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कहानी: मुनीम सेठ

मुनीम सेठ जी के नाम से विख्यात सतेन्द्र शर्मा आज की स्थिति में किशनगंज के सबसे बड़े गल्ला मर्चेन्ट थे। उनका करोड़ों रुपयों का बिजनिस, खुद के ट्रक थे, गोदाम था वेयरहाउस था। वे किशनगंज के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति थे। किशनगंज कृषि उपज मंडी का साठ प्रतिशत अनाज वे ही खरीदते थे। मण्डी के पास ही उनकी दाल मिल भी थी। उनकी उम्र पचास वर्ष की हो गई थी। उनके दोनों बेटे नीरज और धीरज उनके साथ ही कारोबार में हिस्सा बँटाते थे। आज सतेन्द्र जी का जन्म दिवस था। जिसे पूरे नगरवासियों ने धूमधाम से मनाया था। आज उन्हें यह सुखद अहसास हुआ था कि वे नगरवासियों के कितने अधिक चहेते हैं। हर वर्ग के लोग उन्हें चाहते थे। इसका एक बडा कारण यह भी था कि नगर में कोई ऐसा घर बाकी नहीं था जिसके कभी मुनीम सेठ काम न आए हों।
मुनीम सेठ सतेन्द्र जी को किशनगंज में अपना कारोबार करते हुए पूरे बीस वर्ष हो गए थे। इन बीस वर्षों में वे शून्य से शिखर तक पहुँच गए थे। इसके पहले वे भोपाल के गल्ला व्यापारी मोहन दास गोयल के यहाँ मुनीम का काम करते थे। सतेन्द्र जी पास के गाँव दीवड़िया के रहने वाले थे। दीवड़िया के हायर सेकेन्ड्री स्कूल में उस समय नरेन्द्र सर भोपाल से पढ़ाने जाते थे। सतेन्द्र को उन्होंने हायर सेकेण्ड़ी तक पढ़ाया था। जब सतीश ने बी कॉम किया तब भी नरेन्द्र सर ने ही सतीश जी को ट्यूशन से पढ़ाया था बिना ट्यूशन फीस लिए क्योंकि सतेन्द्र के माता पिता निर्धन थे। सतेन्द्र ने जब बी कॉम किया तब उनकी उम्र बीस वर्ष की थी। उनके पिताजी गाँव में बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करते थे। परिवार की आय संतोषजनक नहीं थी। सतेन्द्र जी ने बी कॉम करने के बाद नरेन्द्र जी से कहा मुझे नौकरी की सख्त जरूरत है आप मेरी कहीं नौकरी लगवा दें तो आपकी अति कृपा होगी। तब नरेन्द्र सर एक शाम सतेन्द्र जी को सेठ मोहनदास गोयल के पास ले गए। नरेन्द्र सर ने उनके दोनों बेटों को पढ़ाया था इसलिए मोहन सेठ उन्हें बहुत मानते थे। उनके कहने पर सतेन्द्र जी को मोहनदास गोयल जी ने अपनी फर्म का मुनीम बना दिया था। सतेन्द्र जी ने अपना काम पूरी ईमानदारी और लगन से किया था। उन्होंने पूरे दस वर्ष तक गोयल सेठ के यहाँ काम किया था। अब गोयल सेठ का ऑफिस भी आधुनिक सुख सुविधाओं से लैस था। एक दिन मोहन सेठ ने सतेन्द्र जी से कहा आपको हमारे यहाँ काम करते हुए पूरे दस वर्ष हो गए हैं। आपने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया है। हमारा ये फर्ज बनता है कि हम आपका ख्याल रखें। किशनगंज में नई कृषि उपज मंडी खुली है। मेरे पास आपके बीस लाख रुपये जमा हैं। उसमें में बीस लाख अपनी ओर से मिला रहा हूँ। किशनगंज मंडी में मैंने आपका पंजीयन करा दिया है। मंडी में दुकान भी आपके नाम से ले ली है। कल से आप किशनगंज की दुकान के मालिक बनकर रहेंगे। आपको मेरी शुभकामनाएँ, हमेशा हम आप का साथ देंगे। सतेन्द्र जाना नहीं चाहते थे मगर गोयल सेठ ने कहा मत चूको आपका उज्जवल भविष्य आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। तब से अब तक बीस वर्ष हो गए थे। इन बीस वर्षों में सतेन्द्र जी ने चहुँमुखी विकास किया था। वो आज एक कामयाब इंसान के रूप में जाने जाते थे। आज अपने जन्मदिवस पर वे बहुत ख़ुश थे।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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