रामदयाल आज चालीस साल की सरकारी नौकरी से सेवानिवृत हुए थे। सेवानिवृति उनके लिए सुखद थी जिम्मेदारी से मुक्ति मिली थी। वहीं अब पूरा समय उनका था उनका भरापूरा परिवार था। पत्नी रुचि अभी भी सरकारी नौकरी में थी उसके सेवानिवृत होने भें चार साल बचे थे। लड़का राजेश इंजीनियर था उसकी पत्नी राधिका सरकारी स्कूल में शिक्षक थी उनकी लड़की रोशनी डॉक्टर थी उसके पति रोहित भी डॉक्टर थे।
उन्हें पचपन हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलने वाली थी यह उनके लिए पर्याप्त थी। मकान घर का था जिसमें सामने पाँच दुकाने थी जिनका पिचहत्तर हजार रुपये प्रतिमाह किराया आ रहा था।
रामदयाल जी ने जब नौकरी की शुरुआत की थी तब उन्हें महज डेढ़ सौ रुपये प्रतिमाह तनख्वाह मिलती थी। तब उनके दोस्त कहते थे कि इतने कम वेतन पर नौकरी करने से लाभ क्या इससे अच्छा तो कोई छोटा मोटा काम धंधा कर लो तो इससे कहीं अधिक कमा लोगे पर राभदयाल इस पर ध्यान नहीं देते थे वे रोज पन्द्रह किलोमीटर सायकिल चलाकर बरखेडा के शासकीय प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने जाते थे। दो साल बाद उन्हें पाँच सौ रुपये प्रतिमाह वेतन मिलने लगा था उनके पिता शिवलाल जी ने उनकी शादी तय कर दी थी शादी जिससे तय हुई थी उसका नाम प्रिया था। वो एम एस सी केमिस्ट्री से पास थी और प्राइवेट हायर सेकेण्डरी स्कूल में पढ़ाती थी।शादी के बाद कुछ दिन तक तो ठीक चला लेकिन प्रिया को रामदयाल का सीधापन सादगी सरलता पसंद नही थी वो उसे अपमानित करने लगी थी वो कहती सायकिल की जगह स्कूटर ले लो पर रामदयाल मना कर देते थे। इससे वो नाराज हो जाती थी। रामदयाल जी अपनी पत्नी को खुश रखने की हर संभव कोशिश करते पर वो हमेशा चिड़ी हुई रहती। आखिर एक बार जो वो मायके गई तो फिर कभी नहीं आई राभदयाल जी ने उसे खूब मनाया पर वो एक ही जिद पर अड़ी रही कि मुझे तुमसे तलाक चाहिए मैं तुम्हारे साथ रहकर अपनी अच्छी भली जिंदगी बर्बाद नहीं करना चाहती आखिर रामदयाल जी ने बेमन से तलाक के कागजात पर हस्ताक्षर कर दिए उस वक्त रामदयाल की आँखों में आँसू थे और प्रिया की आँखों में चमक ।रामदयाल के पिता शिवलाल भी इस तलाक से दुखी थे । पर शीघ्र ही उन्होंने रामदयाल के लिए लडकी तलाश ली थी लड़की का नाम रुचि था और वो सरकारी कॉलेज में लाइब्रेरियन थी। रामदयाल ने पहले तो इन्कार कर दिया पर पिताजी की जिद के आगे उन्हें झुकना पडा इस तरह उनकी शादी रुचि से सादगीपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई रामदयाल जी की जो सादगी सरलता सीधापन उनकी पूर्व पत्नी प्रिया को पसंद नहीं था वो रुचि को अच्छी लगी थी। उसने रामदयाल जी से कहा था आप एक नेक दिल सच्चे सरल इंसान हो इसलिए मुझे अच्छे,लगते हो। शादी होने के बाद जब पहली बार वे मिले तो रुचि से रामदयाल जी ने पूछा कैसा गिफ्ट चाहिए तुम्हें इस पर रुचि बोली आपके खाते में कितने रुपये जमा हैं रामदयाल जी बोले चार हजार रुपये। रुचि बोली मेरे खाते में ज्यादा रुपये जमा हैं एक काम करो ये अठारह हजार रुपये का चेक मुझसे लो और चार हजार अपने मिलाओ उस समय स्कूटर बाइस हजार रुपये में मिलता था शोरूम पर जाओ ओर आज ही नया स्कूटर लेकर आओ यही हमारा गिफ्ट है। यह सुनकर रामदयाल जी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा वे शोरूम पर गए तथा चमचमाता हुआ नया स्कूटर शाम को घर ले आए। रुचि भी खुश थी उसने कहा कल से आप स्कूल सायकिल से नहीं स्कूटर से जाएँगे। रुचि की निश्छलता रामदयाल जी को बहुत अच्छी लगी थी। रुचि ने ही बताया कि शहर के बीच में जो मकान है वो उसके नाम से है। और हम उसी मकान में रहेंगे इस किराये के मकान में बहुत रह लिए आप वो मकान पूरा हमारा है । मम्मी पापा दूसरे घर में रहते हैं उन्हें इस मकान से कोई लेना देना नहीं है। कुछ दिन बाद रामदयाल जी अपने मकान में शिफ्ट हो गए थे रुचि ने उन्हें इतनी खुशी दी थी जिसकी वे सपने में भी कल्पना नहीं कर सकते थे । इस तरह शादी के दस साल हो गए थे।एक दिन जब रामदयाल जी स्कूल में थे तो उनके फोन की रिंग बजी उन्होंने फोन उठाया तो उधर से प्रिया की आवाज आई वो कह रही थी कैसे हो रामदयाल बोले क्या करोगी जानकर वैसे बहुत बढ़िया हूँ दो प्यारे बच्चे हैं अच्छी सुंदर पत्नी है घर का बड़ा मकान है कार स्कंटर मोटर सायकिल बैंक बेलेंस सब कुछ है और तुम कैसी हो प्रिया दुखी होकर बोली क्या समझते हो एक नेक सच्चे इंसान की आत्मा दुखाकर उसे मरणातंक कष्ट देकर कोई सुख से रह सकता है क्या आपसे तलाक लेने के बाद जिस लड़के से शादी की वो हद से ज्यादा शातिर और चलता पूर्जा निकला मैं तो उसकी स्मार्टनेस देखकर रीझ गई थी उसने बताया था कि उसकी इलेक्ट्रानिक्स की दुकान है पर बाद में पता चला कि वो वहाँ पर नौकरी करता है। उसने मुझे बहुत प्रताड़ित किया शराब पीकर रोज मुझे पीटता था । आजकल वो जेल में सजा काट रहा है उसने दुकान से लेनदेन में पाँच लाख रुपये की हेराफेरी की थी। प्रिया बोली मैं जानती हूँ आप मुझे कभी माफ नहीं करोगे पर क्या हम दोस्त बनकर नहीं रह सकते। इस पर रामदयाल जी बोले अब ऐसा संभव नहीं है। आज के बाद कभी फोन मत करना अगर किया तो नंबर ब्लॉक कर दूँगा। मुझे तुमसे कोई लेना देना नहीं है मैंअपनी जिंदगी में बहुत खुश हूँ यह कहकर रामदयाल जी ने फोन काट दिया था। इसके बाद कभी उन्होंने प्रिया का फोन रिसीव नहीं किया था। अब तो वे सेवानिवृत हो गए थे। और निश्चिंत होकर अपनी जिंदगी जीना चाहते थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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