरँत सबसे मँहगे और अच्छे अस्पताल में ले गई  दस दिन में माँ के  इलाज पर साढ़े तीन लाख रुपये खर्च किए जिसका भुगतान शारदा ने ही किया  माँ ठीक होकर घर आ गई थी दो साल बाद जब पिताजी को हार्ट अटेक आया तब शारदा ने ही बारह लाख रुपये खर्च किए  तब कहीं पिता स्वस्थ हो सके।  एक दिन सावित्री और सत्यकाँत आपस में बात कर रहे थे सत्यकाँत कह रहे थे सोचो अगर उस समय हमने गर्भपात करा दिया होता तो हमें शारदा जैसी बिटिया नहीं मिलती  सावित्री बोली आप सही कह रहे हो हमारी बेटी सौ सौ बेटों से भी बढ़कर है भगवान उसे ऐसे ही स्वस्थ और सँतुलित बनाए रखें।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


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