बहू बेटों के अत्याचार से परेशान होकर जब कुलकर्णी बाबू आत्महत्या करने जा रहे थे तब विमला मेडम ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया था। बाद में उन्होंने विमला मेडम से शादी कर ली थी और आज वे शादी की पाँचवी सालगिरह मना रहे थे।
बात आज से छः वर्ष पुरानी है। तब अरुण कुलकर्णी जी की उम्र छप्पन वर्ष की थी। वे शिक्षा विभाग में एकाउण्टेन्ट के पद पर कार्य करते थे। उस समय वे बहुत परेशान रहा करते थे। उनका इकलौता बेटा नीरज और उसकी बहू रीना ने उनका जीना हराम कर रखा था। रीना तो यहाँ तक कहती थी कि मैं तेरी जिंदगी बर्बाद कर दूँगी तुझ पर छेड़छाड़ का झूठा इल्जाम लगाकर। वो उन्हें ब्लेकमेल कर रही थी उसका चाल चलन ठीक नहीं था। उनका बेटा नीरज सब कुछ जानते हुए भी रीना का साथ देता था। वो जब उन्हें मानसिक प्रताड़ना देती तो नीरज चुप रहता था। जब वे बहुत परेशान हो गए तो आत्महत्या करने का विचार उनके मन में आया। यह विचार इतना मजबूत हुआ कि उन्होंने उसी रात को अपनी जीवन लीला खत्म करने का निर्णय ले लिया। विमला जो कि सरकारी स्कूल में शिक्षक थी। वो उस दिन ऑफिस में जी पी एफ पर लोन का प्रकरण लेकर आई थी। वे उसका काम कर रहे थे जाने कैसे उसे ऐसा लगा कि कुलकर्णी बाबू मानसिक रूप से बहौत परेशान हैं। फिर उनके मुँह से यह बात निकल गई की मैडम आज आपका प्रकरण हल करा लीजिए कल किसने देखा कल शायद मैं आपको न मिलूँ मेरी जगह पर यहाँ कोई ओर हो। इस पर मेडम बोली सर आप कहाँ जा रहे हैं इस पर वे चुप हो गए। मेडम के ज्यादा जोर देने पर उन्होंने अपने मन की बात बताई तब मैडम ने उन्हें अच्छे से समझाया। फिर बोली बीस साल से मैं अकेली रह रही हूँ। मेरे पति अनिल तथा दोनों बच्चों का कार एक्सीडेन्ट में निधन हो गया था। फिर भी मैंने अपने आपको सम्भाला आत्म हत्या का कभी मन में विचार तक नहीं आया। कुलकर्णी बाबू को विमला मेडम की बातों ने बड़ी दिलासा दी। इसके बाद विमला मेडम ने रात में चार बार फोन कर के उनसे बात की तथा उन्हें दिलासा दी। कुलकर्णी बाबू की पत्नी कमला का तीस साल पहले कैंसर से निधन हो गया था। तब नीरज डेढ़ वर्ष का था। उन्होंने दूसरी शादी नहीं की थी नीरज के लालन पालन में उन्होंने अपने आपको व्यस्त कर लिया था। नीरज को पढ़ा लिखाकर उन्होंने इस योग्य बना दिया था कि उसकी कंपनी में नौकरी लग गई थी। उसकी शादी उन्होंने रीना से कर दी थी और वे इस बात से खुश थे कि घर में बहू के आने से रौनक आ जाएगी। पर उसी बहू ने उनका जीना हराम कर दिया था। विमला मेडम की उम्र भी चौवन साल की हो गई थी। धीरे धीरे उन दोनों में निकटता होने लगी और फिर उनमें प्यार पनप गया। आखिर उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया। उनके इस निर्णय का नीरज ने तथा रीना ने प्रबल विरोध किया पर अब कुलकर्णी बाबू को विमला मेडम का साथ मिल गया था। शादी के बाद कुलकर्णी जी को बहू बेटे ने घर में नहीं रहने दिया तो उन्होंने विमला मेडम के मकान में उनके साथ रहने लगे। यह शादी दोनों के लिए नए जीवन में प्रवेश की तरह थी। इस शादी वे दोनों बहुत खुश थे और आनंद के साथ अपनी ज़िंदगी को जी रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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