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कहानी: बेचारे माँ बाप

संतोष और मोहिनी वृद्धाश्रम में रहकर अपने दिन गुजार रहे थे। उनके इकलौते बेटे सुनील की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद उनका अपना कोई नहीं था। बहू सानिया ने दूसरी शादी कर ली थी। उनकी आमदनी का कोई जरिया नहीं था। ऐसे में उन्होंने वृद्धाश्रम में रहना ही उचित समझा था। यहाँ वे ठीक से रह रहे थे, हालाँकि बेटे की मौत का दुख वे अभी तक नहीं भूले थे। वे दोनों बेचारे होकर रह गए थे।
दस वर्ष पहले की बात है तब सुनील परिवहन विभाग में नौकरी करते थे। उनकी शादी सानिया से पाँच वर्ष पहले हुई थी मगर यह शादी सफल नहीं कही जा सकती थी। क्योंकि सुनील और सानिया के संबंध में पहले दिन से ही खटास आ गई थी। सानिया का सुनील के प्रति व्यवहार अच्छा नहीं था। वो अगर सात दिन ससुराल में रहती थी तो महीना भर मायके में गुजारती थी। वो सुनील के माता पिता को बर्दाश्त नहीं कर पाती थी। वो कहती अगर माँ बाप को छोड़कर अलग रहने का बंदोबस्त करो तो मैं तुम्हारे साथ रहूँगी नहीं तो सब कुछ ऐसे ही चलता रहेगा। मगर सुनील अपने माता पिता को छोड़ने को तैयार नहीं थे। सानिया अब सुनील से तलाक लेने की बात भी करने लगी थी। एक दिन सुनील जब अपनी ससुराल गए तो देखा कि सानिया एक युवक से काफी घुल-मिलकर बातें कर रही है। उसने सुनील को देखकर भी अनदेखा कर दिया था। यह बात जब सुनील ने अपने सास-ससुर से कही तो वो उल्टा सुनील को ही बुरा भला कहने लगे। सास बोली इस तरह बार-बार क्यों चले आते हो। जब सानिया तलाक माँग रही है तो उसे तलाक क्यों नहीं दे देते। सुनील को बाद में पता चला उस युवक का नाम परिमल था और वो सानिया का बॉयफ्रेन्ड था। उनके रिलेशन उनकी शादी से भी पहले के थे। जब सानिया से इस विषय में सुनील ने बात कही तो उसने खुलकर बताया कि हाँ परिमल आज भी मेरा बॉयफ्रेन्ड है। मैं उसी से शादी करना चाहती थी पर पिताजी के कहने पर तुमसे शादी कर ली। पिताजी ने कहा था कि बेटी मेरी लाज रख ले, तू हमारी पसंद के लड़के शादी कर ले इसके बाद भले ही तलाक दे देना। इसलिए मैंने तुमसे शादी की थी, मैं बार-बार तलाक की बात कह रही हूँ पर तुम ध्यान क्यों नहीं देते। लगता है अब टेडी ऊँगली से घी निकालना पड़ेगा, तलाक तो तुम्हें हर हाल में देना ही पड़ेगा। सानिया की बात सुनकर सुनील को ठंड के मौसम में भी पसीना आ गया था। सानिया और उसे अलग रहते हुए दो साल होने जा रहे थे। सानिया ने तय कर लिया था दो साल पूरे होते ही वो अदालत में तलाक की अर्जी लगा देगी। सुनील इसी बात को लेकर गहरे तनाव में था। उसकी मनोदशा ठीक नहीं थी। ऐसी हालत में ही उसकी मोटरसायकिल से कार की जबरदस्त भिड़ंत हुई थी। जिससे सुनील ने सड़क पर ही तड़प-तड़प कर अपनी जान दे दी थी। सानिया को जब ये खबर दी गई तो वो मन ही मन बहुत खुश थी। सोच रही थी चलो पीछा छूटा तलाक देने की नौबत ही नहीं आई। इसके पहले ही उसका परिमल से शादी का रास्ता साफ हो गया था। सुनील की मौत से सबसे ज्यादा दुखी उनके माता पिता थे। उनके तो बुढ़ापे का सहारा ही खत्म हो गया था। दुख की बात तो यह रही की सुनील की मौत के बाद बीमा, ग्रेच्युटी, जी पी एफ तथा अन्य सभी लाभ सानिया को मिले थे। सुनील के माता पिता को सरकार से एक रुपया भी नहीं मिला था। सानिया को तो पैंशन के साथ ही अनुकंपा नौकरी भी मिल गई थी। इसके बाद उसने अपने बॉयफ्रेण्ड परिमल से शादी कर ली थी और दोनों सुख से रह रहे थे। जबकि सुनील की मौत का सबसे बड़ा कारण तो सानिया ही थी। कायदे से तो सानिया को जेल में होना था मगर वो अपने उस पति के रुपयों पर मजे कर रही थी जिसकी मौत की वो खुद जिम्मेदार थी। उसने उन पैसों में से सुनील के माता पिता को फूटी कौड़ी तक नहीं दी थी। परिमल से शादी के बाद सानिया दो बच्चों की माँ बन गई थी। तथा वो सुनील की मौत को पूरी तरह भुला चुकी थी। सुनील के बूढ़े माता पिता ने जरूर आज सुनील की पुण्यतिथि पर आश्रम में श्रदाँजलि सभा का आयोजन किया था। तथा सुनील की याद में खूब आँसू बहाए थे।



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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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