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कहानी: ननद

रजनी और राजेश बहादुर गढ़ में दो साल से अलग रह रहे थे इस से पहले रजनी सास ससुर तथा ननद के साथ अपनी ससुराल में रहती थी । ननद के कारण उन्हें अलग होना पडा था। उसकी ननद सुषमा उसे तंग करती थी । अगर वे ऐसा नहीं करते तो उन दोनों को एक दूसरे को छोड़ना पड़ता जो उन्हें किसी हाल में भी मंजूर नहीं था। रजनी और राजेश एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थे उनकी छः माह की बच्ची भी थी जिसका नाम प्रिया था। 
बात तब की है जब राजेश और और रजनी सेमरा गाँव में संयुक्त परिवार में रहते थे उसी गाँव में एक निजी स्कूल था उसमें राजेश टीचर था राजेश ने बी ए बी एड किया था वहाँ उसे मात्र तीन हज़ार रुपये तनखा मिलती थी रजनी हायर सेकेण्डरी पास थी और पत्राचार से डी एड कर रही थी रजनी को सबसे ज्यादा तंग उसकी ननद सुषमा करती थी सुषमा की ससुराल सेमरा में ही थी उसका घर थोडी ही दूर था सुषमा को रजनी से चिड़ थी वो दिन में आकर रजनी की बुराई अपनी माँ से करती थी । रजनी की सास फिर रजनी पर ताने कसती थी ठीक व्यवहार नहीं करती थी एक दिन की बात हैराजेश स्कूल में था तब दोनों सास ननद ने रजनी पर ताने कसे तथा झगड़े के लिए उकसाया जब उसकी सास रजनी के पिता के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने लगी तो रजनी से चुप न रहा गया उसने पलटकर जवाब दिया जिसे सुनकर सास आग बबूला हो गई रजनी की ननद उसे और भड़का रही थी। रजनी बेबस होकर रोने लगी तभी उसकी माँ बोली तू अभी रजनी को मायके छोड़ के आ हमें नहीं चाहिए ऐसी बहू। राजेश ने रजनी से बात की रजनी उसे बेकसूर लगी फिर भी रजनी बोली माँ का मन रखने के लिए मुझे मायके छोड़ आओ राजेश ने विवाद खत्म करने के लिए रजनी को मायके छोड़ दिया दूसरी ओर ननद मनीषा ने अपनी माँ के मन में रजनी के प्रति नफ़रत पैदा कर दी थी वो राजेश से कहती तू रजनी को छोड़ दे मैं तेरी दूसरी शादी करा दूँगी राजेश चुप रह जाता एक दिन राजेश ने माँ को जवाब दे ही दिया बोला आपके कारण रमेश मामा पचपन साल के होने के बाद अभी तक अकेले हैं तब आप ने ननद के रूप में रहकर रमेश मामा की पत्नी को छुड़वा दिया था आपके पिता जी ने कहा था कि मैं रमेश की दूसरी शादी करा दूँगा रमेश मामा ने मामी को आपके कहने से छैड़ दिया था मामी ने तो दूसरी शादी कर ली थी लेकिन मामा की आज तक आप दूसरी शादी न करा सके हो नाना यही सपना देखते देखते स्वर्ग सिधार गए मामा अभी तक अकेले हैं जब आप मामा की शादी नहीं करा सकीं तो मेरी क्या कराएँगी इस पर माँ ने फैसला सुनाते हुए कहा कुछ भी हो अब रजनी यहाँ नहीं रह सकती। माँ की बात सुन राजेश सोच में पड़ गया रजनी का डी एड कंप्लीट हो गया था । राजेश ने बहादुरगढ़ जो एक कस्बा था वहाँ के प्राइवेट स्कूल में शिक्षक के पद के लिए आवेदन दिया था स्कूल प्रबंधन ने राजेश को शिक्षक पद पर रख लिया था उसका वेतन बारह हजार रुपये महीना तय किया गया था राजेश ने रजनी का बायो डाटा दिया तो वे रजनी को प्राथमिक में शिक्षक की नौकरो देने को तैयार हो गए रजनी को आठ हजार रुपये वेतन देने की बात उन्होंने की यह बात राजेश ने रजनी को बताई रजनी तैयार तो हो गई पर, वो राजेश से बोली दुनिया,वाले क्या कहेंगे तब राजेश बोला हम कहाँ अपनी मर्जी से अलग हो रहे हैं वे तुम्हें रखना नहीं चाहतीं ऐसे में मैं क्या करूँ । आखिर दोनों ने बहादुर गढ़ भें नौकरी कर ली बीस हजार रुपये उनके लिए पर्याप्त थे। उन्होंने तीन हजार रुपये महीने पर मकान किराये से ले लिया था माँ ने राजेश से अपना रिश्ता तोड़ लिया था। राजेश को इसकी कोई चिंता नहीं थी।



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प्रदीप कश्यप

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