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कहानी: किए का फल

आज विकास बहुत दुखी था आज वो अपनी बहन सरेखा की अंत्येष्टि कर के आ रहा था। जिसे उसके ससुराल वालों ने घासलेट डालकर जला दिया था। इसमें उसका पति मोहित भी शामिल था। वे सब तो हवालात में बंद थे। सभी चाहते थे दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। ये हत्या दहेज के कारण की गई थी  जिससे सभी आक्रोशित थे। विकास को ऐसे मौके पर वो घटना याद आ रही थी जो पाँच वर्ष पूर्व उसके और उसकी पत्नी  विनीता के  साथ घटने से बची थी।
विकास जो कॉलेज में प्रोफेसर था। पाँच वर्ष पूर्व वे सब साथ रहते थे। वहीं विकास की शादी विनीता से हुई थी।  विनीता फिजिक्स में  एम एस सी टॉपर थी बी एड भी थी। वो बहुत सुंदर थी। शादी के कुछ दिनों तक तो सब ठीक चला बाद में हालात बिगड़ने लगे विकास की बहन सुरेखा  विनीता से खुन्नस रखने लगी थी। वो माँ को विनीता के खिलाफ भड़काती, माँ भी सुरेखा की बातों में आकर  विनीता को प्रताड़ित करती। विनीता अब ससुराल में डरी सहमी और असहज रहने लगी थी।  विनीता ने उच्चमाध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा दी थी जिसमें उसका चयन हो गया था इससे वो बहुत खुश थी जबकि  सुरेखा को उसकी खुशी बर्दाश्त नहीं हो रही थी क्योंकि सुरेखा लगातार पाँच वर्षों से ये परीक्षाएँ दे रही थी तब भी उसका चयन नहीं हुआ था। सुरेखा एक सामान्य लड़की थी जिससे उसकी शादी नहीं हो पा रही थी। सभी चाहते थे कि सुरेखा की सरकारी नौकरी लग जाए तो उसकी शादी आसानी से हो जाएगी। विकास भी सुरेखा की शादी कराना चाहता था उसका कहना था कि सुरेखा की शादी हो जाए तो विनीता को प्रताड़ना से मुक्ति मिल जाए। अब विनीता के साथ मारपीट भी होने लगी थी यह बात विनीता विकास को नहीं बताती थी। विनीता से सुरेखा और सास का चिढ़ने का एक कारण विकास था विकास हर बार विनीता का पक्ष लेता जो उन्हें बुरा लगता था।  एक दिन विनीता की सास एक विवाह समारोह में शामिल होने गई जब वहाँ से आई तो काफी उखड़ी हुई थी। उसने बताया कि जहाँ शादी मे गई थी वहाँ दूल्हे को पैंतीस  लाख नगद मिले और साथ ही पन्द्रह लाख की कार भी।  एक हमारे विकास की भी शादी हुई थी जिसमें विकास को सिर्फ पाँच लाख रुपये ही मिले थे दहेज का सामान भी अच्छा नहीं था। विनीता ये सब बातें सुनकर उदास हो जाती। उधर सुरेखा और माँ के बीच जो खिचड़ी पक रही थी  उसकी किसी को फिक्र नहीं थी। विनीता गर्भवती थी उसकी कोख में तीन महीने का गर्भ था। रात को वो विकास से कह रही थी कुछ दिनों से अच्छा नहीं लग रहा भगवान जाने आगे क्या होने वाला है विकास ने कहा मुझे भी ऐसा ही लग रहा है। सुबह जब विकास कॉलेज जा रहा था  तब विनीता ने कहा था  सँभलकर रहना। दोपहर को जब लंच होने में देर थी तब विकास को ऐसा अहसास हुआ कि कुछ गड़बड़ होने वाला है।  उसने प्राचार्य जी से इजाजत लेकर घर की ओर अपनी स्कूटी मोड़ दी इतनी तेज स्कूटी उसने कभी अपने जीवन में नहीं चलाई थी।  शीघ्र घर पहुँचा घर का दरवाजा लॉक था उसने दरवाजा खटखटाए बिन चाबी से लॉक खोल दिया। अंदर प्रवेश करते ही उसे घासलेट की गंध आई। वो तेजी से विनीता के कमरे की ओर बढ़ा तो वहाँ का दृश्य देखकर काँप गया। विनीता बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी और सुरेखा तथा उसकी माँ ने उसके ऊपर मिट्टी का तेल डाल दिया था।  