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व्यंग्य: अपनों के साथ धोखाधड़ी और ठगी

समाज में उन लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। जो अपनों के साथ धोखा धड़ी और ठगी करने में बिल्कुल संकोच नहीं करते ऐसे लोग विश्वास घाती होते हैं जुबान के बहुत मीठे होते हैं ओर बडी सफाई से धोखा दे देते हैं । अपना समझकर जब लोग इन पर भरोसा करते हैं। तो यह उसका लाभ उठाकर अपना मतलब हल कर लेते हैं। 
    रामकिशोर जी को अपने नव निर्मित मकान में बिजली की फिटिंग करानी थी ये बात उनके सगे साले संतोष को पता चली तो उसने रामकिशोर जी से कहा मेरी पहचान का एक दुकानदार है उससे बाजार से कम दाम में सामान दिलवा दूँगा रामकिशोर जी ने उस पर विश्वास कर उसकी बात मान ली ।
जो सामान संतोष ने जिस भाव में दिलवाया वो उन्होंने खरीद लिया । और उनका भुगतान कर दिया। जीजाजी को सामान दिलवाने के बाद संतोष दुकान पर पहुँच गया और अपना कमीशन माँगा दुकानदार ने उसके मजे लेने के लिए कहा कि अरे भाई वो अपने जीजाजी हैं यही सोचकर मैंने उन्हें भाव से सामान दिया। पर संतोष अड़ गया बोला मुझे इससे कोई मतलब नहीं मेरा कमीशन दो । तब दुकानदार बोला मुझे मालूम है तुम्हारी फितरत इसलिए मैंने पहले ही तुम्हारा कमीशन निकाल लिया था यह कहते हुए उसने आठ हजार रुपये संतोश को दे दिए संतोष बोला जो भी आते हैं वे या तो मेरे रिश्तेदार होते हैं या परिचित या दोस्त। इनके साथ धोखाधडी कर झूठ बोलकर ठगकर ही तो अपना कमीशन निकलता है अगर इनका लिहाज करूँगा तो मुझे मिलेगा क्या मुझे कोई परोपकार नहीं करना मुझे तो अपने कमीशन से मतलब है। संतोष ने यहाँ तक कह दिया कि वो अपने पिता तक से कमीशन वसूल लेता है तो यह तो जीजा जी हैं। ऐसे लोगों की बचपन से ही आदत हो जाती है स्कूल की फीस के नाम से ज्यादा पैसे लेना किताब कापी के नाम से पैसे लेकर हड़प जाना और फिर उन पैसों का अपने शौक में खर्च करना। यही लोग बड़े होकर फिर अपनो के साथ ही छल कपट धोखाधड़ी और विश्वासघात करने लगते हैं इनमें जमीर नहीं होता स्वार्थ और लोभ में अंधे होकर ये अपनों के साथ ही धोखा कर देते हैं। ऐसे भी हैं। जो अपने ही दोस्त को अपनी दुकान से सामान देते समय अधिक दाम में घटैया सामान बेचने में जरा भी नहीं हिचकते। आजचल इनकी संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है जिसके कारण अब रिश्तों में पहले जैसी मिठास नहीं रही है हम एक दूसरे को संदेह की नजर से देखने लगे हैं। आखिर हमारा ये नैतिक पतन हमें कब तक पतन की ओर ले जाता रहेगा।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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