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कहानी: दूसरा अवसर

बैंग्लोर की अच्छी नौकरी का ऑफर ठुकराने के बाद नवनीत को पाँच साल पहले गृह नगर भोपाल में उसी कंपनी में नौकरी करने का दूसरा अवसर मिला था जिसका लाभ लेने में उसने देरी नहीं की थी । आज नवनीत कंपनी की भोपाल शाखा का मुख्य प्रबंधक था तथा उसकी पत्नी वैशालो सेक्रेटरी के पद पर,कार्यरत थी नवनीत का वेतन ढाई लाख रुपये प्रतिमाह था तथा वैशाली को डेढ़ लाख रुपये भिल रहे थे नवनीत अपने माता पिता एवं अपने बच्चों के साथ सुखपूर्वक रह रहा था।।
पाँच साल पहले नवनीत भुवन और,भास्कर ने बी टेक के बाद मुंबई से एम बी ए किया था तब तीनों को बैंग्लौर की एक कंपनी ने प्लेसमेन्ट में नौकरी का ऑफर,दिया था उनका वेतन अस्सी हजार रुपये था नवनीत को एक लाख रुपये वेतन का ऑफर था लेकिन नवनीत की माँ की तबियत,बहुत खराब थी इसलिए उसने नौकरी का ऑफर ठुकरा दिया था कंपनी के सी ई ओ ने उसे बहुत समझाया दो साल बाद उसका वेतन डेढ़ गुना करने की बात कही थी पर नवनीत ने अपने केरियर,से ज्यादा माता पिता की सेवा को अधिक महत्व दिया था नवनीत के ऑफर को ठुकरा देने पर भुवन ने अपने साले नीलेश को वो नौकरी दिलवा दी थी। नवनीत ने भोपाल,आकर माँ के इलाज तथा उनकी परिचर्या में पूरा समय लगा दिया था उसके दोस्त उसे मूर्ख ठहरा रहे थे उनका कहना था भोपाल में तुझे पन्द्रह हजार रुपये महोने से अधिक वेतन की नौकरी नहीं मिलेगी ऐसे अवसर को ठुकराकर तूने अच्छा नहीं किया जिंदगी में अच्छे अवसर दोबारा नहीं मिलते ।पर नवनीत को इसका कोई मलाल नहीं था नवनीत के बड़े भाई अभिजीत मुंबई में नौकरी कर रहे थे माँ की बीमारी की खबर उन्हें भी दी गई थी लेकिन उन्होंने फोन काट दिया था फिर उन्होंने माँ की न कोई कभी खबर,ली न ही माँ को देखने आए। नवनीत ने पूरे डेढ़ महीने तक इलाज के दौरान माँ की देखभाल की थी जिससे माँ बीमारी से उबर कर अब स्वास्थ्य लाभ ले रही थीं। नवनीत की दोस्ती अशोक बिल्डर के लड़के सुशील से थी एक दिन सुशील ने उससे कहा कि शाम को न्यू मार्केट आ जाना वहाँ से ताज होटल चलेंगे वहाँ मेरे बर्थ डे पर डिनर रखा गया है नवनीत न्यू मार्केट आ गया था वहाँ सुशील ने और उसने कुछ खरीदार की फिर ताज होटल में आ गए। संयोग की बात यह रही कि ताज होटल में उसे उसी कंपनी के सी ई ओ बसंत राव जी मिल गए वे देखते ही नवनीत को पहचान गए बोले यहाँ आने के बाद में तुमसे मिलना चाहता था पर मेरे पास तुम्हारा नंबर,नहीं था तुम्हारे दोस्तों ने भी तुम्हारा नंबर नहीं दिया था ना ही तुम्हारा पता बताया था । हम कंपनी की भोपाल में ब्रांच खोल रहे हैं एम पी नगर में उसका ऑफिस रहेगा कल उस ऑफिस में स्टॉफ के लिए इंटर व्यू है अगर चाहो तो इंटर व्यू में शामिल, हो जाना । नवनीत को तो मानो मुँह माँगी मुराद मिल गई थी। दूसरे दिन वो ऑफिस आ गया था । बसंत राव ने नवनीत को भोपाल शाखा का मुक्य प्रबंधक बनाया था उसका वेतन तो डेढ लाख रुपया था पर उन्य सुविधाएँ एवं भत्ते ज्यादा थे। नवनीत को अपने गृह नगर इतना अच्छा पैकेज मिला था यह उसके लिए बड़ी खुशी की बात थी नौकरी लगने के साथ ही कुछ दिनों बाद उसकी नेहरूनगर में वैशाली से शादी तय हो गई वैशानी ने कंपनी सेक्रेटरी का कोर्स किया था शादी के अवसर पर बसंतराव आए थे वे वैशाली को उपहार में कंपनी की भोपाल शाखा में सेक्रेटरी की नौकरी दे गए थे यह उनके लिए दोहरी खुशी थी तभी से दोनों जी जान से कंपनी के लिए काम कर रहे थे उन्होंने अच्छा रिस्पांस दिया था जिससे खुश होकर बसंत राव जी ने उनकी तनख्वाह बढा दी थी। दूसरा अवसर उनके लिए अत्यंत शुभ सिद्ध हुआ था।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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