सुरेखा माचिस भूल आई थी वो माचिस लाने के लिए मुड़ी तो उसने विकास को देखा तो हक्की-बक्की रह गई। उसकी माँ भी सकपका गई विकास को मामला समझते देर नहीं लगी। वो फौरन विनीता के पास गया और उसे झिंझोड़ कर जगाने लगा।  तब तक सुरेखा माचिस ले आई थी  और माँ के हाथ में देकर बोली मम्मी जल्दी से इस चुड़ैल को आग के हवाले कर दो।  माँ बोली ये विकास तो उसके पास से हटे ये तो हट ही नहीं रहा। तो सुरेखा आवेश में बोली तो जलने दो विकास को भी इसके साथ। सुरेखा के मुँह से यह बात सुनकर माँ काँप गई। बहू को जलाने के लिए तो वो तैयार हो गई थी पर अपने ही बेटे को कैसे आग में झोंक दे। तभी विनीता जाग गई। विकास ने कहा एक पल गँवाए बिन फौरन बाथरूम में जाओ  और ये  तेल छुडाओ। तेल से भीगे कपड़े चैंज करो। जल्दी करो कुछ भी हो सकता है। विनीता को भी सब कुछ समझ में आ गया। वह फौरन बाथरूम में चली गई।  वे दोनों माँ बेटी क्रोध और हताशा से पागल हो रही थीं। विनीता बाथरूम से चैंज करके आ गई थी। विकास ने कहा जल्दी से सूटकेस में आवश्यक सामान पेक कर आओ अब यहाँ हम एक पल भी नहीं रहेंगे। विनीता ने तुरंत आज्ञा का पालन किया। माँ कुछ कहने वाली थी तो विकास ने कहा जिनको तीन माह की गर्भवती को जलाने में जरा भी संकोच नहीं हुआ वो इंसान नहीं शैतान से भी  गया बीता है। मैं अब तुम लोगों का भरोसा नहीं कर सकता। इसके बाद विकास और विनीता उस घर से हमेशा के लिए निकल गए। विकास राखी पर भी घर नहीं आता था। सोचता जो बहन भाई को जलाकर मारने की कोशिश करे उससे राखी बँधवाने का क्या औचित्य। इस बीच  सुरेखा की शादी भी हो गई। शादी मैं खूब दहेज दिया दस लाख रुपये और आल्टो कार के अलावा दस तौला सोना भी दिया। फिर भी सुरेखा के ससुराल वाले संतुष्ट नहीं थे। सुरेखा का पति अजय भी इसी बात से नाराज था। कुछ दिनों तक यह सब चलता रहा। एक दिन अजय ने कहा मुझे ये कार पसंद नहीं है। मुझे सतरह लाख रुपये की इलेक्ट्रिक कार चाहिए। अपने पिताजी से कहो कि वो  मुझे ऐसी कार दिलाएँ। सुरेखा के पिताजी प्लॉट बेचकर कार दिलाने को राजी भी हो गए पर प्लॉट बिक नहीं रहा था। उधर अजय के सब्र का बाँध टूटने लगा था और फिर वही सब हुआ जो विनीता के साथ होने वाला था। लेकिन जहाँ विनीता को उसके पति विकास ने बचाया था वहीं सुरेखा को आग के हवाले करने में उसकी सास ननद के साथ उसका पति भी शामिल था। सुरेखा नब्बे प्रतिशत जल गई थी। उसके बचने की उम्मीद न के बराबर थी। पुलिस ने उसके बयान ले लिए थे। विकास को जैसे ही इसकी खबर लगी वो विनीता को लेकर फौरन अस्पताल आया जहाँ सुरेखा कि अंतिम साँसे चल रही थीं। सुरेखा विकास को देखकर बोली भैया देखो मुझे अपने किए का फल मिल गया। हो सके तो मुझे माफ कर देना यह कहकर सुरेखा ने अपने प्राण त्याग दिए थे। विनीता भी सुरेखा का दर्दनाक अंत देखकर बहुत दुखी थी। वो उसकी अंत्येष्टि करके जब से आए थे तब से ही दुखी थे उनका पुत्र वैभव समझ नहीं पा रहा था कि उसके मम्मी पापा किस बात से इतने दुखी हैं।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


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