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व्यंग्य: गरीबों का खून चूसकर गाल लाल करने वाले लोग

शहर का सबसे बड़ा सूदखोर श्याम लाल विधायक जी का खास आदमी था बताया छाता है कि विधायक जी का भी बहुत सा पैसा इस सूदखोरी के धंधे में लगा हुआ था जिसका माध्यम श्यामलाल था विधायक जी श्यामलाल का हर तरह से संरक्षण करते थे श्यामलाल की ब्याज दर इतनी ऊँची होती थी जो कर्जदार का खून तक चूस लेती थी सूदखोरी के खून चूसने वाले पैसे से वो गोल मटोल हो गया था उसके गाल गुलाब की तरह सुर्ख दिखते थे। एक बार जो उसके चंगुल में फँस जाता था वो पूरी तरह बर्बाद हो जाता था।ऐसे ही एक कर्जदार किशनलाल का दस लाख का ट्रेक्टर श्यामलाल ने पचास हजार रुपये में हड़पने के बाद पाँच लाख का कर्ज बाकी बताकर मकान गिरवी रखवा लिया और दो साल बाद वो भी हड़प लिया श्यामलाल ने वहाँ गोदाम बनाकर उसे किराये पर उठा दिया किशनलाल बेघर हो गया था। अब श्यामलाल किशनलाल की दो बीघा जमीन पर नजर आ गई वो उस जमीन को हड़पने की चाल चलने लगा । श्यामलाल ने उसके पहले ही वो जमीन बेचकर उसके पैसों से बेटी की शादी कर दी और वो शहर भी छोड़ दिया आजकल श्यामलाल भोपाल में किराये की झुग्गी में रहकर मजदूरी कर रहा था। जबकि श्यामलाल की डेयरी से बड़े साहब को पाँच लीटर गाय का शुद्ध दूध निशुल्क जाता था दिवाली पर श्यामलाल दस लाख रुपये के गिफ्ट बाँटता था चुनाव के समय विधायक जी को लाखों रुपये का चंदा देता था पर कोई गरीब जरूरतमंद दुखियारा उसके पास कर्ज लेने चला जाए तो बीस प्रतिशत मासिक ब्याज दर पर कर्ज देकर उसे पूरी तरह मिटाकर ही दम लेता था। जब वो पीडित को बीस हजार का कर्ज दे रहा था तब उसका महीने का चार हजार रुपया ब्याज लगा रहा था और ब्याज न देने पर अगले महीने उस ब्याज पर ब्याज लगाने का करार रहा था दूसरी ओर उसका एक आदमी रेस्ट हाउस में ठहरी एक बड़ी हस्ती को बीस हजार रुपये की शराब मुफ्त में देकर आया था। श्यामलाल के खिलाफ कोई पुलिस में रिपोर्ट लिखाने की हिम्मत नहीं करता था श्यामलाल दुखी गरीब जरंरत मंदों का शोषण कर फल फूल रहा था महीने में शहर के बडे लोगों की पार्टी में पाँच लाख रुपये खर्च करने में उसे जरा भी हिचक नहीं होती थी । पर किसी गरीब के दिए कर्ज का ब्याज बेरहमी से वसूल करता था। कई गरीब!लोग उसके कारण आत्म हत्या कर चुके थे पर श्यामलाल पर आज तक हल्की सी आँच तक नहीं आई थी। श्यामलाल की पार्टी में जो शाभिल होते थे उन्हें कुछ गरीब लोग वेम्पायर कहते थे। जबकि श्यामलाल उन वेम्पायरों की खुशाभद कर के उनके लिए गरीबों के खून का भी इंतजाम करता था ताकि वे उसे पीकर अपने गाल गुलाबी कर सकें।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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