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कहानी: ससुराल

राजेश रामा खेड़ी गाँव में दर्जी का काम करता था गाँव में ही उसकी टेलर की दुकान थी पूरे तीन साल बाद आज उसकी पत्नी विमले मायके से उसके पास आई थी विमला को अच्छी तरह से ये बात समझ में आ गई थी कि पति के साथ रहकर ही वो सुख से रह सकती है। 
राजेश की शादी पाँच साल भोपाल में रामदयाल जी की बेटी विमला से हुई थी। शादी के बाद जब विमला पहली बार ससुराल आई तो उसे गाँव का माहौल,अच्छा नहीं लगा छृ महीने तो उसने जैसे तैसे निकाले फिर वो जो मायके गई तो वापस नहीं आई राजेश जब उसे लिवाने गया तो सास ने विमला को भेजने से इंकार कर दिया कहा मेरी बेटी गाँव में नहीं जाएगी तुम्हें अगर इसके साथ रहना है तो भोपाल में आकर रहो। राजेश ने यह बात गाँव में आकर,अपनी माँ से कही इस पर उसकी माँ ने कहा बेटा तेरी खुशी में हमारी खुशी तू भोपाल चला जा बहू चे साथ सुखपूर्वक रह हमें कोई एतराज नहीं है। राजेश भोपाल आकर अपनी पत्नी के साथ रहने लगा था विमला ने मायके के पास ही एक घर किराये से ले लिया था। इसके बाद भी राजेश सुखी नहीं था यहाँ आकर राजेश ने टेलर की दुकान पर नौकरी कर ली थी। वो सास की दखलंदाजी से परेशान था। विमला के दो भाई थे मौका पढ़ने पर वे पाँचों एक हो जाते थे और राजेश को परेशान करते थे इसी दौरान विमला ने एक बेटी को जन्म दिया जिसका नाम प्राची रखा गया राजेश ने सोचा की बेटी के जन्म के बाद सब कुछ डीक हो जाएगा पर ऐसा हुआ नहीं। एक बार की बात है राजेश की किसी बात पर विमला से कहा सुनी हो गई। विमला रोते हुए माँ के पास आई तो माँ को राजेश पर बहुत गुस्सा आया दोनों भाई भी गुस्से से लाल हो गए उन्होंने मिलकर राजेश की जणकर पिटाई कर दी। विमला ने उन्हें रोका भी नहीं । राजेश ने तय कर लिया था कि अब वो भोपाल नहीं रहेगा उसने विमला से गाँव चलने को कहा तो उसने साफ मना कर दिया। तब राजेश अकेला ही गाँव में आ गया था। उसने विमला के आने की उम्मीद ही छोड़ दी थी उधर विमला भी दुखी थी उसकी दोनों भाभियों ने उसे नौकर बनाकर रख दिया था । माँ भी अपनीशबहुओं से कुछ भी नहीं कहती थी। विमला परेशान हो गई थी रह रहकर उसे राजेश की याद आती थी। एक विवाह समारोह में राजेश का विमला से आभना सामना हुआ विमला पे राजेश से माफी माँगी और कहा मैं बिना शर्य के आपके साथ रहना चाहती हं। तो राजेश ने कहा आ जाओ मैं तुम्हें रोकने वाला कौन होता हूँ फिर विमला बोली लेने नहीं आओगे मुझे। राजेश ने कहा नहीं तुम्हें आना हो तो आ जाओ मुझे कोई ऐतराज नहीं। हारकर आज विमला राजेश के पास आ ही गई थी । और बहुत खुश नजर आ रही थी।

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रचपाकार
प्रदीप कश्यप

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