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कहानी: शादी

रघुवीर की उम्र अभी मात्र उन्चालीस साल की थी और वो अपनी बेटी निर्मला की शादी करने जा रसा था । शादी का निमंत्रण देने जब वह अपने बचपन के मित्र उमेश के यहाँ गया था उमेश को यह सुनकर बड़ी हैरानी हुई की रघुवीर,अपनी बेटी का विवाह कर रहा है। वो ससुर बनने वाला है और यह भी हो सकता है कि वो चालीस इकतालीस साल की आयु में नाना बन जाए। उमेश निमंत्रण पत्र लेने के साथ ही अपनी शादी का निमंत्रण देते हुए कहा कि अगले माह उसकी भी शादी है।यह सुनकर रघुवीर बहुत खुश हुआ तथा उसे बधाई दी।
रघुवीर की शादी उनके पिताजी ओमवीर ने जब कर दी तब रघुवीर की उम्र मात्र इक्कीस वर्ष की ही थी। उसका कारण यह था कि ओमवीर जी की आयु अस्सी वर्ष हो चुकी थी रघुवीर उनका इकलौता जीवित लड़का था। जब वे साठ वर्ष के थे तब उसका जन्म हुआ था जबकि रघुवीर की मम्मी सिया कुमारी की उम्र पैंतालीस साल थी। सिया रघुवीर जी की दूसरी पत्नी थी पहली पत्नी रमा का निथन हो गया था । उसके पाँच बच्चे हुए थे पर एक भी जीवित नहीं बचा था और छटवें बच्चे का जन्म देते समय रमा का निधन हो गया था । इसके बाद उन्होंने सियाकुमारी से शादी की थी। सिया कुमारी से भी उनके पाँच बच्चे हुए थे उनमें से जो जीवित बचा था वही रघुवीर था । रघुवीर के इक्कीस की उम्र होते ही ओमवीर ने शादी कर दी थी । इसके साल भर बाद उनके यहाँ पोती का जन्म हुआ था उसका मुँह देखने के बाद ओमवीर इस दुनिया को छोड़कर चले गए थे। सारा कारोबार उन्होंने रघुवीर को सौंप दिया था जिसे रघुवीर ने अच्छी तरह सँभाल लिया था । रघुवीर अपनी बेटी को खूब पढ़ा लिखाकर काबिल बनाना चाहते थे लेकिन वो जब हायर सेकेण्डी में थी तब उसने रघुवीर को यह कहकर चौंका दिया था कि वह बालिग हो चुकी है तथा जल्दी ही अपनी शादी करने जा रही है। रघुवीर नेअपनी बेटी की इच्छा के अनुरूप ही उसकी शादी तय कर दी थी।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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