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कहानी: इंसाफ़

महानगर के डॉन अजय साथी ने पिछले छः माह में तकीपर गाँव में सक्रिय रहकर गाँव को दबंग दलीप सिंह के आतंक से मुक्ति दिला दी थी। फिर शहर से अपने साथ लेकर आए चार्टर्ड एकाउण्टेन्ट उमेश और उनकी टीम से पूरा हिसाब बराबर कर सबको कर्ज के चंगुल से मुक्त करा दिया था। तथा उनकी छीनी हुई जमीन और मकान भी वापस दिला दिए थे। दलीप सिंह का दबदबा खत्म होते ही वो रात के अंधेरे में भागने की कोशिश कर रहा था। जिसे अजय साथी ने पकड़ लिया था और कहा था अभी तेरे पर गाँव वालों का दस करोड़ रुपये का कर्ज बाकी है। वो खाकर तुझे नहीं जाने दूँगा और अगर चला भी गया तो दुनिया के किसी भी कोने से पकड़कर यहीं ले आऊँगा। दलीप सिंह की गैंगस्टर अजय साथी के सामने कोई हैसियत नहीं थी। अब उसके पास कुछ भी नहीं बचा था लोगों का कर्ज कैसे चुकाता। वो अजय से रहम की भीख माँग रहा था जबकि अजय का कहना था कि अब तुझे इसी गाँव में रहकर मजदूरी कर के अपना जीवन गुजारना पड़ेगा।
अजय साथी इसी गाँव का रहने वाला था। उसके पिता गिरवर की बीस एकड़ जमीन थी। जब गिरवर का निधन हो गया तब अजय साथी अपनी जमीन पर गया तो दलीप सिंह अपने लठैतों को लेकर आ गया और बोला यह जमीन तो हमारी है और उसने कागजात बताए, कागजात सही थे। दलीप सिंह ने अजय के पिताजी के सीधेपन का लाभ उठाकर पूरी जमीन हड़प ली थी। जबकि बीस हजार रुपये के कर्ज के बदले गिरिवर पूरे दो लाख दलीप सिंह को दे चुके थे। जमीन हड़पने के बाद अब भी दलीप सिंह चालीस हजार रुपये का कर्ज बाकी बता रहा था। पिता के मरने के बाद अजय के घर एवं जमीन पर दलीप सिंह ने कब्जा कर लिया था। अजय के पास अब गाँव में कुछ भी नहीं बचा था। अजय साथी महानगर में आ गया था। यहाँ वो मजदूरी कर अपना जीवन यापन करना चाहता था। वो एक ठेकेदार के यहाँ मजदूरी भी कर रहा था। मगर अन्याय का विरोध करते-करते वो कब अजय से अजय साथी बन गया इसका उसे अहसास ही नहीं हुआ। उसका रुतबा दिनोंदिन बढ़ता चला गया। धीरे-धीरे सब उसकी कृपा के मोहताज हो गये। अजय साथी के नाम के चर्चे तकीपुर तक भी पहुँच गए थे। अजय की फितरत दलीप सिंह जानता था उसे यही डर था कि यह बदला लेने जरूर आएगा। उसका डर सही निकला पूरे दस साल बाद वो गाँव आया, दलीप सिंह के लेनदेन का सारा रिकार्ड जप्त किया, चार्टर्ड एकाउण्टेन्ट से उसकी जाँच कराई, बैंक की दर पर ब्याज भी जोड़ा फिर भी पूरे गाँव को कर्ज में जकड़कर रखने वाले दलीप सिंह पर गाँव वालों का दस करोड़ का कर्ज निकल रहा था। अजय ने वो रिकार्ड पुलिस के हवाले कर दिया था। पुलिस जो दलीप सिंह के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर पाती थी अब अजय की पहल पर पुलिस ने दलीप पर एफ आई आर में प्रकरण दर्ज किया था। अजय ने सबके गिरवी रखे मकान और जमीनें बकायदा कानूनी कार्यवाही संपन्न कराने के बाद गाँव वालों को सौंप दी थी। गाँव वाले बहुत खुश थे, उन्हें बहुत वर्षों बाद दलीप सिंह के चंगुल से मुक्ति जो मिली थी।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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