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कहानी: सरकारी नौकरी

इंकम टेक्स ऑफिसर राजीव सक्सेना को आठ साल हो गए थे नौकरी करते करते  वे एक ईमानदारी अधिकारी  के रूप में जाने जाते थे इसिलिए उन्हें विजिलैंस में पदस्थ किया गया था। उनकी पत्नी रागिनी कॉलेज में प्रोफेसर थी दोनों बच्चे बेटी रितु , और बेटा रितिक अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे थे कुल मिलाकर वे  खुशहाल जीवन जी रहे थे उनकी शादी नौकरी लगने के बाद हुई थी। उनकी पत्नी रागिनी  सुंदर सुशील और उनकी ही तरह ईमानदार थी यही कारण था कि उनकी आपस में खूब बनती थी। आज फिर उन्होंने करोड़ों रुपये की टेक्सी चोरी पकड़ी थी इससे वे बहुत खुश और उत्साहित थे। पत्नी यह खबर सुनकर!बोली टैक्स चोरों को पकडकर उनसे टैक्स वसूल करना टेक्स चोरी रोकना भी तो देश की सेवा करना है। बस अधिकारी आप जैसा ईमानदार होना चाहिए अगर अधिकारी भ्रष्ट हो तो उससे बड़ा देशद्रोही कोई नहीं हो सकता।
राजीव आठ वर्ष पहले तक  प्राइवेट फर्म में नौकरी करते थे।  इसके पहले वे एक कर सलाहकार के यहाँ नौकरी करते थे वो उन्हें मात्र छः हजार रुपया वेतन देते थे  और काम खूब लेते थे उनका कहना था । वेतन कम है तो क्या? काम सीखने  को तो मिल रहा है ।  अनुभव भी हो रहा है। राजीव यह सोचकर खुश था कि उस अकेले का खर्च ही कितना है  उस हिसाब से ठीक है। लेकिन एक दिन उसके बॉस ने उसे परेशानी में डाल दिया उससे कहा मैं तुम्हारे बैंक एकाउण्ट में पाँच दिन के  लिए छः करोड़ रुपये ट्राँसफर कर देता हूँ तुम्हें कोई ऐतराज तो नहीं यह सुनकर राजीव घबरा गया बोला यह तो गलत होगा मैं किसी मुसीबत में पड सकता हूँ। मैं ऐसा नहीं करूँगा में जेल जाशा नहीं चाहता। उसकी बात सुनकर बॉस नाराज हो गए। दिन भर उसने राजीव से कोई बात नहीं की । दूसरे दिन  जब राजीव नौकरी पर गया तो देखा कि उसकी कुर्सी पर कोई और बैठकर काम कर रहा है। उसे बॉस ने नौकरी से निकाल दिया था। उसे याद आया एक फर्म के  हिस्सेदार ने उन्हें चार महीने पहले नौकरी का ऑफर दिया था उन्हें  कैशियर के पद पर एक योग्य व्यक्ति की तलाश थी। राजीव को उन्होंने फौरन नौकरी पर रख लिया वेतन में भी तीन गुना वृद्धि कर दी थी।  राजीव वहाँ  एक साल तक काम करता रहा इस दौरान वो अच्छी तरह समझ गया था कि प्राइवेट नौकरी कर पाना उसके लिए संभव नहीं है। इसलिए उसने सरकारी नौकरी  के लिए तैयारी शुरू कर दी थी  । यहाँ भी उसके फर्म के मालिक रोशन लाल ने कहा  सात करोड का   आलीशान मकान तुम्हारे नाम से कर देते हैं  इसके बाद तुम्हें हमारे खास आदमी जगदीश की जमानत लेनी होगी  वो एक आपराधिक  केस में जेल में बंद है।  यहाँ भी राजीव ने यह काम करने से स्पष्ट इंकार कर दिया।  रोशनलाल को ये अपमान महसूस हुआ और उन्होंने राजीव को उसी समय नौकरी से निकाल दिया। राजीव जब मुँह लटकाए घर आया तो एक बड़ी खुशी उसका इंतजार कर रही थी। उसका चयन केन्द्र सरकार के आयकर विभाग में  अधिकारी पद पर हुआ  था।  उसकी मनचाही मुराद पूरी हो गई थी। वो बहुत खुश था जब रोशनलाल को यह खबर लगी तो  वो खुद चलकर राजीव के घर आया माफी माँगी तथा उसकी दो महीने की रुकी सैलेरी भी देदी तथा कहा कि आगे हमारा ख्याल रखना।  राजीव ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया । इधर राकेश ने सरकारी नौकरी ज्वाइन की और उधर उसके घर विवाह के रिश्ते आना शुरू हो गए।  उसने भी रागिनी  को पसंद कर उससे शादी कर ली थी।  नौकरी करते हुए उसे साल भर होने जा रहा था।  उसके प्रयासों से उसके जिले में टैक्सचोरी रुक गई थी। टैक्स चोरों में हड़कंप मच गया था।  राजीव एक परिचित के यहाँ  विवाह की वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आया था वहाँ वो शहर भर के धनाढ्य लोगों की भीड़ देखकर चकित रह गया वे एक हॉलनुमा कमरे में एकत्रित थे सबने राजीव को वहाँ बुलाया तथा  उन्हें खरीदने की कोशिश की किसी ने मर्सीडीज खरीद कर गिफ्ट करने की बात कही तो किसी ने ड्राइवर की तनख्वाह अपनी तरफ से देने की बात कही।  पर उसने साफ मना कर दिया कहा मैं सादा जीवन जीता हूँ मुझे इनकी कोई जरूरत नहीं है । यह कहकर वो वहाँ से आ गया दूसरे ही दिन से राजीव ने शहर में टेक्स चोरों के खिलाफ अभियान छैड़ दिया जिससे टैक्स चोरों में अफरा तफरी मच गई  एक महीने में  राजीव ने दो सौ करोड़ रुपये के बकाया टेक्स को  जमा कराने में सफलता प्राप्त की। इससे खुश होकर  विभाग ने उसे विजिलैंस शाखा में पदस्थ कर दिया था । तबसे वो इसी पद पर कार्यरत रहकर देश की सेवा  कर रहा  थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


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