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कहानी: हालात

दस साल पहले अनोखीलाल व्यवसाय में घाटा होने पर सब कुछ गँवाकर अपने गाँव शीलखेड़ा में मज़दूरी करके अपना जीवन यापन कर रहा था। आज उसके बेटे नवनीत ने सफलतापूर्वक व्यवसाय करते हुए शहर में पाँच करोड़ रुपये का मकान खरीदा था तथा अपने पिताजी एवं माँ तथा भाई बहनों को शहर में अपने साथ रहने के लिए ले आया था। वैसे भी अनोखीलाल जी की उम्र पैँसठ साल तथा उनकी पत्नी की उम्र तिरेसठ साल हो गई थी। अब उनसे मेहनत मजदूरी का काम नहीं बनता था।
अनोखीलाल जी की उम्र जब पच्चीस साल की थी तब वे अपने गाँव शीलखेड़ा से अपनी चार एकड़ जमीन बेचकर शहर आ गए थे। यहाँ आकर उन्होंने गल्लामंडी में अनाज की खरीद फरोख्त का व्यापार शुरू किया था। इसके पहले वे गाँव में खेती करते थे। जिसमें उन्हें अक्सर नुक्सान उठाना पड़ता था। इसी से तंग आकर उन्होंने अपनी जमीन बेचकर व्यवसाय शुरू किया था। पाँच साल तक तो उनका कारोबार ठीक चलता रहा फिर उन्होंने एक व्यापारी राकेश को अपना पार्टनर बना लिया। छः महीने तक उन्हें अच्छा लाभ हुआ फिर अनोखीलाल जी को टाईफाइड हो गया और वे दो महीने तक कारोबार नहीं देख सके। दो महीने बाद जब वे अपनी दुकिन पर पहुँचे तो देखा कि राकेश अपनी अलग दुकान खोलकर बैठा हुआ है उनकी दुकान में ताला लगा हुआ था। उसने अनोखीलाल जी को बताया कि दुर्घटना में उनका गेहूँ से भरा ट्रक उलटकर सड़क किनारे की एक खाई में गिर गया था। रात में उसमें भरा गेहूँ चोर चुराकर ले गये उससे पाँच लाख रुपये का नुक्सान हुआ। फिर मूँगफली के भाव गिर गए उसने रही सही कसर पूरी कर दी। दुकान की पूँजी खत्म हो चुकी थी। मैंने अपने हिस्से की पूँजी से अपनी अलग दुकान खोल ली। अनोखीलाल जी ने अपना मकान बेचकारी सारी देनदारी अदा की और कंगाल होकर गाँव में आ गए थे जहाँ वे मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे थे।
उनका बड़ा लड़का नवनीत ग्यारहवीं पास हुआ था। उसका एडमीशन उन्होंने शीलखेड़ा से पाँच किलोमीटर दूर रतनपुर के हायर सेकण्डरी स्कूल में करा दिया था। वहाँ से बारहवीं पास करने के बाद नवनीत राजनीति में आ गया तथा लालजीराम के चुनाव प्रचार में जुट गया। वे विधायक का चुनाव लड़ रहे थे। जीतने के बाद वो लालजीराम के साथ राजधानी में आ गया। लालजीराम केबिनेट मंत्री बनाए गए थे। नवनीत उनका खास कार्यकर्ता था। उस पर उन्हें पूरा विश्वास था। उनका सारा हिसाब किताब वो ही रखता था। वो अपना काम ईमानदारी से करता था। इससे लालजीराम उससे खुश रहते थे। लालजी राम ने उसे सरकारी दफ्तरों में सामान की आपूर्ति करने के लिए सप्लायर बना दिया था। उससे नवनीत को अपार लाभ हुआ। फिर उसे लालजीराम ने कुकिंग गैस की एजेन्सी दिलवा दी। लालजीराम के साथ रहकर दो साल में नवनीत ने करोडों रुपये कमा लिए थे। उसी से उसने यह भव्य बंग्ला खरीदा था। उस बंग्ले में आकर अनोखीलाल जी बहुत खुश थे 


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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