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व्यंग्य: मतलब परस्ती

समाज में मतलब परस्त लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है इनमें नैतिकता नाम मात्र की भी नहीं होती ये सिर्फ अपना मतलब देखते हैं। अगर इनका मतलब निकलता हो तो ये किसी भी हद तक गिर जाते हैं लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं कितनों की ही जान माल खतरे में डाल देते हैं यह इतने गिर जाते हैं कि देश के साथ गद्दारी करने में भी इन्हें कोई हिचक नहीं होती।
नैतिकता विहीन मतलबी लोग जहाँ भी होते हैं वहीं गड़बड़ी करते हैं। एक स्थान पर वाहनों की चेकिंग हो रही थी जगह ऐसी चुनी गई थी जहाँ कोई सी सी टी वी कैमरा नहीं था जिसके माध्यम से रिश्वत ली जा रही थी वो एक साधारण आदमी था रिश्वत लेने के बाद वाहन केसा भी हो उसे छोड़ा जा रहा था चाहे वो आगे चलकर दुर्घटनाग्रस्त ही क्यों न हो जाए। चंद रुपयों के फेर में कितनी ही जाने चली जाएँ उस से इन्हें कोई मतलब नहीं। इस तरह मिली भगत से अमानक खाद्य पदार्थों की बिक्री हो रही है नकली मावा नकली दूध बिक रहा है। जानलेवा रसायनों का खाद्य सामग्री में उपयोग किया जा रहा है। जिससे आम आदमी की जान पर खतरा बना हुआ है। हाल ही में एक समाचार ने विचलित कर दिया कफ सिरप में ऐसा पदार्थ मिलाया गया था जिससे कईयों की किडनी फेल हो गई कईयों की मौत हो गई जो मारे गए उनका क्या कसूर था जो असली गुनहगार हैं उनका क्या होगा उन को कौनसी सजा दी जाएगी ये कोई नहीं जानता। अनाप शनाप कीटनाशकों के उपयोग से फसले जहरीली हो रही हैं जिनके सेवन से लोग कैंसर के शिकार हो रहे हैं। फिर भी ऐसी फसले बिना जाँच पड़ताल के बिक रही हैं जिसे लोग खरीद रहे हैं। लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है । मन में ये विचार आता है कि ऐसा हो क्यों रहा है तब एक ही बात मन में आती है कि यह सब मतलब परस्त नैतिका विहीन गैर जिम्मेदार लोगों के कारण हो रहा है । जिन्हें खूब अवसर मिल रहे हैं। उन पर रोक क्यों नहीअं लगाई जाती उन्हें दंड क्यों नहों दिया जाता यह एक छोटा सवाल है जिसका सही उत्तर देने से बचा जाता है।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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