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कहानी: ईमानदार

आइ ए एस अधिकारी हरिमोहन श्रीवास्तव मुख्यमंत्री जी के सटॉफ अधिकारी थे वे अपनी ईमानदारी के लिए पूरे प्रदेश में विख्यात थे प्रदेश के मुख्यमंत्री नवीन जी भी बेदाग छवि के जन नेता थे । हरिमोहन जी को इसी एक कारण से मुख्यमंत्री जी ने अपने स्टॉफ में शामिल किया था। उनके प्रयासों से भ्रष्टाचार जड़ से तो समाप्त नहीं हुआ था पर उसकी जड़ें हिल अवश्य गईं थीं।
हरिमोहन जी ने दस वर्ष पूर्व जब नौकरी की शुरूआत की थी वे तब तहसील दार थे और प्रदेश के दूरस्थ भाग में  उनकी पहली पदस्थापना हुई थी तहसील मुख्यालय का नाम था दुर्गापुर वहाँ कुछ ही दिनों में उन्होंने एक दमदार ईमानदार अधिकारी के रूप में पहचान बना ली थी।  उनका नाम मुख्यमंत्री जी तक भी पहूँच गया था मुख्यमंत्री जी ने एक दिन उन्हें राजधानी बुलाया तथा उनसे कहा  श्रीवास्तव जी मेरे क्षेत्र  के सिरपुर नगर को मैं औद्योगिक नगर बनाना चाहता हूँ लेकिन उसके लिए दस हजार एकड़ जमीन की जरूरत है। यह जमीन वहाँ उपलब्ध है जो पूरी तरह सरकारी है लेकिन उस जमीन पर जिन दबंगों ने कब्जा कर रखा है उन्होंने हमारी ही पार्टी की सदस्यता ले रखी है सारे अधिकारी उनकी जी हुजूरी करते हैं और वे राजाओं जैसे ठाट बाट से रहते हैं उसमें छः हजार एकड़ तो शंभुदयाल जी  के ही कब्जे में थी शंभुदयाल का पार्टी में दबदबा भी खूब  था। वे किसी से डरते नहीं थे।मुख्यमंत्री जी ने कहा तुम्हें वो जगह उनसे मुक्त कराना  है । 
ताकी उस जगह को औद्योगिक क्षेत्र बनाया जा सके।
हरामोहन जी ने चुनौती स्वीकार ली। अगले ही दिन उनका तबादला आदेश निकल गया  और वे सिरपुर नगर में आ गए। यहाँ आते ही उन्होंने सबसे पहले शंभुदयाल  के खास गुर्गे जगदीश का कब्जा हटाना शुरू किया जिससे शंभूदयाल बौखला गया उसने उन्हें खरीदने  की खूब कोशिश की दस लाख रुपये भिजवाए पर हरिमोहन जी ने लौटा दिए । शंभूदयाल ने हरिमोहन की शिकायत पार्टी के वरिष्द  पदाधिकारियों से की  तथा उन्हें हटाने  की माँग की जो मंजूर नहीं हुई आखिर  शंभूदयाल ने अपनी   कुटिल चाल चली एक पटवारी को पहले लोकायुक्त से रिश्वत  लेते हुए पकड़वाया फिर उससे  कहलवाया गया  कि ये पैसे  हरिमोहन जी के कहने पर मैंने  लिए हैं । शंभूदयाव  ने  हरिमोहन जी  को अपने दरबार में बुलवाया और सबके सामने रिश्वत  लेने का आरोप लगाकर जी भर कर गालियाँ  दी और  थप्पड़ो की झड़ी लगा दी। किसी  ने इसकी वीडियो बनाकर वायरल कर दी। इधर सारे राजस्व विभाग ने हड़ताल पर जाने की घोषणा  कर दी उस पटवारी  को ग्लानि हुई  उसने खोलकर बात  सारी बता दी। इससे  शंभूदयाल की किरकरी  हुई। अब वो घायल शेर की तरह और भी अधिक आक्रामक हो गया था।इथर पार्टी ने शंभुदयाल को  निकाल दिया  इसके बाद   उसका पूरा अवैध निर्माण  जमीं दोज कर दिया गया जब उसने  हरिमोहन पर प्राणङातक  हमला करवाया  तब पुलिस ने उसे  कैद कर जेल में डाल दिया। सरकारी अधिकारी को मारने  के जुर्म  में चौदह साल की सजा सुना दी। पूरी जमीन अतिक्रमण से मुक्त   हो गई थी।
हरिमोहन के प्रयासों  से उस जगह भव्य  कामर्शिया  एरिया आकार लेने लगा था ।
हरिमोहन प्रतिभाशाली थे।  उन्होंने   कठोर मेहनत के बल पर   यूपीएस सी परीक्षा  कलीयर कर ली थी। इससे  वे आइ  एस बन  गये   थे। ट्रेनिंग के बाद उन्हें  मुख्यमंत्री जी  ने अपना  सलाहकार बना लिया था त बसे वे  अपने दायित्वों  का अच्छी   तरह निर्वहन  कर रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप  


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