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कहानी: आत्महंता

रचना एवं अर्चना के पिता का निधन हुए पूरे पाँच वर्ष हो गए थे। आज उनकी बरसी थी जिस पर सभी उन्हें याद कर रहे थे उनके पिता  सतीश राजस्व विभाग में बड़े बाबू के पद पर कार्यरत थे।। जब रचना की शादी में एक माह शेष रह गया था तब अचानक उन्हें हार्ट में तीव्र दर्द हुआ और वे अचेत हो गए थे उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहाँ वे तीन दिन भर्ती रहे और अंत में उनका निधन हो गया था।
सतीश की पत्नी वीणा सरकारी स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत थीं  सतीश के निधन के बाद उनकी किसी भी बेटी को इसलिए अनुकंपा नौकरी नहीं मिली क्योंकि उनकी माँ सरकारी नौकरी कर रही थी।
सतीश जी का जब निधन हुआ तब उनकी उम्र बावन वर्ष की थी। दो वर्ष पूर्व भी उनके हार्ट में तकलीफ हुई थी तब भी उन्हें अस्पताल ले जाया गया था एंजियोग्राफी में उनके हार्ट की एक नली में नब्बे प्रतिशत ब्लाकेज का पता चला  था जिसे एंजियोप्लास्टी कर स्टेंट लगाकर ठीक कर दिया गया था सतीश जी को डाइबिटीज की बीमारी भी थी। डॉक्टरों ने उन्हें जो दवाएँ लिखी थीं वे आजीवन चलने वाली थीं जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली तब उन्हे हिदायत दी गई थी कि एक तो परहेज करना दूसरे दवा नियम से खाना ।
कुछ दिन तक तो सतीश जी परहेज करते रहे और दवा भी खाते रहे पर बाद में उन्होंने लापरवाही करना शुरू कर दी तेल घी के बने गरिष्ठ भोजन का सेवन करना शुरू कर दिया था। उनकी पत्नी वीणा याद से उन्हें सुबह शाम गोली दवा देती  जिसमें से एकाध गोली खा लेते बाकी फैंक देते थे यही हाल वे डाइबिटीज की गोली का भी करते थे। वे शुरू से ही खाने पीने के शौकीन थे ।इसलिए होटल में खाना उनका कभी नहीं छूटा था आफिस में भी दिन भर कचौड़ी समोसा चाय का दौर चलता रहता था हालाँकि वीणा बहुत सादा खाना देती थी पर वे  वो खाना खाते ही बहुत कम थे। ऑपिस में भी अपना,लंच किसी  और को देकर खुद के लिए होटल से खाना मँगवा लेते थे खून पतला करने वाली गोली वे खाते नहीं थे उनका कहना था कि इससे उनको घबराहट होती है ऐसी अनेक लापरवाहियाँ  उन्हें धीरे धीरे मौत के मुँह में ले जा रही थीं जिसका उन्हें अहसास भी नहीं था। नतीज ये हुआ कि दो साल में ही वे फिर से गँभीर रूप से बीमार पड़े। इस बार जब उन्हें अस्पताल ले जाया गया था तब वे अचेत थे डॉक्टरों ने बताया कि उनकी तीनों नलियाँ चौक हो गई हैं इस बीच उन्हें कार्डिएक अरेस्ट आ गया बड़ी मुश्किल से उनकी धडॠकन  शुरू हुई  उनकी तुरंत एँजो प्लास्टी की गई  तीन स्टेंट डाले गए। और आई सी यू में बेड पर लिटा दिया गया  ऑक्सीजन लगी हुई थी जब उन्हें होश आया तो  उन्होंने उनके शरीर पर,लगे सारे  उपकरण तथा मशीने हटा दिए और उठकर जाने लगे  किसी का उन पर ध्यान नहीं था नर्सों को उनके जल्दी होश में  आने की उम्मीद नहीं थी जब वे गिरे तब सबका ध्यान गया वे अचेत हो गए थे साँस लेने में उन्हें इतनी तकलीफ हुई कि उन्हें  वेन्टीलेटर लगाना  पड़ा इसके बाद वे कभी होश में नहीं आए एक बार फिर कार्डिएक अरेस्ट आया वो भी डॉक्टरो, ने सम्हाल लिया हालत फिर भी बिगड़ती गई लीवर और किडनी ने काम करना बंद कर दिया था मशीने बता रही थीं की उनका अंतिम समय निकट है डॉक्टरों ने  भी जवाब दे दिया था आखिर वे परिवार को रोता बिलखता छोड़कर दुनिया से चले गए। उनके निधन के बाद  रचना की शादी तय तारीख पर ही हुई इसके साल भर बाद अर्चना की शादी हुई थी। वीणा तो उन्हें आत्महंता कहती थी  । आज उनकी बरसी पर बहुत मेहमाव आए थे और सारे इसी विषय पर चर्चा करते रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप 


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