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कहानी: संघर्ष

रोशनी ने अपने जीवन के पूरे पैंतालीस वर्ष संघर्ष करते हुए बिताए थे। उसकी उम्र पचास वर्ष की थी। पाँच वर्ष की उम्र से ही उसका जीवन संघर्ष करते हुए गुजरने लगा था। आज वे सुखी एवं समृद्ध जीवन जी रही थी। उसका बेटा विवेक आइ ए एस अफिसर था तथा दोनों बेटियाँ रीति व नीति डॉक्टर थीं। रोशनी अब काम नहीं करतीं थी। उसके तीनों बच्चे उसका बहुत ख्याल रखते थे।
रोशनी जब पाँच वर्ष की थी तब उसके माता पिता दोनों ही बस दुर्घटना में मारे गए थे। रोशनी को कभी नाना के यहाँ तो कभी दादाजी के यहाँ रहकर अपने दिन गुजारने पड़ रहे थे वो पाँचवीं तक पढ़ी थी। इसके बाद उसकी पढ़ाई छुड़ाकर उसे घर के कामों में लगा दिया था। जब वो अठारह साल की हुई तब उसकी शादी स्वरूप सिंह से कर दी गई। स्वरूप सिंह किसान तो था पर खेती ठीक से नहीं करता था। जिससे वो हमेशा कर्ज में डूबा रहता था। रोशनी ने खेती पर ध्यान देना शुरू किया तो स्वरूप सिंह ने खेती का काम पूरी तरह छोड़ दिया। स्वरूप सिंह को शराब पीने की लत लग चुकी थी। कमाता कुछ नहीं था रोशनी से पैसे छीन लेता था। पैसे नहीं देने पर रोशनी की बुरी तरह से पिटाई करता था। यह सब सहन करते हुए रोशनी को पूरे बारह वर्ष हो गए थे। इस बीच उसके तीन बच्चे हो गए थे। बड़े बैटे का नाम विवेक था तथा दोनों बेटियाँ रीती-नीति जुड़वा थीं। एक दिन की बात है उसके पति स्वरूप ने उसे बेरहमी से मारा तथा उसे और उसके बच्चों को घर से बाहर निकाल दिया। चारों लोग रात भर ठंड में बाहर ठिठुरते रहे पर उसे उनपर तरस नहीं आया। सुबह भी उसने किसी को घर में नहीं आने दिया। हारकर रोशनी अपने तीनों बच्चों को लेकर अपनी सहेली रेखा के घर आ गई। रेखा के पति कैलाश ने रोशनी के पति को अच्छे से समझाया पर उसे कुछ समझ में नहीं आया। वो घर में ताला लगा कर बिना उसकी तरफ देखे बाहर आ गया। रेखा ने कुछ दिन उसे अपने पास रखा फिर एक झुग्गी किराये से दिलवा दी तथा रोशनी की नौकरी कारखाने में लगवा दी। स्वरूप ने रोशनी के जाते ही घर, मकान, जमीन-जायदाद सब बेच दिए थे। और सारे रुपयों की शराब पी गया था। रोशनी को उसने तलाक दे दिया था। रोशनी के साथ ही कारखाने में शिवराम भी काम करता था। दोनों के बीच काफी निकटता हो गई थी। शिवराम ने बताया कि वो अपनी दोनों बेटियों के साथ अकेला ही रह रहा है। दो साल पहले उसकी पत्नी माधवी ने उसे छोड़कर ओम प्रकाश से शादी कर ली थी। दोनों बच्चियों को वो शिवराम के पास ही छोड़ गई थी। एक दिन शिवराम ने रोशनी से कहा क्या तुम मुझसे शादी करोगी। वो बोली मेरे बच्चों को अपनाओगे? मैं तुम्हारी दोनों बेटियों को अपनाऊँगी। अगर यह बात मंजूर है तो ठीक है शिवराम ने रोशनी की हर बात मान ली। दो साल तक उनके बीच सब ठीक चलता रहा लेकिन इसके बाद उनके बीच मनमुटाव हो गया। आए दिन उनके बीच झगड़ा होने लगा। शिवराम अकारण ही रोशनी के बच्चों को बेरहमी से मारने लगा था। खुद की दोनों बेटियों को वो खूब चाहता था, आज भी यही हुआ था। रोशनी से ये सहन नहीं हुआ तो उसने बीच में आकर पति की हर बात का जवाब देना शुरू कर दिया। नौबत मारपीट तक की आ गई थी। अब रोशनी ने कहा कि इन बच्चों के लिए तो मेंने अपने पहले पति को छोड़ा था। इस बार भी अगर तुझे छोड़ना पड़े तो छोड दूँगी। लेकिन अपने बच्चों के भविष्य को लेकर कोई समझौता नहीं करूँगी। रोशनी को शिवराम ने भी छोड़ दिया था। इसके बाद रोशनी के दिन कड़े संघर्ष के साथ गुजर रहे थे।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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