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अगस्त, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कहानी: मुफ्त की तनख्वाह

शहर से दस किलोमीटर दूर स्थित ग्राम सेमल खेंड़ा हायर सेकेण्डरी स्कूल में पदस्थ छः शिक्षक पिछले पाँच सालों से मुफ्त की तन ख्वाह ले रहे थे फिर भी उनके छात्रों का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत आ रहा था उनमें से एक शिउक्षक रामकिशन वर्मा तो इस आधार पर प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान भी ले चुके थे। विद्यालय अच्छा इसलिए चल रहा था क्योंकि उसके प्राचार्य शिवशंकर जी एक ईमानदार कर्मठ और अत्यंत सज्जन इंसान थे पूरे सेमल खेड़ा गाँव तथा आसपास के पच्चीस गाँवों के लोग उनका बहुत ज्यादा सम्मान करते थे वे एक रुतबे वाले संपन्न परिवार के होकर भी सहज सरल ह्रदय के व्यक्ति थे। शिवशंकर जी सेमलखेड़ा ग्राम के मूल निवासी थे उनके छोटे भाई चंद्र शेखर गाँव के सरपंच थे चाचा ओम प्रकाश जिला पंचायत अध्यक्ष थे उनकी पास खुद की पेतृक अस्सी एकड़ जमीन थी बैंक में सत्तर करोड़ रुपये जमा थे करोड़ों रुपये का इन्वेस्टमेन्ट था आकाश बिल्डर की कंपनी में लगभग सारा पैसा उनका लगा हौआ था पर वे अत्यंत सादगी से रहते थे। वे सरकारी स्कूल के प्राचार्य थे और दिन के बारह घंटे स्कूल में व्यतीत करते थे उनका स्कूल सबसे अच्छा और सुयव्वस्थित स्कू...

कहानी: बेटी की कमाई

सुशीला उन पुरानी महिलाओं मे से थी जो बेटी की कमाई से एक रुपया भी खर्च करना पाप समझती थी उसकी कोख से जब उसकी बेटी शिवानी ने जन्म लिया था तब वो बहुत दुखी हुई थी क्योंकि वो बेटी को बोझ मानती थी और बेटे को बुढ़ापे का सहारा आज वही बेटी सुशीला का बुढ़ापे में पूरा साथ दे रही थी । सुशीला के पास बेटी की मदद लेने के सिवा कोई और चारा भी नहीं था जिस बेटे नीलेश को वो बुढापे का सहारा समझ रही थी वो खुद शिवानी पर निर्भर था।  शिवानी ने नर्सिंग में बी एस सी की थी और वो राजधानी के बड़े सरकारी अस्पताल में स्टॉफ नर्स थी उसके साथ उसकी माँ सुशीला तथा भाई नीलेश तथा उसका बेटा रितेश तथा बेटी सोनिया रह रही थी। कमाने वाली शिवानी थी बाकी सभी उस पर निर्भर थे । सुशीला पहले कभी कभी इस बात को लेकर बहुत दुखी रहती थी की वो बैटी की कमाई पर जी रही है लेकिन अब उसने यह कहना बंद कर दिया था। शिवानी ने उसे अच्छी तरह समझा दिया था कि बेटे बेटी एक बराबर होते हैं माता पिता की देखभाल करना सेवा करना दोनों का फर्ज है।और फिर मेरा आपके अलावा है ही कौन। बेटी की भलमनसाहत देखकर सुशीला को अपने किए पर बहुत पछतावा होता था। ...

