सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कहानी: बहनोई

राकेश की बेटी प्रभा विवाह के बाद पहली बार अपने मायके आई थी और अपनी ससुराल की बाते अपनी मम्मी सुमन को बता रही थी । जब वो अपने पति सौरभ के विषय में बात करने लगी तब राकेश बोले बेटी जब तू पाँच साल की थी तब तूने मुझे अपने मामाजोवर मेरे साले उनसे मुझे कई बार पिटवाया था। अब अगर तेरा भाई प्रमोद अगर तेरे सामने तेरे पति सौरभ की पिटाई करे तो तुझे कैसा लगे यह सुनकर प्रभा बोली पापा आप वो बातें भूल क्यों नहीं जाते उसमें आपकी गलती भी तो होती थी इस पर सुमन बोली उसका दुख तो मुझे आज भी याद कर के बहुत होता है।
राकेश को अपने वो पुराने दिन याद आ गए थे राकेश राजमिस्त्री का काम करता था उसकी शादी रायनगर में हुई थी जो उसके गाँव आँवली खेड़ा से दस किलोमीटर दूर था। उसे रोज काम के लिए रायनगर आना पड़ता था जब उसकी शादी रायनगर में सुमन से हुई तो वो भी रायनगर में आकर रहने लगा था ।
सुमन का परिवार भी साधारण था उसके दोनों भाई मोहन और बलवंत कंपनी में सुरक्षा गार्ड थे पिता मूलचंद सब्जी का ठेला लगाते थे । घर का मकान था उसमें सब एक साथ रहते थे सुमन और राकेश कोष उन्होंने अपने घर के पास ही किराये का मकान दिलवा दिया था उसी मकान में उनकी बेटी प्रभा का जन्म हुआ था तथा बेटे प्रमोद का जन्म प्रभा के जन्म के दो साल बाद हुआ था। राकेश सारे दिन काम करता और थक कर चूर हो जाता तो उसे दर्द के कारण देर से नींद आती थी साथियों के बहकाने पर उसने शराब पीना शुरू कर दिया था कभी कभी वो शराब के नशे में सुमन की पिटाई भी कर देता था नशा उतरने पर उसे इस बात का बहुत अफसोस भी होता था दोनों बच्चे अपने पापा का ये रूप देखकर डर सहम कर कोने में दुबक जाते थे एक बार की बात है जब प्रभा की उम्र पाँच वर्ष की हो गई थी तब उसके पापा उसकी मम्मी की शराब के नशे में पिटाई कर रहे थे यह देखकर प्रभा को अपने पापा पर बहुत गुस्सा आया और वो दौड़कर अपने दोनों मामाओं को बुला लाई दोनों मामा अपनी बहन की पिटाई बर्दाश्त नहीं कर सके और'उन्होंने मिलकर राकेश की अच्छी खासी पिटाई कर दी जिससे राकेश का नशा उतर गया और वो अपने सालों से माफी माँगने लगा ऐसा जब कई बार हुआ तो उसे लगा कि उसके सालों की नजरों में उसकी इज्जत खत्म हो चुकी है तभी तो जिस बहनोई का सम्मान करना चाहिए उसको वो पीट रहे हैं। यह सोचकर उसने शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर दिया उससे जो पैसे बचे वो सुमन जोडकर रखने लगी थी अब राकेश अपने बच्चों पर ध्यान देने लगा था सुमन को पीट ना उसका शराब छोड़ने के साथ ही ठूट गया था। इसके बाद राकेश अच्छा पति और जिम्मेदार पिता साबित हुआ साले भी अब उसका सम्मान करने लगे थे सुमन तो बहुत खुश रहने लगी थी जो पैसे बच रहे थे वो बच्चों की पढ़ाई लिखाई में खर्च हो रहे थे। बच्चे जब पढ़ लिख गए तब उन्होंने प्रभा की शादी सौरभ से कुछ दिन पहले कर दी थी जो शादी चे बाद पहली बार मायके आई थी। तब उनके बीच ये चर्चा चल रही थी तभी ये बात निकली थी।
****
रचनाकार
प्रदीप कश्यप

