अपनी पत्नी सुधा को हरिशंकर बहुत चाहता था पर उसने उसके साथ बेवफ़ाई करते हुए तलाक ले लिया था। इस तलाक ने उसे तोड़कर रख दिया था लेकिन प्रमिला ने उसे संबल प्रदान किया। वो एक सफल व्यवसायी के साथ मार्केंपिंग एक्सपर्ट भी था। उसके हरि नमकीन ने सारे लोकल ब्राण्ड के नमकीन वालों का कारोबार ठप्प कर दिया था।
हरिशंकर ने सुधा से लव मैरिज की थी। उनकी पहचान तब हुई थी जब दोनों ही एम बी ए कर रहे थे। यह पहचान प्रेम में बदल गई दोनों ने मरते दम तक साथ में रहने की कसमें खाईं थी। एम बी ए करने के बाद सुधा और हरिशंकर ने लव मैरिज कर ली थी। दोनों की नौकरी शिवरतन मार्केटिंग कंपनी में लगी। हरिशंकर को मार्केटिंग मैनेजर बनाया गया था। उसको अपने काम के सिलसिले से टूर पर जाना पड़ता था जबकि सुधा को ऑफिस में ही रखा गया था। हरिशंकर की तनख्वाह सुधा से ज्यादा थी। शादी के साल भर तक तो वे बहुत अच्छे से रहे दोनों एक दूसरे के प्रेम में खोये रहते थे लेकिन दूसरा वर्ष लगते ही सुधा के व्यवहार में फर्क नजर आने लगा। अब वो हरिशंकर की उपेक्षा करने लगी थी कभी कभी उसका सबके सामने अपमान भी कर देती थी। हरिशंकर सब यह सोचकर सहन करता रहा कि कभी तो इसे अपनी भूल का अहसास होगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उसकी ज्यादतियाँ दिनों दिन बढ़ती जा रही थीं। तभी उसे पता चला कि सुधा कंपनी के मालिक सिद्धार्थ से अफेयर में है। एक दिन जब उसने सुधा से इस विषय में बात की तो उसने हरिशंकर को खूब खरी खोटी सुनाई। उसने सिद्धार्थ से अफेयर की बात पर इंकार कर दिया था जिस पर हरिशंकर ने विश्वास भी कर लिया। इसके कुछ दिनों बाद बिना किसी कारण के हरिशंकर को नौकरी से निकाल दिया गया था जिससे वो सदमे आ गया। जबकि उसका काम अच्छा था उसकी प्रोग्रेस सबसे अच्छी थी। पर उसे इसकी सजा ये मिली की उसे नौकरी से निकाल दिया गया। तब सुधा ने उससे कहा था कोई बात नहीं मैं हूँ न मैं तो नौकरी कर रही हूँ तुम्हें जल्दी ही दूसरी नौकरी मिल जाएगी इसका मुझे विश्वास है। मगर नौकरी छूटने के बाद हरिशंकर ने दूसरी नौकरी ढूँढने का कोई प्रयास नहीं किया इसने सुधा को विचलित कर दिया। उसने हरिशंकर से बेवफ़ाई कर सिद्धार्थ से प्रेम कर लिया था। और एक दिन उसने हरिशंकर से साफ-साफ कह दिया कि मैं तुम्हारे साथ रह नहीं सकती इसलिए क्यों न हम तलाक ले लें। हरिशंकर यह सुनकर बहुत दुखी हो गया पर सुधा को कोई प्रभाव नहीं पड़ा। सुधा ने हरिशंकर से तलाक ले ही लिया। सिद्धार्थ भी तलाक शुदा था तलाक के बाद सुधा ने सिद्धार्थ से शादी कर ली थी। प्रमिला उस समय पड़ोस के दोनों बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आती थी वो हरिशंकर जी से सहानुभूति रखती थी वो भी अकेली थी उसने ही हरिशंकर से बातों का सिलसिला शुरू किया। एक बार प्रमिला हरिशंकर के लिए टिफिन में खाना लेकर आई थी उस खाने में सेव मिक्चर भी था। हरिशंकर को उसका स्वाद बहुत अच्छा लगा। प्रमिला ने बताया उसके चाचा उमेश यह नमकीन तैयार करते हैं और रोज बेच देते हैं। हरिशंकर जी को हिन्ट मिल गई थी कि उन्हे॔ अब ये काम कैसे करना है। और वो दूसरे दिन से ही अपने काम में जुट गया। उसके मित्र सोहन ने उसे अपना छः हजार वर्ग फीट का मकान बारह हजार रूपये महीने के किराये में हरिशंकर को दे दिया। लोन के लिए बैंक को जमानत भी सोहन ने दी थी इससे हरिशंकर जी को बीस लाख का लोन मिल गया। उससे उसने गुजरात से मशीनें खरीदी थीं वो ऐसेम्बल कराई। उमेश को उसने कारखाने का इंचार्ज बना दिया था। मार्केटिंग का काम उसने सँभाल लिया था।उसका काम चल निकला जिसका योगदान प्रमिला का माना गया था। हरिशंकर ने प्रमिला से शादी का आग्रह किया जो प्रमिला ने स्वीकार कर लिया था। दोनों की मेहनत से उनकी कंपनी खूब अपना विकास कर रही थी। उधर सिद्धार्ध की कंपनी डूब गई थी। सुधा और वे किराये के छोटे मकान में रहकर मुश्किल से अपनी गुजर बसर कर रहे थे।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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