कहानी: मेडिकल बिल

रामनिवास सरकारी कर्मचारी थे उन्हें कार्डिएक अरेस्ट आया तब वे प्राइवेट अस्पताल में तीन महीने भर्ती रहे थे जिसमें उनके पन्र्द्रह लाख रुपये खर्च हो गए थे लेकिन शासन द्वारा बिल में काटछाँट कर तीन लाख रुपये ही मंजूर किए गए थे इसकी लिए उन्हें काफी दौड़धूप करना पड़ी थी जब उन्हें ट्रेजरी से बिल का भुगतान मिला तब तक उनके पचास हज़ार रुपये इस पूरी प्रक्रिया में खर्च हो चुके थे। आयुष्मान योजना का उन्हें कोई लाभ नहीं मिला था। इस संबंध में उनके एक साथी कर्मचारी ने बात करते हुए कहा कि आप को तो फिर भी तीन लाख रुपये मिल गए भले ही आपके पल्ले ढाई लाख रुपये ही पढ़े हों पर चपरासी कमला बाई को तो एक रुपया तक नहीं मिला उनकी आँतों में इन्फेक्शन हुआ था वे भी डेढ़ महीने अस्पताल में भर्ती रहीं थी उनके आठ लाख रुपये खर्च हुए थे उनके लड़के नरेश ने खूब कोशिश की दस हजार रुपये भी खर्च कर दिए पर उनका बिल उस बाबू ने जब तक दबाए रखा जब तक कि क्लेम की डेट नहीं निकल गई नरेश जब बिल की जानकारी लेने वरिष्ठ कार्यालय गया तब पता चला कि बिल तो यहाँ आया ही नहीं इसके बाद नरेश जब संबंधित बाबू के पास पहुँचा तब उसने बड़ी मुश्क...

कहानी: बड़े साहब की बेटी की शादी

आज कमाऊ विभाक के बड़े साहब निरंजन खरे की बेटी प्रगति की शादी बड़े धूमधाम से संपन्न हो गई थी ताज्जुब की बात तो ये थी की शादी में साहब की जेब से एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ था जबकि शादी में पूरी तीन करोड़ रुपये की पड़ी थी थे पूरे संभाज से पैसे इकठ्ठे किए गए थे अधीनस्थ कर्मचारियों तथा अधिकारियों से भी मोटी रकम वसूल की गई थी गिफ्ट तो इतने मिले थे जिसकी कोई गिनती नहीं थी साहब ने जो डिनर दिया था उसमें भी उनका एक रूपया भी खर्च नहीं हुआ था।  आम आदमी जहाँ बेटी की शादी मैं ऊपनी जीवन भर की पूँजी लुटा बैठता है वहीं खरे जी को यह शादी लाभदायक साबित हुई थी इससे वे बड़े ख़ुश नजर आ रहे थे। निरंजन सर की बेटी की शादी में पिछले सात दिनों से भृत्य रामदयाल लगातार काम में जुटा रहा था बेटी की विदाई के बाद वो अपने घर आया था उसको साहब ने एक मिठाई का डब्बा तक नहीं दिया था शादी में दिन रात कठोर श्रम के बदले सिवाय उसे झिढ़किया॔ डाँट फटकार बेइज्जती के अलावा और कुछ नहीं मिला था साहब के मुँह से दो बोल उसकी तारीफ के लिए भी नहीं निकले थे पैसा देना तो दूर की बात है।  रामदयाल दुखी मन से अपनी पत्नी दीपिका से...

कहानी: खुद की एजेंसी

रामनरेश ने पाँच साल पहले अपने गाँव बमूलिया में बिल्डिंग मटेरियल की दुकान खोली थी इसके साथ ही उसने सीमेंट तथा सरिया की एजेंसी भी ली थी उसकी दुकान चल निकली थी आज उसकी गिनती गाँव के संपन्न लोगों में होने लगी थी एजेन्सी के अलावा उसने बीस एकड़ जमीन भी खरीद ली थी जिस पर वह खेती कर रहा था  तथा दूध डेरी भी खोल रखी थी ।पक्का घर बना लिया था जिसमे सभी सुख सुविधाएँ थीं।पाँच साल पहले रामनरेश छः हजार रुपये महीने पर शहर की दुकान में काम करता था। और आज उसके पास ही पच्चीस लोग काम कर रहे थे। पहले रामनरेश के परिवार की स्थिति ठीक नहीं थी रामनरेश के दादाजी धन्नालाल जी के पास दस एकड़ जमीन थी उनके पाँच लड़के थे रामनरेश के पिताजी को बँटवारे में दो एकड़ जमीन मिली  थी रामनरेश चार भाई थे अतः उसके हिस्से में आधा एकड़ जमीन आई थी आधा एकड़ जमीन में गुजर बसर बहुत मुश्किल थी  इसलिए रामनरेश ने शहर में  एक बिल्डिंग मटेरियल बेचने वाली दुकान पर नौकरी कर ली थी दुकान के सेठ विकास गुप्ता ने वेतन के अलावा सेल्स बढाने पर  लाभ में से बीस प्रतिशत कमीशन देने का वादा किया था कुछ महीनों तक तो विकास ने अपना व...

