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कहानी: गेहूँ की फसल

पिछले साल की तरह हरिकिशन ने इस वर्ष भी अपनी साढ़े चार एकड़ जमीन में गेहूँ की फसल बोई थी कड़ाके की ठंड पड़ रही थी ऐसे में  उसे रात भर जहाँ खेत में सिंचाई करना पड़ रही थी वहीं  जंगली जानवरों से अपनी फसल भी बचानी पड़ रही थी  । रात को हरिकिशन खेत पर ही था सुब्ह जब घर आया तो ठंड के मारे बुरी तरह ठिठुर रहा था आधे दिन धूप में बैठने के बाद भी उसकी ठंड दूर नहीं हुई थी आज रात फिर,उसे खेत पर जाना था उसके पास खेती के अलावा और कोई कमाई का जरिया भी नहीं था।
आज दिन में जब वो धूप में बैठकर अपनी ठंड भगा रहा था । तब अपनी फसल  को लेकर कई  सुंदर सपने उसकी आँखों में पल,रहे थे । पिछले वर्ष उसके खेत से पैंसठ क्विंवटल गेहूँ का उत्पादन हुआ था जिसमें से उसने पचास क्विंटल गेंहू बेच दिए थे जिसके उसे एक लाख रुपये मिले थे पाँच महीने की लगातार मेहनत का ये नतीजा देछकर वो बहुत दुखी हुआ था उसके सारे सपने चूर चूर ह गए थे गत वर्ष उसकी दस बोरी यूरिया भी चोरी हो गया था जिससे उसे दस हज़ार की चपत लग गई थी उसकी भरपाई करने में उसे कई दिन लग गए थे।  पिछले साल उसने फसल आने पर एन्ड्राइड मोबाइल खरीदने का विचार किया था मगर  आखिरी में थोड़े बहुत भी पैसे नहीं बचे थे इसलिए वो मोबाइल नहीं खरीद सका था।  इस बार की फसल देखते हुए उसे  एक सौ बीस क्विंटल जेहूँ के उत्पादन की उम्मीद थी वो सोच रहा था कि अगर इतना उत्पादन होता है तो वो इस बार मोबाऐल भी खरीद लेगा तथा बिटिया को लेपटॉप भी दिला देगा।  लेकिन ऐसा होगा ये पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता  क्योंकि किसानों की फसल हमेशा अनुमान से कम ही होती है।  उत्पादन लागत दिनोंदिन बढ़ रही है पर उसके अनुरूप भाव नहीं बढ रहे हैं यह  दुख लाखों किसानों का है पर ।   करें भी क्या। फसल तैयार होकर आने  के बीच मौसम की मार और,अनेकों  समस्याएँ किसान  को पनपने  नहीं  दे रहीं थीं। हरिकिशन ने फिर भी सपने देछने बंद  नहीं किए थे।



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रनाकार
प्रदीप कश्यप

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