पी डबल्यू डी के बड़े बाबू राधेश्याम भ्रष्टाचार के जुर्म में जेल की हवा खा रहे थे उन्हें तीन साल का कारावास मिला था महज दस हज़ार रुपये की रिश्वत में उनकी नौकरी भी चली गई और सज़ा मिली वो अलग इसके साथ ही बदनामी भी खूब हुई थी।
राधेश्याम जी की पी डब्ल्यू डी में पन्द्रह वर्ष पहले नौकरी लगी थी वे छोटे बाबू के पद पर नियुक्त हुए थे नौकरी के लगते ही उनकी शादी के प्रस्ताव आना शुरू हो गए जल्दी ही उनकी शादी नीरा से हो गई शादी में उन्हें खूब दान दहेज मिला वे खुशी से फूले नहीं समा रहे थे।दूसरी और उनके साथ पढ़ने वाला किशोर सिंह न्यूज पेपर एजेन्ट बन अखबार बेच रहा था सरकारी नौकरी नहीं होने के कारण उसकी?शादी नहीं हो रही थी हॉकर समझकर भी उन्हें कोई शादी का प्रस्ताव नहीं दे रहा था राधेश्याम को तनख्वाह के अलावा ऊपर की कमाई भी खूब हो रही थी। वो बड़े ठाठ बाट से रहते थे ।किशोर सिंह का तो बस गुज़ारा चल रहा था। एक दिन किशोर सिंह ने विचार किया राधेश्याम ने और उसने एक साथ ही बी ए किया था राधेश्याम ने इसके बाद नौकरी के लिए खूब मेहनत की थी सो उनकी तो नौकरी लग गई थी लेकिन किशोर सिंह ने लापरवाही कर दी थी । जिसके कारण वो सरकारी नौकरी प्राप्त नहीं कर सका था राधेश्याम जी को अपनी नौकरी का बहुत घमंड था । किशोर सिंह ने तय कर लिया की वह निजी तौर से ही ईमानदारी से धन कमाकर अपने को समृद्थ करेगप।उसने स्थानीय दैनिक समाचार पत्र आवाज का प्रकाशन करना शुर कर दिया पंजीयन उन्होंने पहले ही करा लिया था।
धीरे धीरे अखबार चल निकला विज्ञापनों से तथा अखबार की बिक्री से उनकी अच्छी कमाई होने लगी थी। ऑफिस भी खोल लिया था बड़े बडे लोगों से उनकी पहचान होती चली गई थी। और एक दिन उनकी शादी भी हो गई।अखबार ने उनका दब दबा भी कायप कर दिया था राधेश्याम जी भी उनकी अनदेखी नहीं कर पाते थे। अचानक वक्त ने पलटा खाया राधेश्याम जी भ्रष्टाचार के मामले में फँस गए और उन्हें इसकी सजा भी मिल गई थी आज किशोर सिंह यही विचार कर रहे थे कि राधेश्याभ जी ने लोभ के फेर में अपना केरियर तबाह कर लिया था। और उन्होंने दिन रात एक कर खूब मेहनत कर ये मुकाम हासिल किया था। वे अधिमान्य पत्रकार का दर्जा प्राप्त थे इससे उन्हें और भो कई लाभ मिल रहे थे वे अलग से थे। आज किशोर सिंह खुशहाल जिंदगी जी रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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