कहानी: बेईमानी की सज़ा

वकील सोमनाथ जी की पत्नी नमिता की बीमारी में पूरे  पाँच लाख रुपये खर्च होने के बाद भी आराम नहीं मिला था इसके बाद एक नामी आयुर्वेद चिकित्सक की पूरे छः  महीने तक दी गई दवाओं के सेवन से वो ठीक हुई थी उसमें उनके पूरे चार लाख रुपये लग चुके थे कहने वाले तो यहाँ तक कह रहे थे कि यह उस बेईमानी की सज़ा है जो उन्होंने अपने ड्राइवर रतनलाल के साथ की थी। रतनलाल दो साल पहले उनकी कार का ड्राइवर था वे उसे पन्द्रह हज़ार रुपये महीना वेतन देते थे। रतनलाल ईमानदार और नेक इंसान था अपना काम अच्छे से करता था। सोमनाथ जी की पत्नी नमिता उसे अक्सर परेशान करती थी बिना किसी गलती के ही उसे डाँटती फटकारती रहती थी। सोमनाथ जी का व्यवहार थोड़ा ठीक था पर वे अपनी पत्नी से कुछ कह नहीं पाते थे। रतनलाल गाँव से  रोज सुबह आठ बजे आ जाता था और रात के आठ बजे तक रुकता था। उसका गाँव शहर से पाँच किलोमीटर दूर था। एक दिन उसने सोमनाथ जी से कहा कि एक साल बाद मेरी लड़की पुष्पा की शादी है मुझे उसमें दो लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी आप ऐसा करें मेरी हर महीने का वेतन आप जमा करते जाएँ जब बेटी की शाद...

कहानी: ज़िंदगी की और

देवीलाल और ललिताबाई के विवाह के पूरे पच्चीस साल हो गए थे बेटी सुषमा तथा बेटे सुरेश की भी शादी उन्होंने कर दी थी। यह पच्चीस साल उन्होंने हर तरह की परिस्थिति का सामना कर गुजारे थे। दोनों पति पत्नी मिलकर दूध डेयरी चलाते थे जिससे उनके परिवार का भरण पोषण ठीक से हो जाता था। उनका मकान बड़ा था जिसमें दो किरायेदार भी रहते थे लड़का सुरेश ठेकेदार था वो भी उनके साथ रहता था उसकी शादी को अभी साल भर ही हुआ था। पच्चीस साल पहले देवीलाल ज़िंदगी से निराश होकर आत्महत्या करने के इरादे से जंगल में आए थे। उनकी उम्र तीस वर्ष होने जा रही थी माता पिता दोनों सड़क दुर्घटना में मारे गए थे। वे अपने चाचा के पास रह रहे थे। चाचा उनकी शादी करने में रुचि नहीं ले रहे थे उन्हें डर यह था कि शादी के बाद देवीलाल अलग हो जाएगा अभी जो वो देवीलाल की कमाई पर मजे कर रहे हैं वो खत्म हो जाएँगे। देवीलाल को निराशा ने घेर लिया था उन्हें जीवन जीना कठिन लग रहा था। यही सोचकर वे जंगल में रस्सी लेकर फाँसी पर लटक कर अपने जीवन को खत्म करने आए थे। रात के दो बज रहे थे वे फाँसी लगाने से पहले बैठकर कुछ सोच रहे थे तभी नदी में किसी के कूदन...

