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कहानी: नौकरानी

आदिवासी अंचल में पैंतालीस साल पहले पदस्थ डॉक्टर विनोद गौतम की उस वक्त नौकरानी रही आदिवासी महिला शरबती आज संकुल प्राचार्य के पद से सेवानिवृत हुईं थी इस अवसर पर आयोजित समारोह में डॉ साहब भी शामिल हुए थे उन्होंने भी शरबत जी की बहुत प्रशंसा की थी शरबती जी ने अपनी सफलता का सारा श्रेय डॉक्टर साहब को दिया था।
डॉक्टर विनोद गौतम की पैंतालीस साल पहले एम बी बी एस से पास आऊट होने के बाद पहली पदस्थापना आदिवासी अंचल के ग्राम गादिया के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में हुई थी वे अपनी माँ शारदा को साथ लेकर नौकरी ज्वाइन करने आए थे वे उस समय युवा थे। वहीं पर आदिवासी मजदूर पीरू भी रहता था उसकी लड़की शरबती पन्द्रह साल की किशोरी थी वो डॉक्टर सा की मम्मी से काफी घुल मिल गई थी । उसने गाँव के स्कूल से पाँचवी की परीक्षा पास कर ली थी आगे इसलिए नहीं पढ़ पाई थी कि गाँव में मिडिल स्कूल था हीं नहीं डा साहब उस गाँव में पाँच साल रहे इस बीच उनकी शादी डॉक्टर नीरा से हो गई वह भी डॉक्टर थीं। शरबती बालिग होने के बाद उनके यहाँ नौकरानी का काम करने लगी थी पर डॉ साहब उसे अपने परिवार का सदस्य ही मानते थे। जब उनका वहाँ से ट्रान्सफर हुआ तब शरबती भी उनके साथ भोपाल में आ गई थी। यहाँ आकर डॉ नीरा ने शरबती से कहा कि वे अपनी पढ़ाई जारी रखे । शरबती की भी शादी भूरेलाल से हो गई थी भूरेलाल पोस्ट ऑफिस में क्लर्क था फिर भी शरबती डॉ साब के यहाँ नौकरानी का काम कर रही थी उस समय ग्यारहवीं तक हायर सेकेण्डरी थी डॉ क्टर नीरा ने शरबती से कहा कि वो एफिडेबिट लगा कर होम साइंस से हायर सेकेण्डरी परीक्षा का स्वाध्यायी छात्र के रूप में परीक्षा फार्म भर दे फिर उन्होंने ही आगे रहकर सारा काम कराया उसकी कोचिंग की व्यवस्था भी उन्होंने की शरबती ने पहले प्रयास में ही हायर सेकेण्डरी की परीक्षा पास कर ली थी इसके साथ ही उसका चयन शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षक के पद पर हो गया था शिक्षक बनने के बाद भी शरबती ने अपनी पढ़ाई जारी रखी थी बी ए पास करने के बाद शरबती जी का प्रमोशन युडीटी के पद पर हो गया था । फिर शरबती जी ने दो साल बाद हिन्दी में एम ए किया और उसके दूसरे साल उनका प्रमोशन व्याख्याता के पद पर हो गया । शरबती अब मेडम बन गईं थीं वे अब डॉक्टर साहब की नौकरानी नहीं थीं। अब वे हिन्दी की व्याख्याता थीं तीन साल बाद वे हायर सेकेण्डरी स्कूल की प्रिन्सीपल बन गई थीं। साथ ही संकुल प्राचार्य भी इस पद पर रहकर उन्होंने अपनी कार्यकुशलता से खूब ख्याति अर्जित की थी इसी पद से आज वे सेवानिवृत् हो रहीं थीं उनके पति दो साल पहले रिटायर हो गए थे। शरबती जी अपने जीवन से संतुष्ट दिखाई दे रहीं थीं वे सोच रही थीं की अगर डॉ साहब मदद नहीं करते तो आज वे भी गादिया में कहीं मजदूरी कर रही होतीं और उनका पति भी कोई खेतिहर मज़दूर होता।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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