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कहानी: दूसरी पत्नी

गाँव की सीधी सरल स्वभाव की पत्नी शीला को छोड़कर सुधीर ने शहर की चंचल चपल लकड़ी रिया से शादी की थी जिसने उसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया था रिया उसे छोड़कर अपने प्रेमी के साथ रह रही थी उसने चालीस लाख रुपये सुधीर से कोर्ट में केस दायर कर झूठे आरोप लगाकर वसूल कर ,विए थे तथा हर महीने बीस हज़ार रुपये का गुजारा मत्ता ले र रही थी वो सुधीर को दो बार गुंडों से बुरी तरह पिटवा भी चुकी थी तथा धमकियाँ देती रहती थी की तेरी सरकारी नौकरी खा जाऊँगी एक दिन देखना तेरे हाथ पैर तुड़वाकर तुझे दर दर भिखारी बनाकर ही दम लंगी सुधीर गहरे तनाव में जिंदगी जी रहा था दूसरी ओर शीला महिला बाल विकास विभाग में सुपर वायजर बन गई थी उसकी शादी बहुत अच्छे लड़केसोमेश से हुई थी और सुखपूर्वक रह रही थी उसका दो साल का बेटा अंकुर था सुधीर के पास सिवाय पछतावा और दुख कू कुछ नहीं बचा था।
सुधीर गाँव का रहने वाला था उसने बी एस सी कृषि में की थी तथा कृषि विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत था उसकी शादी शीला से उसके पिता के जोर देने पर हुई थी शीला आठवीं तक पढ़ी थी वो देखने में सुंदर सुशील थी सरल,स्वभाव की थी तथा पति का बहुत खूयाल रखती थी पर सुधीर को वो बिल्कुल पसंद नहीं थी वो शीला से ठीक से बात तक नहीं करता था न उसे कहीं अपने साथ ले जाता था उसका अपमान करता था फिर भी शीला उसे बहुत चाहती थी तथा उसका बड़ा खयाल रखती थी । सुधीर को शहर की चंचल चपल लड़की चाहिए थी। एक बार वो शीला को मायके छोड़ने गया तो फिर कभी लेने नहीं नहीं आया , शीला ने पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया अभी उसकी उम्र उन्नीस साल की थी उसने दसवीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर ली इक्कीस साल की उम्र में हायर सेकेण्डरी और चौबीस साल की उम्र में ग्रेज्यूएशन कर लिया था तथा पच्चीस साल की उम्र में वह सरकारी महिला बाल विकास विभाग में सुपर वायजर बन गई थी इसका पता सुधीर को नहीं था क्योंकि सुधीर उससे बहुत पहले ही तलाक ले चुका था उससे तलाक लेने के बाद सुधीर ने अपने मन की मर्जी से चंचल चपल शहर की लड़की रिया से शादी कर ली थी जो उसके जीवन की सबसे बडी भूल साबित हुई शादी के पहले जो आदत उसकी अच्छी लगती थीं वे बुरी लगने लगी थीं उसकी जुआ खेलने की लत थी वो ड्रिंक करती थी उसके बहुत सारे पुरुष मित्र,थे जिन्हें वो अपने घर पर बुलाती थी तथा उनके साथ पार्टी करती थी सुधीर के सारे पैसे उड़ा देती थी इसके बाद भी वो अपने दोस्तों के साभने सुधीर का अपमान करती थी उसे जलील करने में रिया को मजा आता था । दूसरी ओर जब शीला की नौकरी लग गई तो वो एक मीटिंग में शामिल होने विकास ख॔ड कार्यालय गई वहाँ उसकी पहचान विकास खण्ड अधिकारी सोमेश से हुई धीरे धीरे उनमें निकटता बढ़ती चली गई और एक दिन सोमेश से उससे विवाह का प्रस्ताव रख दिया तब शीला ने अपनी आप बीती उसे बताई सुनकर सोमेश ने कहा मैं ऐसा नहीं हूँ मुझे तुम पसंद हो और मै तुम्हें हमेशा खुश रखूँगा इस तरह उनकी शादी हो गई थी इस शादी से दोनों खुश थे। जबकी सुधीर रिया के साथ नारकीय जिंदगी जी रहा था आखिर रिया ने उसे इतना मजबूर कर दिया कि सुधीर को उसे छोड़ना पड़ा रिया ने उस पर कई झूठे आरोप लगाकर केस लगा दिया था सुधीर को पूरी तरह बर्बाद कर देने के बाद भी रिया को तसल्ली नहीं मिली थी।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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