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कहानी: बेईमानी की पराकाष्ठा

तीन साल पहले अपने सगे बड़े भाई विनीत की बेईमानी के शिकार होने के कारण अपना मकान गँवा बैठे सुधीर कुमार पूरे तीन साल बाद आज अपने नवनिर्मित मकान में गृह प्रवेश कर रहे थे। आज वो खुश थे पर उनके मन में अपने बड़े भाई द्वारा की गई बेईमानी का अब भी मलाल था।
सुधीर कुमार एक बड़ी कंपनी के मुंबई में सेल्स मैनेजर थे। उनकी पत्नी लता बहुराष्ट्रीय कंपनी में मैनेजर थी। उन्होंने भोपाल में पाँच साल पहले चार करोड़ रुपये में छः हज़ार वर्गफीट का आवासीय भूखंड खरीदा था। जिस पर वो दो हज़ार वर्गफीट में मकान बनवाना चाहते थे तथा चार हजार वर्गफीट का एरिया खुले छोड़ने का विचार थे। इसके लिए उन्होंने इंजीनियर से नक्शा भी बनवा लिया था लेकिन समस्या यह थी की मकान बनवाएगा कौन। इसका लाभ उठाया उनके बड़े भाई विनीत ने जो कोई काम धंधा करता नहीं था छोटी मोटी नेतागिरी कर लेता था सौ पचास रुपये की भी उसकी हैसियत नहीं थी। उसकी पत्नी एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी करती थी। उसकी आय से ही उनका खर्च चल रहा था। विनीत को जब पता चला कि उसका छोटा भाई मकान बनवा रहा है तो वो फौरन अपने भाई सुधीर के घर पहुँच गया और बोला कि भैया मैं हूँ न मैं पूरा मकान बनवा कर ही दम लूँगा। फिर उसने अपनी चिकनी चिपुड़ी बातों से सुधीर का मकान बनाने का ठेका ले लिया। सुधीर व्यस्तता के कारण मकान बनता हुए देखने नहीं आया था। पूरे काम विनीत करा रहा था। उसने पूरे पैंसठ लाख रुपये उस मकान को बनवाने में खर्च कर दिए थे। यह रुपये विनीत ने खर्च कराए थे। मकान बन गया था और सुधीर जी उसे एक बार भी देखने नहीं आए थे। जैसे तैसे छुट्टी लेकर वे भोपाल आए और सीधे मकान देखने चले गए। उस मकान को देखकर सुधीर जी निराश हो गए थे। मकान बनवाने में उनके बड़े भाई ने उन्हें जबरदस्त झटका दिया था। उनका मन नहीं माना तो वे इंजीनियर को मकान दिखाने लाए। इंजीनियर वो मकान देखकर कहा कि इस मकान में इतना कम मटेरियल लगाया गया है इसके कारण ये पहली बरसात में धराशायी हो जाएगा। और वही हुआ जिसका उन्हें डर था। वो मकान पहली बारिश में ही गिर गया था। विनीत ने उनको साठ लाख रुपये का नुक्सान पहुँचाया था। उसकी बेईमानी के कारण ऐसा हुआ था। उन पैसों से उसने पार्षद के पद चुनाव लड़ा था और पूरा रुपया उसमें खर्च कर दिया था। सुधीर ने अपने भाई से बहस नहीं की। सबसे अच्छे कान्ट्रेक्टर एवं इंजनीयर से कहकर मकान बनवाया था जिसमें आज उन्होंने गृह प्रवेश किया था।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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