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कहानी: सशक्त महिला सरपंच

बरखेड़ा ग्राम की सरपंच कमला को मुख्यमंत्री द्वारा सर्वश्रेष्ठ  महिला सरपंच सम्मान से सम्मानित किया गया था। इसके साथ ही उनकी पंचायत को आदर्श पंचायत भी घोषित किया गया था। वह आज सम्मान कराकर गाँव आई थीं, जहाँ उनका ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया था। वे आज बहुत खुश थीं। उनके पति सुरेन्द्र उस गाँव के पूर्व सरपंच थे। उनके बाद कमला ग्राम की सरपंच चुनी गुईं थीं। उनके कार्यकाल के तीन वर्ष हो गए थे। इन तीन वर्षों में उन्होंने गाँव का कायाकल्प कर दिया था और अब तो वो आदर्ष  पंचायत घोषित हो गई थी। उन्होंने उसके विकास की राह खोल दी।
कमला जी को इस स्थिति तक आने में बहुत परिश्रम करना पड़ा था। कई  दुश्मन बने थे और दोस्त भी। आज वे अपने कार्य से संतुष्ट थीं।
कमला दलित वर्ग की सरपंच थी। जब वह चुनी गईं तो गाँव के दबंगों की त्यौरी चढ़ गई क्योंकि इसके पूर्व भी सरपंच दलित वर्ग का ही था। जो कमला के पति सुरेन्द्र थे। इस बार बरखेड़ी पंचायत की सरपंच सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित थी। दबंग जाति के पिछड़े ग्रामीणों में हर्ष था कि अब उसकी जाति की सरपंच बन सकेगी। उन्हें सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि इस बार फिर दलित सरपंच चुना जाएगा। चुनाव परिणाम के बाद गाँव में तनाव हो गया था। कमला का सरपंच चुना जाना दबंगों को बर्दाश्त नहीं था। सरपंच का कार्यभार ग्रहण करते समय किसी ने कमला के पति को पंचायत में नहीं आने देना चाहते थे। सुरेन्द्र ने भी वहाँ जाना उचित नहीं समझा था। कमला उस समय बहुत डरी सहमी नगर आ रही थीं। लोग उन पर हावी होकर मनमाने कार्य कराना चाहते थे। कमला एक दो बार उनके सामने झिझकी थीं। लेकिन बाद में कमला जी ने अपनी दृढ़ता के आगे किसी की नहीं चलने दी थी। जिन्होंने अड़ंगे लगाना चाहा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कमला ने की। वो एक ईमानदार सरपंच थीं इसलिए हर काम तत्परता से करतीं थीं। उनकी मेहनत रंग लाई और बरखेड़ी गाँव में विकास की गंगा बह निकली थी। वह अब अंदर से बहुत मजबूत हो गई थीं। धीरे-धीरे उनके अच्छे कामों की सराहना होने लगी थी। आज वो सबके सामने कह रही थीं कि अगर मेरे साथ शुरू में ऐसा व्यवहार नहीं किया होता तो आज में इतनी सशक्त नहीं होती। 
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप  


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