कहानी: अंधविश्वास

अंधविश्वास के फेर में पढ़कर अपने इकलौते जवान पुत्र अभिषेक को खो चुके अमित वर्मा से सबक लेकर उनके मित्र अशोक ने अपने पुत्र नीलेश का इलाज डॉक्टर से कराया था और अब वो पूर्णतः स्वस्थ हो गया था आज अमित जब अशोक जी से मिलने आए तो यही कह रहे थे आपने बहुत अच्छा किया जो नीलेश का इलाज डॉक्टर से कराया आपने वो गलती नहीं की जो मैंने की मैं अंधविश्वास के जाल में फँसकर अपने बेटे को लेकर बाबाओं के चक्कर ही लगाता रहा साल भर में पूरे पैंतीस लाख रुपये फूँक डाले फिर भी अपने बेटे की जान नहीं बचा सका अब अपने बेटे की आखिरी निशानी मेरा पोता  नवीन को पाल रहे हैं अभिषेक की पत्नी अर्पिता ने तो शादी कर ली थी और अपने बेटे नवीन को हमेशा के लिए हमारे पास छोड़ गई। अमित के जाने के बाद अशोक उन्हीं के ख्यालों में खोए हुए थे अभिषेक अमित का इकलौता बेटा था। वो बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी कर रहा था अच्छी तनख्वाह थी उसकी शादी हो गई थी तथा उसका चार साल का बेटा नवीन था सब कुछ ठीक चल रहा था अमित सेवानिवृत्त हो गए थे उन्हें पेंशन मिल रही थी मकान उनके पास था ही फंड और ग्रेच्यू...

कहानी: राजू उस्ताद जी

वे दुर्गा नगर में राजू उस्ताद जी के नाम से मशहूर थे तथा हाईवे पर स्थित होदल में कुकिंग का काम करते थे वैसे तो वे सभी प्रकार की मिठाइयाँ और नमकीन बना लेते थे पर होटल मालिक अशोक उनसे समोसा बनवाते थे उस होटल के समोसे काफी मशहूर थे राजू उस्ताद को सुब्ह आठ बजे से रात के आठ बजे तक बिल्कुल फुर्सत नहीं मिलती थी अशोक उन्हें दोगुनी तनख्वाह देते थे आज जब राजू उस्ताद जी ने अशोक जी से दो दिन की छुट्टी माँगी तो वे अनमने हो गए बोले बहुत जरूरी काम है क्या ? राजू जी ने कहा साले की बेटी की शादी है जाना बहुत जरूरी है । अशोक जी को छुट्टी देनी पड़ी पर वे समझ गए की आने वाले इन दो दिनों में उनकी होटल से समोसों की बिक्री बहुत कम होगी। राजू उस्ताद जी सात साल से अशोक जी की होटल पर हलवाई का काम कर रहे थे। तभी से उनकी होटल के समोसे हर तरफ मशहूर हो गए थे। अशोक जी ने बहुत प्रयास किए की कोई और हलवाई उनसे समोसे बनाने में निपुण हो जाए पर उन्हें सफलता नहीं मिली चार साल पहले ऐसी नौबत भी आई थी जब जरा सी कहासुनी पर राजू उस्ताद जी ने काम छोड़ दिया था । और अपनी जमा पूँजी से शहर के भीतर होटल खोल ली थी होटल तो...

कहानी: देशी अंदाज़

कमला ने दस वर्ष पहले आगरा मुंबई राजमार्ग पर जो छोटा सा देशी अंदाज नाम से जो ढाबा खोला था आज वो दस एकड़ में फैला विशाल होटल बन गया था होटल का अंदाज वही देशी था उसमें काम करने वाले सब देशी अंदाज में रहते थे महिला कर्मचारी लँहगा लुगड़ा पहनती थीं तथा पुरूष धोती बंडी और सिर पर पगड़ी रहने के लिए जो कमरे थे वे भी देशी अंदाज में बने थे चूल्हे पर खाना मिट्टी के बर्तन में बनता था मिठाइयाँ भी देशी ही मिलती थी उनके यहाँ के गुड़ की चाशनी में पगे बेसन के सेव बड़े प्रसिद्ध थे। देशी विदेशी लोगों की उनके यहाँ भीड़ लगी रहती थी। एक छोटे से गाँव हर्रा खेड़ा से आई कमला आज एक सफल उद्यमी बन चुकी थी। कमला ठेठ ग्रामीण महिला थी उसकी शादी जब हरिसिंह से हुई तब वो अठारह वर्ष की थी और हरिसिंह इक्कीस वर्ष का हरिसिंह शहर में रहकर पढ़ाई कर रहा था बी बी ए का उसका अंतिम वर्ष था वो अभी शादी नहीं करना चाहता था पर माँ बाप की जिद के आगे उसकी एक न चली शादी के बाद जब वो कमला से मिला तो उदास हो गया कमला का देहाती रूप उसे बिल्कुल पसंद नहीं आया था उसकी गाँव की बोली ...