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

व्यंग्य : जीते जी रोटी को तरसाया मरने के बाद श्राद्ध

आज कल सोलह श्राद्ध का समय चल रहा है कई जगह पर श्राद्ध के आयोजन हो रहे हैं बहुत सारे लोगों को भोजन कराया जा रहा है अपने पितरों के श्राद्ध में लोग हज़ारों रुपये भी खर्च कर रहे हैं उनमें कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने जीते जी अपने बूढ़े माँ बाप की खबर तक नहीं ली और अब उनके मरने पर उनके श्राद्ध पर बड़ा आयोजन कर रहे हैं उनकी तस्वोर पर माला चढ़ा रहे हैं। ऐसे लोगों में शहर के रविकांत जी भी हैं उन्होंने अपने स्वर्गीय माता पिता की तिथि पर भव्य आयोजन किया था खूब पकवान खिलाए गए थे खूब दान किया गया था पर उन्होंने अपने माता पिता को जीते जी बहुत दुख दिए थे। उनके पिताजी सत्तासी वर्ष के थे माँ पिच्यासी वर्ष की दोनों अपने पुराने घर में रहते थे उनका बेटा रविकांत उनकी कभी खोज खबर नहीं लेता था बेटी विदेश में दामाद के साथ रह रही थी। वे दोनों ही एक दूसरे का ख्याल रख रहे थे एक दिन रविकांत जी के पिताजी का दुखद निधन हो गया तब रविकाँत घर?आया पिताजी की उत्तर क्रिया करने के बाद चला गया रविकाँत की माँ अकेली रह गई थीं वे सीधी सरल थी जबकि बेटा बहू चपल चालाक बेटे बहू ने बातों में लेकर उनकी सारे सोने चाँदी के जे...

दुर्भावना रखकर निंदा करने वाले लोग (व्यंग्य)

कबीर जी ने निंदक को इसलिए हितकारी कहा है क्योंकि वो हमारी बुराइयों को उजागर करते हैं और हम उन्हें दूर करते चले जाते हैं। इस तरह हमारा स्वभाव निर्मल हो जाता है। लेकिन आज के दौर में दुर्भावना रखकर निंदा करने वालों की संख्या ज्यादा हो गई है। ऐसे लोग हमारी बुराईयों को उजागर नहीं करते बल्कि हमारी खूबियों को छिपाकर मन में दुर्भावना रखते हुए हमारी निंदा करते हैं। इन लोगों से दूर रहने में ही भलाई है। अगर इनको साथ रखा तो ये हमारा मनोबल तोड़कर रख देंगे। हमें नकारा साबित करने की कोशिश करेंगे हमारे आत्मविश्वास को डगमगा देंगे। ये दुर्भावना रखकर निंदा करने वाले लोग अपने विरोधियों को निपटाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उसके सारे अवसर या तो खत्म कर देते हैं या छीन लेते हैं। ये लोग हद दर्जे के मतलबी इंसान होते हैं। जिस से मतलब निकालना हो उसकी झूठी तारीफों के पुल बाँधते हैं। उसकी खूब चापलूसी करते हैं उसे महान सिद्ध कर देते हैं और समाज में एक भ्रम की स्थिति पैदा कर देते हैं। ये ग्रुप बनाने में माहिर होते हैं। जो इनके गुट में शामिल हो जाता है ये उसके हर ऐब ढँक लेते हैं। उसे स्थापित करने के हर स...

कहानी: शादी के लिए नौकरी

रवीन्द्रसिंह को एक प्राईवेट दवा कंपनी में नौकरी किए अभी एक महीना भी नहीं हुआ था कि वह नौकरी छोड़ने का इरादा करने लगा था  लेकिन उसकी  माँ कंचन  का कहना था  जब तक  तेरी शादी न हो जाए  तब तक नौकरी करता रह जब शादी हो जाए तब नौकरी छोड़ना जबकि रवीन्द्र सिंह सोच रहा था कि एक महीना गुजारना मुश्किल हो रहा है कब तो उसकी शादी होगी और कब वो ऐसी नौकरी से पीछा छुड़ाएगा रवीन्द्र सिंह की  उम्र पैंतीस वर्ष की होने जा रही थी  और वो अभी तक कुँवारा  था कंचन जी का वह इकलौता लड़का था  उनकी दो लड़कियाँ थीं दोनों रवीन्द्द से बड़ीं थीं दोनों की शादी हो गईं थी दोनों के बच्चे   कोई छठी में तो कोई सातवीं में तो कोई आठवीं में पढ़ रहा था।  कंचन जी कस्बे के  एक सरकारी दफ्तर में चपरासी की नौकरी कर रही थीं  उनके पति सुरेन्द्रसिंह  सरकारी दफ्तर में बाबू थे  सरकारी काम से जब वे कहीं जा रहे थे तब  एक ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी थी जिससे उनका वहीं दुखद निधन हो गया था।  जब रवीन्द्र एक साल का था तब उसके पिता का निधन हुआ था उसकी दोन...