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कहानी: ख़ुशियों का त्यौहार

शहर के डेरी व्यवसायी कृष्ण मुरारी इस वर्ष दीपावली का त्यौहार खूब खुशियों के साथ बड़ी धूमधाम से मना रहे थे अपनी पत्नी सरोज को उन्होंने हीरों का हार दिलाया था अपने बेटे राकेश को मन पसंद बाईक तथा बिटिया मोहिनी को मँहगा वाला लेपटॉप ।चार साल से घर की पुताई नहीं हुई थी इस बार उन्होंने घर पर भी रंग रोगन कराया था खूब बिजली की झालरे लगाई थी आतिशबाजी भी सत्तर हज़ार रुपये की खरीदी थी पूरा परिवार त्यौहार की खुशियों में मग्न था।
आज के दिन कृष्ण मुरारी जी को पिछली दीपावली की याद ताजा हो गई पिछली दीपावली जैसी दुखद दीपावली उनकी कभी नहीं रही थी पिछली दीपावली पर वो अस्पताल में भर्ती हुए थे उन्हें हार्ट अटेक आया था तथा उनकी ऐंजियो प्लास्टी हुई थी पूरे डेढ़ महीने वे अस्पताल में भर्ती रहे थे घर के सभी लोग अस्पताल में थे खास दीपावली के दिन उनकी एंजियो प्लास्टी हो रही थी पिछले वर्ष वे देव दिवाली भी नहीं मना सके थे। 
बात तब की है जब नवरात्रि का नौ दिवसीय पर्व प्रारंभ हुआ था कृष्णमुरारी जी को हाई ब्लड प्रेशर था और वो इसकी गोली का नियमित सेवन कर रहे थे डॉक्टर ने सख्त हिदायत दी थी की गोलियों का सेवन किसी भी हाल में बंद नहीं करना मगर कृष्ण मुरारी नवरात्रि का व्रत कर रहे थे इसलिए उन्होंने दस दिन तक बल्डप्रेशर की दवा नहीं खाई उधर फलाहार के नाम पर देशी घी में तली और बनी हुई फलाहारी वस्तुओं का सेवन किया उससे उनका कलस्ट्रोल बढ़ गया नसों में ब्लॉकेज हो गए जब व्रत खोला तो उसमें भी उन्होंने पूडी पकवान का सेवन किया जब उनकी तबियत बिगड़ी तो वे अस्पताल गए अस्पताल में डॉक्टर ने ब्लडप्रेशर की जाँट की दवाएँ दी और कहा भर्ती हो जाएँ फिर जाने क्या सोचकर बोले भर्ती होने की जरूरत नहीं है यह कहकर कुछ और दवाएँ लिखकर उन्हें घर भेज दिया चार दिन तक तो वे ठीक रहे मगर पाँचवे दिन उनकी हालत अचानक बहुत खराब हो गई उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया इस बार उनका बेटा राकेमश उन्हें हार्ट केयर अस्पताल में ले गया जहाँ जाँच कर डॉक्टर ने कहा इन्हें एक अटेक आ चुका है और दूसरा अटेक आने वाला है उन्हें फौरन भर्ती किया गया आई सी यू में लाने के बाद उन्हें अटेक आ गया मगर समय पर इलाज मिल जाने से वे बच गए डॉक्टरों ने हार्ट की तीनों नसों में नब्बे पर सेन्ट ब्लाँकेज बताए थे उनका प्राइवेट अस्पताल में पूरे डेढ़ महीने इलाज चला था जिसमें उनके बीस लाख रुपये खर्च हो गए थे दिवाली पर उनके घर एक दिया तक नहीं जला था पूरा परिवार अस्पताल मैं था डॉक्टरों ने कह दिया था कुछ भी हो सकता है आप इसके लिए तैयार रहें एंजो प्लास्टी सफल होने के बाद भी उन्हें आई सी यू में रखा गया था तथा उनकी अच्छी तरह देखभाल की गई थी अस्पतेल से आने के एक माह तक उन्होंने घर पर ही आराम किया था जब ठीक हुए तो डेरी पर,आना प्रारंभ कर दिया डेरी घाटे में चल रही थी इलाज में भी बहुत सारा पैसा खर्च हो गया था ग्राहकी मी कम हो गई थी इसका फायदा पड़ोस के डेरो व्यवसायी ने जमकर उठाया था कृष्ण मुरारी जी ने हिम्मत नहीं हारी औरअपने काम में ईमानदारी से जुट गए उनके पुराने ग्राहक आने लगे कुछ दिनों में,उनकी डेरी ठीक चलने लगी ऐसे करते करते होली का पर्व आ गया खाद्य विभाग ने खाने पीने की वस्तुएँ बेचने वालों के खिलाफ अभियान चलाया तो कृष्ण मुरारी जी की ईमानदारी ने साथ दिया उनकी दुकान में सब कुछ ठीक और तय मापदण्डों के अनुसार पाया गया मगर पड़ोस की डेरी से बड़ी मात्रा में नकली मावा नकली देशी घी एक्सपायर डेट वाला पनीर मक्खन जब्त किया गया उसकी डेरी सील कर दी गई अब कृष्ण मुरारी ही एकमात्र डेरी व्यवसायी रह गए थे उनकी ग्राहकी कई गुना बढ़ गई थी साथ ही उनका मुनाफा भी बढ़ गया था यही कारण था कि इस बार की दिवाली वे धूमधाम और ख़ुशी के साथ मना रहे थे पूरा परिवार ख़ुशी में डूबा हुआ था सबके चेहरे दमक रहे थे कृष्ण मुरारी जी भी बहुत ख़ुश दिखाई दे रहे थे।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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