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कहानी: साले का लड़का

रमेश शहर की एक बड़ी फेक्टरी में सुपर्वाइजर के पद पर कार्यरत थे। वे अपने साले के लड़के दिनेश की आदतों से परेशान थे। जब से वो उनके पास आया था तभी से वो किसी न किसी रूप में परेशान करता रहा था। आज उसे अवैध रूप से गाँजा बेचने के अपराध में सजा हो गई थी और वो जेल चला गया था। उसके जेल जाने का दोषी रमेश जी के साले ने उन्हें माना तथा उनके किए सारे अहसान भुलाकर उनसे खूब झगड़ा किया तथा सभी रिश्ते तोड़ लिए। जब रमेश जी ने साले को जो पाँच लाख रुपये कर्ज में दिए थे वे जब वापस माँगे तो उसने साफ इंकार कर दिया न मेरे पास पैसे हैं और न ही मैं तुम्हारा कर्ज अदा करने वाला हूँ, तुम से जो बने तो कर लो और कर्ज की रकम वापस लेने कभी मेरे घर मत आ जाना नहीं तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा।
रमेश जी ने अपने साले को पाँच साल पहले पाँच लाख रुपये कर्ज में दिए थे। यह पैसे उनकी खून पसीने की गाढ़ी कमाई के थे साल जब कर्ज लेने आया था तब खूब रोया गिड़गिड़ाया था। बोले बिटिया की शादी करना है और मेरे पास फूटी कौड़ी तक नहीं। इस साल फसल में भी नुक्सान हो गया है। रमेश जी पर उनकी पत्नी ने भी दबाव बनाया हारकर उन्होंने पाँच लाख रुपये का कर्ज साले को दे दिया। साले ने अपनी बेटी की शादी धूमधाम से कर दी। शादी में शामिल होने जब रमेश गाँव में साले के घर गए तो साले ने अपना लड़का दिनेश को उनके साथ भिजवा दिया। कहा इसकी नौकरी लगवा देना ये अपनी तनखा से आपका कर्ज चुकता करता रहेगा। रमेश दिनेश को अपने साथ ले आए थे। कुछ दिन उसे अपने घर में रखा तो वो काम करने को तैयार नहीं हुआ लेकिन उनकी जेब से रुपये चुराकर सट्टा जुआ में खर्च करने लगा। रमेश जी ने उसे अलग किराये से कमरा दिलवाया तथा अपने कारखाने की एन्सीलरी युनिट में उसकी नौकरी लगवा दी। कुछ महीनों तक तो वो ठीक ठाक नौकरी करता रहा फिर फेक्टरी से सामान चुराकर बेचने लगा। आखिर एक दिन पकड़ा गया। फेक्ट्री मालिक ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया। वो रमेश जी की मान प्रतिष्ठा धूल में मिला रहा था। पुलिस उस पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करने जा रही थी तभी उसने रमेश जी का नाम ले दिया। रमेश जी को थाना प्रभारी अच्छी तरह जानते थे। वे उनके गाँव के थे उन्होंने फोन कर उन्हें थाने पर बुलाया। दिनेश हवालात में बंद था। रमेश जी को देखकर गिड़गिड़ाने लगा मुझे बचा लो तभी फैक्ट्री का मालिक आ गया। बोला रमेश जी आप एक अच्छे इंसान हैं इसलिए मैंने आपकी बात मानकर इसे नौकरी दे दी थी। रमेश जी के कहने पर वो इस पर राजी हो गया कि इसने मेरे पिचहत्तर हजार रुपये का सामान चुराया है। ये मेरे रुपये वापस कर दे मैं केस वापस ले लूँगा। रमेश जी के कहने पर वो तीन महीने की मोहलत देने पर राजी हो गया। रमेश जी उसे थाने से छुड़ाकार रात के साढ़े ग्यारह बजे घर आए तब कहीं उन्हें खाना नसीब हुआ। दिनेश को कोई भी नौकरी पर रखने को तैयार नहीं हुआ। रमेश जी ने उसकी फल सब्जी की दुकान खुलवा दी थी। कुछ महीनों तक वो दुकान चलाता रहा फिर अपनी दुकान में गाँजा रखकर बेचने लगा। एक दिन पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस उसे थाना ले आई पुलिस को उसके पास चालीस किलो गाँजा बरामद हुआ था। पुलिस ने इस बार उसे रमेश जी के कहने पर नहीं छोड़ा था। उसका अपराध गैर जमानती था। पुलिस ने उसे जाँच के बाद जेल भिजवा दिया था। उसी का जुर्म सिद्ध होने पर दिनेश को सजा मिली थी। इस सजा ने रमेश के सारे रिश्ते साले से तुड़वा दिए थे।

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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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