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कहानी: काजल की कोठरी से बचकर

श्याम नगर के सरपंच राधेश्याम जी ने ईमानदारी की जो मिसाल कायम की थी उसके सभी कायल थे । सरकारी नौकरी छोड़कर सरपंच बने राधेश्याम जी के पास खुद की सायकिल तक नहीं थी वे अत्यंत सादगी पूर्ण जीवन जी रहे थे। यही कारण था कि उनका सभी ओर खूब मान सम्मान था । काजल की कोठरी में रहते हुए भी उन्होंने अपने आपको निष्कलंक रखा था।
छ़ साल पहले राधेश्याम जी श्यामनगर के सरकारी स्कूल में शिक्षक थे उनके बड़े भाई विरोधी राजनैतिक दल के नृता थे इसकी कीमत राधेश्याम जी को बड़ी भारी चुकानी पड़ी थी उनका तबादला दुर्मम स्थान पर बसे सेमल गाँव में कर दिया गया था वहाँ से उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें सस्पेण्ड कर दिया गया। चार महीने बाद आरोप झूठे साबित होने पर वे बहाल तो हो गए पर उनकी पदस्थापना ऐसी जगह कर दी गई जहाँ जरायम पेशा लोग रहते थे। राधेश्याम जी ने तय कर लिया कि अगर वे भ्रषट तंत्र से लड़ना चाहते हैं तो उन्हें नौकरी छोड़ना पड़ेगा। उनके पास श्याम नगर में तीस एकड़ उपजाऊ सिंचित जमीन थी वे नौकरी से इस्तीफा देकर श्यामनगर आ गए और अपनी खेतीबाड़ी को सम्हाल लिया नौकरी छोड़ने पर वे स्वतंत्र हो गए थे और खुलकर सामने आ गए थे। उनके जुझारूपन से उनकी लोकप्रियता बहुत बढ़ गई थी । वे सरपंच के चुनाव में खड़े हुए और प्रचार में बिना एक रुपये खर्च करके भी भारी बहुमतों से जीत गए सरपंच बनने के बाद सचिव ने उन्हें पैसे कमाने के हथकण्डे बताना शुरू किए तथा कहा कि अगर आप इन्हें अपनाएँगे तो साल भर में आप स्कार्पियों खरीद लेंगे। इस पर राधेश्याम जी ने कहा कि मैं भ्रष्टाचार से एक रुपया भी नहीं कमाऊँगा अगर तुम्हें यह पसंद नहीं तो यहाँ से अपना तबादला करा सकते हो मगर सचिव हरि प्रसाद ने ऐसा नहीं किया वो भी एक संपन्न परिवार से था उसे राधेश्याम जी की ईमानदारी अच्छी लगी । 
स्टॉप डेम के लिए पैंसठ लाख रुपये मंजूर होना थे सचिव हरिप्साद जी ने कहा कि इसमें से पन्द्रह लाख रुपये तो ऊपर वालों के भ्रष्टाचार में चले जाएँगे बाकी ठेकेदार बता रहा था कि वो तीस लाख रुपये में स्टॉफ डेम बना देगा बीस लाख रुपये आपके अगर आप सहमत हों तो । ठेकेदार ने यह भी बताया कि पचास लाख रुपये में अच्छा सटॉप डेम बन जाएगा गुणवत्ता की मैं पूरी गारंटी लेता हूँ आपकी ईमानदारी देखकर मैं भी कम से कम लाभ लूँगा सचिव ने बताया ऊपर रिश्वत खिलाए बिना काम नहीं चलेगा। राधेश्याम जी ने कहा जो बाकी पैसा मिलेगा उससे काम की गुणवत्ता पर तो असर नहीं पड़ेगा सचिव ने कहा नहीं पड़ेगा। राधेश्याम जी ने मजबूरी में इसे मान लिया स्टॉप डेम का बनना बहुत जरूरी था। उन्होंने जो सटॉप डेम बनवाया था उसकी गुणवत्ता की हर ओर चर्चा हो रही थी फिर उन्हें सड़क पुलिया बनाने के काम भी मिले वे भी उन्होंने ईमानदारी से किए पंचायत भवन उन्होंने बहुत अच्छा बनवाया उनका काम करने का तरीका इतना अच्छा था कि उनकी पंचायत जिले की सबसे अच्छी पंचायत के रुप में पुरूस्कृत की गई । अब उनकी ईमानदारी की ख्याति चारों तरफ फैल गई थी । अधिकारी अब उन्हें जो राशि देते थे उस पर उन्होंने भी अपना हिस्सा लेना बंद कर दिया था बाकी सब सरपंचों के पास स्कारपियों जैसी चार चार गाढ़ियाँ थी आलीशान मकान थे दूसरी ओर राधेश्याम जी ने एक सायकिल खरीदने लायक रुपया भी ऊनुचित तरीके से नहीं लिया था। उनके मन में किसी प्रकार का कोई मलाल नहीं था फिर से पंचायत के चुनाव आ गए थे इस बार गाँव वालों ने तय कर लिया था कि राधेश्याम जी के विरोध में कोई चुनाव में नहीं खड़ा होगा इस बार हम सब उन्हें निर्विरोध सरपंच बनाएँगे।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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