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व्यंग्य: दूसरों पर दोष मढ़ने वाले लोग

ज्यादातर असफल लोग अपनी गलतियों का दोष दूसरों पर मढ़ते नजर आ जाएँगे ये किसी भी हाल में अपनी गलतियों को मानने को तैयार नहीं होते ख्यालों की दुनिया सजाकर कड़वी हकीकत भुलाने का प्रयास करते दिखाई देते हैं ऐसे लोग ।ऐसे लोगों की समाज में प्रतिष्ठा नहीं होती लोग भी इनके सामने झूठी सहानुभूति दिखाकर इनके भरम को बनाए रखते हैं। ऐसे ही एक इंसान हैं कामता प्रसाद जी एक सरकारी दफ्तर में बाबू हैं। सरकारी आवास में रहकर उन्होंने अपना पूरा जीवन गुजार दिया जब उनके सहकर्मी ओम प्रकाश ने आवासीत भूख॔ड खरीदा तो उसे उन्सोंने अव्वल दर्जे का मूर्ख साबित करने की कोशिश में कोई कमी नहीं की उनकी नजर में सरकारी आवास छोड़कर खुद के मकान में जाना मूर्खता थी। जब ओम प्रकाश जी ने उस पर लोन लेकर मकान बनवाया तब भी उन्होंने उसकी आलोचना की । मकान बनाकर ओम प्रकाश जी ने उसे किराये पर दे दिया तब भी कामता प्रसाद उनको मूर्ख कहते रहे जब कामता प्रसाद जी का तबादला दूसरी जगह हुआ और उन्हें सरकारी मकान छोड़ना पड़ा तब उन्हें घबराहट हुई हारकर किराये का मकान लेकर उन्होंने तीन साल गुजारे जब वापस आए तो सरकारी आवास नहीं मिला उधर देखा तो ओम प्रकाश जी बड़े आराम से अपने मकान में रह रहे हैं तब भी उन्होंने ओम प्रकाश जी की बुराई करना बंद नहीं की।
ये असफल लोग इसी आस में अपना कीमती समय गुजार देते हैं कि उनका भी अच्छा समय आएगा जो कभी नहीं आता और वो कुंठित होकर दुनिया को दोषी ठहराते रहते हैं। किसी की मेहनत ईभानदारी लगन परिश्रम धैर्य संयम की इनकी निगाह में कोई कीमत नहीं होती सफल व्यक्ति की सफलता पर मनगढ॔त झूठे किस्से गढ़कर लोगों को सुनाकर खुद को महान साबित करने का ये कोई मौका नहीं छोड़ते इनकी इस प्रवृति से किसी का कुछ नहीं बिगड़ता जो भी नुक्सान होता है वो उनका ही होता है पर वो अपना दोष मानने को तैयार ही नहीं होते।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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