कहानी: मतलबी लोग

धर्म वीर जबसे प्रदेश के केबिनेट मंत्री बने थे तभी से उनके इतने सारे रिश्तेदार भाई बंधु प्रगट हो गए थे कि वो खुद चकित थे जिन्हें कभी देखा नहीं जिनका कभी नाम नहीं सुना वे अपने अत्यंत निकट का सगा संबंधी बतला रहे थे । रोज उनके बंग्ले पर ऐसे लोगों की बड़ी संख्या होती थी। रिश्ता निकालने के बाद फिर उनका फायदा उठाने की बात करते कोई कहता नौकरी लगवा दो कोई कहता ठेका दिलवा दो कोई कहता मेरा मुकदमा खत्म करा दो इसके अलावा और भी ऐसे काम कराने की बात करते जो उनकी निष्कलंक छवि को कलंकित कर दे। हारकर आज धर्मवीर जी ने संतरी से कह ही दिया कोई भी मेरा रिश्तेदार बनकर आए उसे मत आने देना मैं अपने किसी रिश्तेदार से मिलना नहीं चाहता ना ही उनसे कोई संबंध रखना चाहता हूँ।  धर्मवीर जी बरखेड़ा गाँव के रहने बाले थे पन्द्रह साल पहले उनके पिताजी कनीराम ने उन्हें घर से निकाल दिया था और जमीन जायदाद से भी बेदखल कर दिया था तब न किसी गाँव वाले ने न उनके किसी रिश्तेदार ने उनकी कोई मदद की थी वे एक जोड़ी कपड़े और टूटी चप्पले पहन कर सत्तर किलोमीटर चलकर भोपाल आए थे। इस बीच उन्होंने कितनी तकलीफ उठाई थी ये वे ही जा...

कहानी: राखी

प्रमिला इस बार राखी पर अपने मायके नहीं गई थी वैसे भी उसके दोनों भाई राखी बँधवाते नहीं थे जबकि बड़ी बहन , शर्मिला की खूब चापलूसी भी करते थे और राखी भी बँधवाते थे माँ बाप के जीवित रहते प्रमिला हर वर्ष राखी पर मायके जाती थी भाई फिर भी राखी नहीं बँधवाते थे माँ ही अपनी तरफ से उसे कुछ रुपये और साड़ी देकर उसको थोड़ा संतोष प्रदान कर देती थी। पर्मिला के पिता दीनानाथ दो वर्ष पहले गुजर गए उनके निधन के तीन महीने बाद माँ का भी देहान्त हो गया था। माँ बाप के निधन के बाद पहली राखी पर प्रमिला मायके गई थी तब भी दोनों भाईयों ने उससे राखी नहीं बँधवाई थी सीधे मुँह बात तक नहीं की थी उससे । और बड़ी बहन की खूब सेवा खुशामद कर रहे थे उसकी दोनों भाभियाँ भी बड़ी ननद का ही ख्याल रख रही थीं प्रमिला सोच रही थी अच्छा हुआ कि वो अपने पति परेश को अपने साथ नहीं लाई वरना उनके साथ भी ये दोनों भाई बुरा बर्ताव करते जीजाजी का खूब आदर सत्कार होता और परेश जी से तो घर के कुत्ते से भी बुरा बर्ताव करते । वो तो इस घर की बेटी है फिर भी अपनी उपेक्षा को सहन नहीं कर पा रही थी वे तो इस घर के दामाद हैं वो ऐसा व्यवहार कैसे सहन कर प...

