कलेक्टर दिनेश वर्मा भ्रष्ट नायब तहसीलदार दीपिका एवं एस डी एम रोहित को अदालत में आरोप सिद्ध होने पर मिली सजा से संतोष का अनुभव कर रहे थे। उनकी नियुक्ति इस जिले में छः माह पूर्व ही हुई थी। वे एक ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने जाते थे, इसिलिए सी एम ने अपने गृह जिले का उन्हें कलेक्टर नियुक्त किया था। तथा उन्हें अपने तरीके से कार्य करने की पूरी आजादी दी थी। जिसके कारण लंबे समय से भ्रष्टाचार में लिप्त एस डी एम रोहित के एवं उन्हीं की तरह भ्रष्ट नायब तहसीलदार दीपिका रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ाए थे। इसके बाद छापे की कार्यवाही में रोहित से दो सौ करोड़ रुपये जिनका कोई हिसाब नही था, तथा दीपिका से तीस करोड़ रुपये जप्त किए गए थे। दिनेश ने दोनों अधिकारियों को बर्खास्त कराकर जेल की सलाखों तक पहुँचाने के बाद ही राहत की साँस ली थी।
दीपिका कलेक्टर दिनेश की पूर्व पत्नी थी। जब दिनेश मंत्रालय में चपरासी था, तब दिनेश की शादी दीपिका से हुई थी। दिनेश वैसे तो बी ए पास था, पर उसके पिता मोहन चपरासी थे। उनके आकस्मिक निधन के बाद उसे जब इस पद पर अनुकंपा नियुक्ति मिली तो उसने परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए ये नौकरी ज्वाइन कर ली थी। दीपिका के पिता राधेलाल ने उसकी सरकारी नौकरी के कारण दीपिका की शादी उसके साथ कर दी। दीपिका तब हायर सेकेण्डरी पास थी। शादी के बाद दीपिका ने आगे पढ़ाई जारी रखने की बात जब दिनेश से कही तो दिनेश ने उसका कॉलेज में एडमीशन करा दिया। दिनेश कई बार सायकिल पर बिठाकर उसे कॉलेज ले जाता था। अपनी छोटी सी तनख्वाह से उसकी फीस तथा किताबों का खर्च उठाता था। घर के कामों में उसका हाथ बँटाता था। जब दीपिका बी ए पास हुई तब उसने यह कहा था कि आपकी बदौलत में पढ़ सकी हूँ, अगर आप साथ नहीं देते तो मैं हायर सेकेण्डरी पास ही रह जाती। दीपिका ने इसके बाद पी एस सी की तैयारी की और वो नायब तहसीलदार के पद पर सिलेक्ट हो गई। इस से दिनेश भी दीपिका के साथ बेहद खुश था। नौकरी ज्वाइन करने के बाद दीपिका के व्यवहार में परिवर्तन आने लगा था। दीपिका अब उच्च अधिकारियों के संपर्क में रहने लगी थी। धीरे-धीरे वो भ्रष्टाचार में लिप्त होती चली गई। उसकी निकटता एस डी एम रोहित से बढ़ती चली गई, रोहित स्वयं एक भ्रष्ट अधिकारी था। दोनों ने मिलकर दिनेश का जीना दूभर कर दिया था। दीपिका दिनेश से कई कई दिन तक बात नहीं करती थी। एक छत के नीचे वे अजनबी की तरह रह रहे थे। दिनेश दीपिका के बदले हुए रुख को देख यह अच्छी तरह समझ गया था कि ये जल्दी ही मुझसे तलाक ले लेगी। दिनेश ने दीपिका को बिना बताए यू पी एस सी की तैयारी शुरू कर दी। दीपिका की बेरुखी का दिनेश को लाभ ये मिला की उसे पता ही नहीं चल पाया कि दिनेश यू पी एस सी की तैयारी कर रहा है। दिनेश ने ऑफिस से छः महीने की छुट्टी ली और दिन रात परीक्षा की तैयारी में लग गया। दीपिका की नजर में तो दिनेश एक कीड़े मकोड़े से कम नहीं था, इसलिए वो उससे बात तो करती नहीं थी। नौकरों से उसके हाल तक नहीं पूछती थी। यही कारण रहा कि दिनेश यू पी एस सी में सिलेक्ट होकर आइ ए