बड़े भैया गिरीश जी आज पूरे चवालीस साल की सरकारी नौकरी के बाद रिटायर हो गए थे वे राम गंज तहसील के कार्यालय के सबसे पुराने कर्मचारी थे जहाँ से नौकरी की उन्होंने शुरूआत की थी वहीं से बेदाग रहते हुए रिटायर होना बड़ी बात थी वे तहसील में पेशकार के पद पर कार्यरत थे । तीन बार उनका प्रमोशन हुआ लेकिन वे कहीं पर नहीं गए यहीं के रहे पूरी तहसील में उनकी सब से पहचान थी अंचल के गाँवों में उन्हें जानने वालों की अच्छी संख्या थी।आज जब वे रिटायर होकर घर आए तो सभी ने उनका स्वागत किया। उन्हें अपने सभी पुराने दिन याद आ रहे थे। बचपन के वे दिन भी जो उन्होंने बड़े कष्ट में गुजारे थे। गिरीश जी जब दस साल की उम्र में कक्षा चौथी में पढ़ते थे तभी से घर की जिम्मेदारियों को निभाने लगे थे उनके दो भाई तथा दो बहने थीं दोनों बहने, रोशनी और,चाँदनी सबसे छोटी थीं उनसे छोटे भाई का नाम अमित तथा उससे छोटे भाई का नाम सुमित था। उनके पिताजी हरिप्रसाद की तहसीय परिसर में छोटी सी चाय की दुकान थी। स्कूल के बाद गिरीश को चाय की दुकान पर पिताजी के काम में मदद करना पड़ती थी छोटे भाई बहनों की देखरेख भी उन्हें ही करना पड़ती थी ...