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कहानी: छोटी नौकरी से बुलंदी

आइ ए एस अधिकारी रामदीन कुशल एवं ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने जाते थे वे लोगों के चहेते अधिकारी थे वे जहाँ जहाँ भी कलेक्टर बनकर रहे वहाँ वहाँ अपनी गहरी छाप छोड़ के आए थे रामदीन सर ने जिस नगर निगम में चपरासी की नौकरी से शुरूआत की थी वहाँ के वे आयुक्त बनकर आए थे और अपनी प्रशासनिक क्षमताओं से सबको कायल कर दिया था। आज मुख्य मंत्रीजी ने उन्हें बुलाकर उनसे कहा था कि आपको केन्द्र में बुलाया जा रहा था पर मैं नहीं चाहता था कि आप जैसा अधिकारी हमारे प्रदेश से जाए । इसलिए मैंने आपको स्थान्तरित नहीं होने दिया मैंने ठीक किया न रामदीन जी ने कहा यह मेरे लिए बहुत ख़ुशी और गर्व की बात है कि आप मुझ पर विश्वास रखते हैं तथा मुझे खुलकर काम करने का अवसर देते हैं। यह बात सुनकर मुख्यमंत्री जी हल्के से मुस्कुरा दिए थे। रामदीन लगातार बिना थके काम करने वाले अधिकारियों में शामिल थे इसका एक कारण यह भी था कि बचपन से ही उन्होंने बहुत संघर्ष किया था।
बात तब की है जब रामदीन जी ने आठवीं परीक्षा सर्वोच्च अंकों से पास कर ली थी और नवीं में एडमीशन का फार्म लेकर आए थे। तभी ख़बर आई कि उनके पिताजी सुखदीन जो राज मिस्त्री का काम करते थे वे पाँच मंजिल ऊपर से काम करते हुए गिर पड़े थे और उनका वहीं दुखद निधन हो गया था उनके निधन के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी रामदीन जी के काँधों पर आ गई थी । उनके तीन छोटे भाई बहिन थे अपाहिज दादी थी माँ उन्हें छोड़कर काम करने जा नहीं सकती थी । उस समय रामदीन जी उम्र तो चौदह वर्ष की थी पर उनका भरा बदन देखकर यह लगता था कि वे अठारह साल के होंगे। रामदीन जी ने हाईवे के एक ढाबा पर वेटर की नौकरी कर ली थी उनकी ड्यूटी शाम को चार बजे से रात को बारह बजे तक की थी वहाँ से वे सीधे घर आकर सो जाते थे फिर सुब्ह आठ से चार बजे तक एक बेकरी में काम करते थे तब कहीं परिवार का खर्च और दादी की दवाई के पैसे जुटा पाते थे। चार साल उनके ऐसे ही बीत गए थे जब वे अठारह साल के हुए तब नगर निगम में चपरासी के पद पर भर्ती निकली थी जिसमें शैक्षणिक योग्यता सिर्फ आठवीं पास चाही थो। अधिक पढ़े लिखों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उसमें रामदीन सर का चयन जब चपरासी पद पर हुआ तो वे खुशी से फूले नहीं समाए।
यहाँ चपरासी बनने के बाद रामदीन सर ने नाइट की ड्यूटी माँगी जो मंजूर कर दी गई क्योंकि और कोई नाइट ड्यूटी करने को तैयाव नहीं था। इस ड्युटी ने उन्हें पढ़ने का भरपूर ऊवसर दिया। चार साल में उन्होंने बारहवीं परीक्षा मेरिट से उत्तीर्ण की और तीन साल में यूनिवर्सिटी से बी ए में टॉप किया था। इसके बाद वे किताबों में डूब गए थे । यही कारण रहा कि आइ ए एस उन्होंने प्रथम प्रयास में क्लीयर कर लिया। अब वे वरिष्ट प्रशासनिक अधिकारी बन गए थे। आज उन्होंने सफलता के नए मापदण्ड फ्थापित किए थे दो दिन के मेले में उन्होंने एक भी अपराध नहीं होने दिया था। यह उनकी बड़ी उपलब्धि थी।
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रचनाकार 
प्रदोप कश्यप

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