एस बन गया, पर दीपिका को खबर नहीं लग पाई। वो आई ए एस की ट्रेनिंग लेने चला गया और दीपिका यही समझी कि उसका कहीं तबादला हो गया होगा। एक चपरासी से बात करने से क्या फायदा। ट्रेनिंग के दौरान ही दिनेश के मोबाइल पर दीपिका के वकील का फोन आया कि दीपिका तुमसे तलाक लेना चाहती है क्योंकि तुम उनके लेवल के नहीं हो। दिनेश को यह जानकर कोई दुख नहीं हुआ, बल्कि इस बात की खुशी हुई की एक बेजान रिश्ते से छुटकारा मिल रहा है। दिनेश ने खामोशी से तलाक के कागज पर दस्तखत कर दिए। दीपिका ने तब भी उससे कोई बात नहीं की। हिकारत से उसे देखा और रोहित के साथ चली गई। तलाक के बाद दीपिका ने रोहित से शादी कर ली। रोहित ने भी अपनी बेगुनाह पत्नी को तलाक दे दिया था। दिनेश की ट्रेनिंग खत्म होने के बाद पहली पोस्टिंग उसकी मंत्रालय में हुई थी। दिनेश नौकरी ज्वाइन करने के बाद जब किसी काम से जबलपुर गया तो वहाँ अपनी मौसी सरला से मिला। सरला उसकी शादी जिस लड़की से करना चाहतीं थीं वो अब विधवा हो गई थी। उसका वैवाहिक जीवन सुखद नहीं रहा था। शादी के छः महीने बाद पता चला कि उसके पति को कैंसर है, जो चौथी स्टेज पर पहुँच गया है। वो बच नहीं सका, उसकी मौत के बाद वो लड़की जिसका नाम संजना था, मायके में ही रह रही थी। जो मौसी के घर के पास था। मौसी दिनेश को उसके घर ले गई। दिनेश संजना से शादी के पूर्व मिला था, वो उसे पसंद भी थी। संजना ने भी मन ही भन उसे पसंद कर लिया था। लेकिन परिस्थिति ऐसी बनी की दोनों की शादी अलग अलग हुईं। मौसी ने बिना किसी औपचारिकता के संजना की माँ से संजना की दिनेश से शादी करने की बात कही। अंधा क्या चाहे दो आँखें, दिनेश जैसा लड़का मिले तो कौन माँ इंकार करेगी। संजना ने भी विवाह की स्वीकृति दे दी थी। एक सादे समारोह में दिनेश का संजना से विवाह हो गया और वो दिनेश के साथ उसके घर उसकी पत्नी बनकर आ गई। उसने दिनेश की ज़िंदगी को खुशियों से भर दिया था।दिनेश की ईमानदारी के सभी कायल थे। सी एम उसे अपने गृह जिले का कलेक्टर बनाना चाहते थे। उन्होंने दिनेश से अपनी मंशा जाहिर की, उन्होंने कहा मैं अपने जिले का कायाकल्प करना चाहता हूं। पर उसमें भ्रष्टाचार की दीमकें लगी हुई हैं जो सारे विकास को चाट रही हैं। दिनेश ने सी एम साहब से कहा आप मुझ पर भरोसा कर सकते हैं। मैं आपका भरोसा बिल्कुल नहीं तोड़ूँगा। और दिनेश ने वो कर दिखाया था। दीपिका ने जब दिनेश को कलेक्टर की कुर्सी पर पहली बार देखा तो चिल्लाकर यही बोली थी कि एक चपरासी होते हुए तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई कलेक्टर के चैंबर में आकर उनकी कुर्सी पर बैठने की। लेकिन जब दिनेश के गनमैन ने कहा कि ये कलेक्टर साहब हैं, इनसे तमीज से बात करना था, आप फौरन बाहर निकलिए। दीपिका तो यह सुनकर पागल ही हो गई थी ।
इसके बाद जब दिनेश ने भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसा तो भ्रष्ट अधिकारियों में खलबली मच गई उसका ही परिणाम था जिस पर दीपिका तथा रोहित को सजा मिली थी, और अब वे जेल की हवा खा रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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