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कहानी: जिम्मेदारी

नरेश के पिताजी उमाशंकर के सड़क दुर्घटना में दुखद मृत्यु के बाद नरेश के कंधे पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई थी दो महीने पहले ही उसका ड्राइविंग लायसेन्स बना था । अभी वो लोडिंग ऑटो चलाना सीखा ही था कि पिताजी का अचानक निधन हो गया वे भी लोडिंग ऑटो चलाते थे ऑटो उनका ही था जो कुछ दिन पहले उन्होंने शोरूम से नया खरीदा था पुराना लोडिंग ऑटो चार साल पुराना जिससे नरेश ने ऑटो चलाना सीखा था। दुर्घटना में नया ऑटो चकनाचंर हो गया था और उमाशंकर जी की दर्दनाक मौत हो गई थी। इसका सदमा पूरे परिवार को था। सबसे बुरी हालत उनकी पत्नी दीपिका की थी । पति के निधन के बाद नरेश लोडिंग ऑटो चलाकर परिवार के भरण पोषण कर रहा था। आज जब रात के बारह बजे वो ऑटो लेकर आया तब तक उसकी माँ दीपिका का घबराहट के मारे बुरा हाल हो गया था।
उमाशंकर की शादी जब वे इक्कीस वर्ष के थे तभी दीपिका से हो गई थी दीपिका की उम्र शादी के समय अठारह वर्ष थी। दोनों का वैवाहिक जीवन बीस वर्ष रहा था निधन के समय, वो अड़तीस वर्ष की ही थी शादी के छः महीने तक वे संयुक्त परिवार में ही रहे थे । उमाशंकर सातवीं तक पढ़े हुए थे और मजदूरी कर गुजर कर रहे थे दीपिका के आने से उनके घर में आये दिन क्लेश होने लगा था देवरानी जेठानी में बिल्कुल नहीं बनती थी । इससे तंग आकर उमाशंकर को घर छोड़कर,अलग रहना पड़ा वो दीपिका को लेकर शहर आ गए दीपिका तब गर्भवती थी । उमाशंकर जी ने शहर में आकर हर छोटे बड़े काम किए और अपना गुजारा चलाया नरेश का एवं उससे दो साल छोटी रोशनी का जन्म किराये के मकान में ही हुआ था। उमाशंकर,जी ने सब्जी का ठेला लगाया बचत की और फिर लोडिंग ऑटो खरीद लिया । वो सुब्ह आठ बजे घर से निकलते तथा रात को दस बजे घर आते थे। इस तरह उन्होंने जो धन कमाया। इससे पन्द्रह बाई तीस फीट का आवासीय भूखंड खरीद लिया था उस पर लोन लेकर दो मंजिला मकान बनवा लिया था। जिसमे वे सुखपूर्वक रह रहे थे। कि यह हादसा हो गया था पिता के निधन के पहले जो नरेश दोस्त यारों में समय बिताता था तथा फिजूल खर्च करता था वो अब काम कर के परिवार का पालन कर रहा था । आज देरी का कारण बताते हुए नरेश मम्मी दीपिका से कह रहा था कि ऑटो के तीनों टायर खराब हो गए थे जिन्हें बदलवाने में उसे इतना समय लग गया था।
दीपिका अब थोड़ी बे बेफिक्र नजर आ रही थी।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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