कहानी: ईमानदारी का मज़ा

मनोज तिवारी ने अपने पूरे कार्तकाल में ईमानदारी के साथ नौकरी की थी कमाऊ विभाग में होने के बाद भी उन्होंने कभी किसी से एक रुपये की भी रिश्वत नहीं ली थी इस कारण उनकी भ्रष्ट लोगों से दूरी बनी रहती थी आज वे सेवानिवृत हो गए थे। आज के दिन सबने उनकी खुलकर तारीफ की थी और यह भी कहा था आज जो वे स्वस्थ सुखी और संतुष्ट दिखाई दे रहें हैं वो उनकी ईमानदारी का प्रतिफल है ।उनकी बेटी प्रतिभा सरकारी अस्पताल में सर्जन थी और दामाद प्रकाश मेडिकल ऑफिसर उनका बेटा परिमल दबंग आइ ए एस अधिकारी थेमनोज जी भी भी बासठ वर्ष की उम्र में निरोगी और स्वस्थ थे ।  मनोज जी ने छत्तीस वर्ष पहले जब सरकारी नौकरी की शुरूआत की थी तब वे क्लर्क के पद पर थे। तभी से उन्होंने यह तय कर लिया था कि वे किसी से कभी भी रिश्वत नहीं लेंगे और अपने पूरे कार्यकाल में वे इस पर अडिग रहे थे उनके साथी उनकी खिल्ली उड़ाते उन्हें परले दर्जे का मूर्ख बताते पर वे कभी विचलित नहीं होते थे उनकी ईमानदारी की हर जगह चर्चा होती थी कुछ लोग उनका दिल से सम्मान करते थे नौकरी करते हुए उन्हें पूरे दो साल हो गए थे । एक बार वे ऑफिस आए तो देखा कि लेखा...

कहानी: शौक बना कमाई का जरिया

आज राजेश  शहर के अच्छे केटरर माने जाते हैं उन्हें हर समय काम मिलता रहता है उनकी खुद की भी शहर में एक होटल है जो अच्छी खासी चलती है।  कभी अत्यंत गरीब रहे राजेश की गिनती आज शहर के संपन्न लोगों में हो रही थी। राजेश का बचपन गरीबी में बीता उनके पिताजी बाबूलाल  किराने की दुकान पर काम करते थे। उसी से उनके परिवार का गुजारा चलता था बड़ा  बाजार के रहवासी क्षेत्र में वे किराये के मकान में रहते थे। राजेश आठवीं से आगे नहीं पढ़ पाए थे ।।  उनके सभी दोस्त  व्यापारियों के  बेटे थे उनमें सबसे गरीब  राजेश ही थे। राजेश बहुत बातूनी थे कई कविताएँ उन्हें याद थीं चुटकुलों का तो उनके पास ख़जाना था।  व्यापारियों के बेटे जब शहर से बाहर पार्टी  करते थे तो उसमें राजेश भी शामिल होते थे।  राजेश के पास पैसे तो होते नहीं थे इसलिए वे सेवा करते थे  धीरे धीरे वे खाना बनाना भी सीख गए थे । पार्टी में वे भोजन तैयार कर ने लगे थे  उनके हाथों में स्वाद  था। उनके द्वारा बनाए  दाल बाफले लड्डू  बड़े स्वादिष्ट  होते थे, । यही काम अब उनकी आमदनी का ज...

कहानी: खोटा सिक्का

जिस कुसुम ने अपनी बेटी रजनी को खोटा सिक्का समझकर फैंक दिया था आज वही रजनी उसके बुढ़ापे का सहाना बनी हुई थी रजनी के पास रहते हुए उसे पूरे पाँच वर्ष हो गए थे इन पाँच वर्षों अः बहू बेटे जिन्हें वो खरा सिक्का समझती थी उसकी खोज ख़बर तक नहीं ली थी । कुसुम के दिल से रजनी के लिए हर समय दुआ निकलती रहती थी जबकि रजनी को उसने अपनी जायदाद में से एक फूटी कौड़ी भी नहीं दी थी। बल्कि उसकी शादी में एक रुपया भी खर्च नहीं किया था दहेज के नाम पर एक कटोरी तक नहीं दी थी। रजनी ने जब पंद्रह वर्ष पूर्व राकेश से प्रेम विवाह किया था तब उसकी माँ कुसुम बहुत नाराज हुई थी माँ होते हुए उसने यह तक कह दिया था कि ऐसी बेटी को तो जहर देकर मार देना चाहिए उसके प्रेम विवाह से उसका भाई रितेश और भाभी रीना भी खूब नाराज थे सब यही कह रहे थे कि रजनी ने पूरे खानदान की नाक कटा दी। रजनी के पिता राजेन्द्र जी ने चुप्पी साथ ली थी घर के सभी लोग उनसे यही कह रहे थे कि उधिक लाड़ प्यार में उन्होंने रजनी को बिगाड़ा है जो उसने ऐसा काम किया रजनी ने जब राकेश से प्रेम विवाह किया तब उसके कुछ दोस्त तथा रजनी की दो सहेलियाँ ही साथ थीं रजनी की माँ...

