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कहानी: डीहाइड्रेशन

पत्नी रूपा की जिद के चलते साले के लड़के निखिल की शादी में बीमार होने के बाद भी शामिल होने के कारण वैभव की तबियत गंभीर रूप से ख़राब हो गई थी और उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था पत्नी भी शादी के कार्यक्रम में रमी हुई थी रात को दो बजे जब वो वैभव के कमरे में आई तब देखा की वो बेसुध पड़ा था । उसने सबसे मदद की गुहार की पर कोई तैयार नहीं हुआ जिसके लड़के की शादी थी वो उसका भाई था उसने बहन से कहा सुब्ह जब शादी संपन्न हो जाएगी तब अस्पताल ले जाएँगे तब तक रुकना पड़ेगा मगर रूपा समझ रही थी अगर सुब्ह तक रुकी तो वो अपने पति की जान से हाथ धो बैठेगी वो जैसे तैसे वैभव को अस्पताल ले गई डॉक्टरों ने वैभव की हालत को देखकर कहा कि अगर इनको कुछ देर और अस्पताल नही लाया जाता तो इनकी जान हम भी नहीं बचा पाते वैभव पूरे दस दिन अस्पताल में रहा उसके इलाज में पूरे पाँच लाख रुपये खर्च हो गए थे रूपा को अपने भाई के लड़के की शादी बड़ी भारी पड़ी थी भाई ने इस बीच उसकी कोई खोज खबर नही ली थी ना ही देखने आए थे।
शादी के दो दिन पूर्व से ही वैभव की तबियत कुछ बिगड़ने लगी थी वो हार्ट पेशेन्ट के साथ शुगर का भी मरीज था सुब्ह से उसे दस्त लग रहे थे और पेट में दर्द हो रहा था उसने रूपा से कहा भी कि मेरी हालत ठीक नहीं है मुझे अस्पताल ले चलो लेकिन पत्नी बोली एक दिन में कुछ नहीं होगा शादी के तुरंत बाद अस्पताल ले चलेंगे शादी में जाना बहुत जरूरी है नहीं तो भैया भाभी बुरा मान जाएँगे उन्होंने शादी में शामिल न होने पर रिश्ता तोड़ने की बात कही है विवश होकर वैभव शादी में शामिल होने आ गया वैशाख की तेज गर्मी ने उसका बुरा हाल कर दिया था रूपा आते ही शादी के कार्यक्रमों में व्यस्त हो गई थी उसके दस्त बंद नहीं हुए थे उसे ओ आर एस देने वाला कोई नहीं था सुब्ह से दस बार उसे दस्त हो चुके थे आखिर में वो बेहाल होकर जो बिस्तर पर पड़ा तो उसे फिर अस्पताल में ही होश आया रूपा बता रही थी वो मौत के एकदम नजदीक से होकर आया है पत्नी कह रही थी इलाज में पाँच लाख रुपये खर्च हो गए थे वैभव ने दस लाख रुपये प्लॉट खरीदने के लिए जी पी एफ से निकाले थे । जिसमें से पाँच लाख रुपये उसके इलाज मे खर्च हो गए थे और उसका प्लॉट खरीदने का सपना टूट गया था यह शादी उसे बहुत भारी पड़ी थी इलाज में देरी उसके लिए प्राणघातक साबित हुई थी जिनके बुरा न मानने के डर से वो अपनी जान पर खेला था उन्हें इस का कोई फर्क नहीं पड़ा था वो उसको देखने तक नही आए थे।


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प्रदीप कश्यप

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