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कहानी: पेंशन

नीलेश का परिवार पाँच साल पहले तक नीलेश के पिताजी की पेंशन पर आधारित था। उनकी पैंशन से ही उनका गुजारा चल रहा था। उनके देहाँत के बाद जब पिताजी की पैंशन बंद हो गई तब नीलेश की पत्नी सोनम ने मेहनत मजदूरी कर के परिवार का खर्च चलाया था। आज नीलेश के बेटे रोहित का दसवीं का रिजल्ट आया था। उसने प्रदेश की प्राविण्य सूची में चौथा स्थान प्राप्त किया था तथा जिले की मेरिट में वो प्रथम आया था। आज नीलेश का पूरा परिवार ख़ुशियाँ मना रहा था। नीलेश के पिताजी चंदन सिंह सिंचाई विभाग में क्लर्क थे। उनकी पत्नी कमला का निधन उनके सेवानिवृत्त होने के चार साल पहले ही हो गया था। नीलेश ने बी बी ए किया था बी बी ए करने के बाद नीलेश एक कंपनी में अच्छी भली नौकरी कर रहा था। उसकी शादी सोनम से हुई थी। नीलेश की बहन निकिता की शादी चंदन सिंह के रिटायरमेन्ट के बाद हुई थी। चंदन सिंह सरकारी क्वार्टर में रहते थे। सेवानिवृत होने के बाद जो फंड उन्हें मिला उससे उन्होंने एक छोटा सा मकान बनवा लिया था। बाकी जो रुपये बचे थे उससे उन्होंने निकिता की शादी कर दी थी। अब उनके पास कोई जमा पूँजी नहीं थी। जो पैंशन मिल रही थी वही उनकी आय का साधन थी। नीलेश के भी एक बेटा सोमेश तथा बेटी प्रभा थी। जब सोमेश पाँच साल का था तब नीलेश को लकवा का अटेक आया और उसका आधा शरीर संज्ञा शून्य हो गया। नीलेश की नौकरी छूट गई थी। सोनम ज्यादा पढ़ी लिखी थी नहीं। चंदन सिंह जी को जो पैंशन मिल रही थी उसी से उनका गुजारा चल रहा था। सोमेश की पढ़ाई का खर्च भी चंदन सिंह जी ही उठा रहे थे। जब सोमेश कक्षा पाँचवी में पढ़ रहा था तब चंदन सिंह जी का हार्ट अटेक से दुखद निधन हो गया। उनके निधन से नीलेश का परिवार आर्थिक संकट से घिर गया था। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। सोनम एक घरेलू महिला थी उसने घर से बाहर निकल कर कभी कहीं नौकरी नहीं की थी। एक दिन सोमेश ने मम्मी से कहा कि नुक्कड़ की चाय की दुकानवाला राजेश उससे कह रहा है कि अगर वो उसकी दुकान पर काम करेगा तो वो उसे रोज डेढ़ सौ रुपये देगा। सोमेश ने पढ़ाई छोड़कर काम करने का मन बना लिया था बस वो मम्मी से अनुमति लेने आया था। सोनम ने जब अपने साढ़े दस साल के बेटे के मुँह से यह बात सुनी तो वो भीतर से काँप गई। सोमेश अत्यंत प्रतिभाशाली था हमेशा अपनी कक्षा में टॉप आता था। उसकी पढ़ाई वो कैसे छुड़ा दे। इतना छोटा बच्चा कैसे सुबह सात बजे से रात के नौ बजे तक नौकरी करेगा। वो भी चाय की दुकान पर। सोनम ने दृढ़ निश्चय कर लिया था कि वह किसी भी हालत में सोमेश की पढ़ाई नहीं छुड़वाएगी। वो सीधे रुक्मणि काकी के पास गई तथा उनसे कहा कि वे उसे कोई काम दिलवा दें। इस पर रुक्मणि ने कहा कि मैं मेरे मालिक से पूछकर बताऊँगी। शाम को उन्होंने सोनम से कहा घर बैठे का काम है तुम्हें सब्जी काटना है इसके तुम्हें चार सौ रुपये मिलेंगे। चार सौ रुपये रोज की रकम सोनम के लिए बड़ी अहम थी। उसने वो काम करना शुरू कर दिया था। उन पैसों से परिवार का खर्च चलने लगा था तथा सोमेश की पढ़ाई भी नहीं छूटी थी। सोनम को काम करते हुए पाँच साल हो गए थे। आज सोमेश का रिजल्ट आया था और वो मेरिट में आया था। नीलेश के परिवार में बहुत दिनों बाद खुशियाँ लौटी थीं सब खूब ख़ुश थे।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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