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कहानी: अपनापन

राकेश कभी मोती नाम के जिस देशी कुत्ते से सबसे अधिक नफरत करता आज उसी कुत्ते से उसका अपनापन था उसे वो अपना सबसे सगा मानता था मोती भी राकेश को बहुत चाहता था मोती से राकेश का ये लगाव जग जाहिर था।जबकि एक समय वो भी था जब राकेश को देशी कुत्तों से बहुत नफ़रत थी वो पहले कभी किसी कुत्ते को रोटी का एक टुकड़ा भी नहीं डालता था जबकि अब उसकी दशा ये थी कि जब तक वो मोती को खाना नहीं खिला देता था तब तक खुद भी खाना नहीं खाता था ।
बात दो वर्ष पुरानी है जब मोती तीन साल का था । राकेश की पत्नी मोती से लगाव रखती थी वो राकेश के घर के सामने बैठा रहता था तब राकेश को कुत्तों से बहुत चिढ़ थी। मोती को घर के पास बैठा देखकर उसका गुस्सा काबू से बाहर हो जाता था वो मोती को कभी डंडे से तो कभी पत्थर से मारकर भगा दिया करता था एक बार ठंड के मौसम में उसने मोती पर ठंडा पानी डाल दिया था जिससे मोती बहुत देर तक दुखी स्वर में भौंकता रहा था तथा ठंड से थरथर काँपता रहा था । तब राकेश की पत्नी मधु ने उससे कहा था उस बेचारे का कसूर क्या था जो आपने उसके साथ ऐसा किया ये ती क्रूरता की हद है तब राकेश कुटिलता के साथ बोला था । मैंने ठीक किया ये यहाँ आता ही क्यों है । मैं नहीं चाहता की ये यहाँ आए । पर मोती राकेश के घर से जाने के बाद उसके घर के सामने बैठा रहता था । और राकेश के आने पर उसके तनाव को और बढ़ा देता था एक दिन राकेश ने विचार किया कि मोती के हाथ पैर बाँधकर उसे कुए में पटक दिया जाए तो इसका काम तमाम हो जाएगा और उसे भी तनाव से मुक्ति मिल जाएगी मगर मोती ने उसे ऐसा अवसर ही नहीं दिया मोती को पकड़कर उसके पाँव बाँधकर उसे कुएँ में फेंकने की इच्छा कभी पूरी न हो सकी। कुआँ राकेश के घर के पास ही था एक बार राकेश कुएँ में झाँक कर देख रहा था उस समय वहाँ आस पास कोई नहीं था अचानक राकेश को जोर की छींक आई और उसका संतुलन गड़बड़ा गया वो कुएँ में गिर गया राकेश को तैरना नहीं आता था अचानक मोती जाने कहाँ से वहाँ आ गया उसने राकेश को कुएँ में गिरते हुए देख लिया था कुए की घिर्री के एँगल से एक रस्सी बँधी हुई थी जिससे बाल्टी बाँधकर लोग कुएँ से पानी खींचते थे मोती ने बिना एक पल की देरी किए वो रस्सी कुएँ में फेंक दी उसका सिरा एँगल से बँधा हुआ था। डूबते डूबते वो रस्सी राकेश के हाथ में आ गई और वो कुछ देर के लिए डूबने से बच गया ठंड का मौसम था । ठंड से कुएँ के ठंडे पानी में वो थर थर काँप रहा था । कुछ दिनों पहले ही उसने मोती पर ठंडा पानी डाला था और आज वो कुएँ के पानी में भीग रहा था उसे अपनी मौत निश्चित दिखाई दे रही थी वो रस्सी को थामे हुए कब तक बचा रहता रस्सी उसके हाथ से फिसल रही थी दूसरी तरफ मोती मद्द के लिए किसी को ढंढ रहा था मोती ने एक व्यक्ति को आते देखा तो उसके पास पहुँचा तथा उसको कौएँ की तरफ ले गया वो व्यक्ति मोती को जानता था कुएँ के पास जाकर मोती कुएँ की तरफ देखकर भौंकने लगा उस व्यक्ति ने जब कुएँ में झाँक कर देखा तो उसे राकेश जीवन मृत्यू से संघर्ष करते दिखा । उसने तुरंत और लोगों को बुला लिया सबने मिलकर किसी तरह राकेश को कुएँ से बाहर निकाला राकेश को इस घटना से गहरा सदमा लगा था सभी कह रहे थे मोती ने आपकी जान बचाई है अगर ये नहीं होता तो आप इस दुनिया में जिन्दा नहीं रहते राकेश को ठीक होने में कुछ दिन लग गए राकेश को मोती के साथ किए गए अपने बर्ताव पर बहुत पछतावा हो रहा था ठीक होने के बाद राकेश मोती से लिपटकर बहुत देर तक रोता रहा उसकी पत्नी मधु ये देख रही थी राकेश बार बार मोती से अपने किए की क्षमा माँग रहा था और मोती उससे प्रेम जता रहा था । इसके बाद से मोती राकेश का सबसे चहेता बन गया था मोती को राकेश अपना सब से सगा समझता था अब राकेश ने किसी भी देशी कुत्ते से नफ़रत करना छोड़ दी थी।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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