कहानी: इस्तीफा

बीस साल पहले सरकारी शिक्षक के पद से इस्तीफा देने वाले अविनाश सर आज किसी परिचय के मोहताज नहीं थे  उनका संग्रामपुर ग्राम में स्थापित अभिनव शिक्षा परिसर दुनिया का सबसे अच्छा  शिक्षा केन्द्र बन गया था पिछले पाँच सालों से उनके  परिसर से शत प्रतिशत प्लेसमेन्ट हो रहा था। पच्चीस  वर्ष पूर्व अविनाश सर संग्राम पुर की शासकीय माध्यमिक शाला  में शिक्षक पद  पर नियुक्त होकर आए थे इसके पहले वे एक निजी विद्यालय में शिक्षक रहे थे  लेकिन  वहाँ के शिक्षण से वे संतुष्ट नहीं थे वे जिस तरह से बच्चों को पढ़ाना चाहते थे वो तरीका  शाला प्रबंधन को पसंद नहीं था। आखिर उन्हें वहाँ से इस्तीफा देना पड़ा था  इसके बाद वे सरकारी स्कूल में शिक्षक बन गए थे  वे संग्रामपुर के  स्कूल में पाँच साल रहे वे बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन शाला प्रभारी बनने के बाद वे कुछ कर नहीं पा रहे थे इतना अधिक काम की बच्चों को पढ़ाने का उन्हें अवसर ही नहीं मिलता था जो उनके साथ स्टॉफ था  वे सब सोर्स सिफारिश वाले थे सबकी ऊँची पहुँच थी वे अपनी मर्जी से स्कूल आते और अपनी मर्जी से जाते ...

कहानी: आंदोलन

शहर से लगे ग्राम बमूलिया के नेता रामभरोसे का दलित शिक्षक गोकुल दास से विवाद बहुत मँहगा पढ़ा था। उनकी पूरी राजनीति खत्म हो गई थी। तीन महीने तक तो उन्हें जमानत ही नहीं मिली थी। केस इतना मजबूत था कि जिसमें उनको सज़ा मिलना निश्चित था।  घटना आज से एक वर्ष पूर्व की है रत्नाखेड़ी गाँव के रहने वाले शिक्षक गोकुल दास जो दूसरे गाँव में पदस्थ थे उन्होंने अपना तबादला बमूलिया के सरकारी स्कूल में करा लिया था। उनके आने से राभभरोसे बिल्कुल खुश नहीं थे वे सामान्य वर्ग से थे एक दलित शिक्षक की पदस्थापना को वे सहन नहीं कर पा रहे थे। जबकि रामभरोसे सत्ताधारी पार्टी के नेता थे। जिले की राजनीति  में उनका काफी नाम था। लेकिन गोकुलदास से उन्हें शुरू से चिढ़ थी। एक दिन जब रामभरोसे स्कूल में आए तो प्रधानाध्यापक जी ने तो कुर्सी से उठकर उनका स्वागत  किया अभिवादन किया पर गोकुलदास ने उन्हें नजर अंदाज कर दिया। जिससे रामभरोसे उनसे मन ही मन में नाराज हो गए उस दिन गोकुल दास स्कूल में कुर्ता पजामा तथा जाॅकेट पहनकर स्कूल आए थे। इसी को मुद्दा बनाकर रामभरोसे जी ने गोकु...

