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कहानी: ठेकेदार

पी एच ई विभाग से सेवानिवृत बड़े  बाबू रमेश जी ने अपनी ग्रेच्युटी तथा  अन्य फन्ड से अपने प्लॉट पर मकान बनाने का सपना देखा था । इसके लिए उन्होंने अपने मित्र सोहनलाल के कहने पर जिस ठेकेदार  को   मकान बनाने का ठेका दिया था वो उनके पूरे नौ लाख रुपये खाकर भाग गया था । उस ठेकेदार का नाम बटनलाल था उसने अपना फोन भी  बंद कर लिया था । ठेकेदार ने तीस लाख रुपये में छः महीने में डुप्लेक्स बनाकर देने का वादा किया था मगर वो बीच में ही काम छोड़कर भाग गया था हारकर! रमेश जी ने बैंक से कर्ज लेकर  वो मकान पूरा करवाया था ठेकेदार की लूट के कारण वे डूप्लेक्स की जगह सिंगलेक्स बना पाए थे इसमें उनके पूरे दो साल लग गए थे आज उन्होंने अपने नए मकान में गृह प्रवेश किया था। फिर भी वे चिंता मुक्त नहीं हो रहे थे बैंक से जो लोन लिया था उसकी किश्त अठारह हज़ार रुपये प्रतिमाह थी जिसे उन्हें पूरे पाँच सालों तच पेंशन से चुकता करना थी।
रमेश बाबू पैंतीस साल तक सरकारी मकान में रहे थे परिवार की जिम्मेदारियों के कारण वे अपना खुद का मकान नहीं बनवा पाए थे  आवासीय भूखण्ड तो उन्होंने पहले ही खरीद लिया था। वे रिटायर मेन्ट  के समय मिले पैसे से मकान बनवाना चाहते थे।एक दिन उनका मित्र सोहनलाल उनके पास आया वो  ठेकेदार बटनलाल को उनके पास लाया था उसने बटनलाल की बहुत तारीफ की थी मित्र की बात मानकर उन्होंने बटनलाल को  तीस लाख रुपये में डूप्लेक्स मकान बनाने चा ठेचा दे दिया था  बटनलाल ने शुरू में बडी चिकनी  चिपुडी बातें कर उन्हें अपने विश्वास में लेकर  ज्यादा पैसा खींच लिया  भूतल की छत डल गई थी तथा ब्रिक वर्क पूरा हो गया था  प्रथम तल के सभी काॅलम खड़े कर दिए गए थे।  इस बीच वो जितने पेमेन्ट माँगा  करता रहा उनता पेमेंट वो देते रहे   वो भी कहता  घर की बात है। आपका मकान में अच्छा बनवाऊँगा। निर्माण कार्य के दौरान रमेश बाबू के परिचित मुकेश कुमार उनके साथ मकान का अवलोकन करने आए तो उन्हें कुछ गड़बड़ी नजर  आई तो उन्होंने रमेश बाबू से कहा आप मकान का निरीक्षण इंजीनियर से  करवा लो  वो ही सब बाते बताएगा  रभेश जी सिविल इंजीनियर  अरुण कुमार को लाए उन्होंने कहा मकान का कन्स ट्रक्शन अच्छा नहीं है।  प्रथम तल के सभी कॉलम टेडे हैं इन्हें तोड़ना पड़ेगा । इस पर रमेश जी की ठेकेदार बटनलाल  से कहा सुनी हो गई  थी।  बटन लाल शहर छोड़कर भाग गया था।  उसने बहुतों को चपत  लगाई थी। इंजीनियर ने कहा की मकान इतना मजबूत नहीं है।  इस पर भूतल के ऊपर मकान बनाना संभव नहीं होगा । या फिर आपको पूरा मकान  ध्वस्त कर फिर से बनाना पड़ेगा।  मजबूरी होकर उन्होंने   सिंगलेक्श  मकान ही  बनवा लिया था ।  उस मकान  में गृह प्रवेश करने पर उनका वर्षों का घर का मकान बनवाने का सपना साकार हो रहा था। 


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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