कहानी: निलंबन का दर्द

कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद शिक्षक मणिकाँत को प्रमोशन मिला था और वे वापस रामनगर के हायर सेकेण्डरी स्कूल में व्याख्याता बनकर आए थे। इसके साथ ही जो उनसे खुन्नस रखते थे, किशोर नेता जी वे कमर की हड्डी टूट जाने के कारण पिछले छः महीने से बिस्तर से उठ नहीं सके थे। बिस्तर पर पड़े पड़े अपने गुनाहों को याद कर दुखी होते रहते थे। मणिकाँत दो बार उनसे मिलने गए थे दोनों बार किशोर नेताजी ने उनसे रोते हुए माफी माँगी थी। यह घटना पँद्रह वर्ष पूर्व की है जब किशोर नेता जी ने  मणिकाँत जी को बिना किसी कसूर के निलंबित करा दिया था। हुआ यह था कि उस समय किशोर जी सत्ताधारी पार्टी के जिला संगठन मंत्री थे साथ ही विधायक प्रतिनिधी भी। क्षेत्रीय विधायक रामकिशन की चापलूसी करने पर उन्हें यह पद मिला था। बड़े नेताओं से निकटता के कारण वे बड़ी ठसक से रहते थे। अधिकारी कर्मचारी सब उनसे दबकर रहते थे। केवल मणिकाँत ही ऐसे थे जो किशोर नेताजी को ज्यादा महत्व नहीं देते थे। एक बार उनकी किशोर जी से इस बात पर तीखी बहस हो गई थी। वे उनके खेत में काम करने वाले हाली की आठवीं पास की मार्कशीट उनसे बनवाना चाहते थे। मणिकाँत जी ने ...

कहानी: काली गाय

हाईवे के किनारे  स्थित गाँव शेरपुर के सुखलाल के पास एक काली गाय थी  जिसकी मौत सुखलाल की ही वजह से हुई थी ऐसा लोगों का कहना था उस काली गाय की मौत के साथ ही एक होनहार इंजीनियर प्रकाश का भी दुखद निधन हुआ था जिसका कारण भीषण सड़क हादसा था। सुखलाल उस समय तो बच गया था लेकिन कुदरत ने उसे माफ नहीं किया था उस हादसे के एक महीने बाद उसे कैंसर हो गया था और उस बीमारी से वो साल भर तड़पा था उसकी हालत देखकर सबको तरस आता था सब कहते थे भगवान इसे मौत दे दे ताकि इसको कष्ट से मुक्ति मिल सके।  साल भर पहले शेरपुर गाँव में थाना प्रभारी विवेक और एस डी एम विकास आए थे और ग्रामीणों को सख्त हिदायत देकर गए थे कि वे अपने पालतू पशुओं को हाईवे पर खुला न छोड़ें उनके कारण सड़क दुर्घटनाएँ हो रही हैं  अगर फिर भी कोई ऐसा करेगा तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी सभी गाँव के लोगों ने यह बात मान ली थी और हाईवे पर अपने जानवर नहीं ले जाते थे उन्हीं गाँव वालों में से सुखलाल ऐसा व्यक्ति था जिस पर एस डी एम साहब और थाना प्रभारी की हिदायत का कोई असर नहीं पड़ा था सुखलाल के पास एक काली गाय थी...

कहानी: भ्रमण कार्यक्रम के दौरान भोजन का खर्च

रोहित और उसके साथी गुजरात के भ्रमण के बाद पूरे बीस दिन बाद घर आए थे। यात्रा में जहाँ सभी के चालीस हज़ार रुपये खर्च हुए थे वहीं रोहित का खर्च कुल बीस हज़ार रुपये ही आया था। उसका एक सबसे बड़ा कारण यही था कि जहाँ सभी ने होटल रेस्त्रां में खाना खाया था नाश्ता किया था चाय पी थी वहीं रोहित ने अपने हाथों से खाना तैयार कर खाया था जो उसे सस्ता भी पड़ा था तथा हाईजेनिक तो था ही। बीस दिन पूर्व जब वे भ्रमण कार्यक्रम बना रहे थे तब जो उन्होंने इनोवा किराये पर,ली थी उसमें छः लोग तो शामिल हो गए थे सिर्फ एक की कमी पड़ रही थी तब अशोक ने रोहित से संपर्क किया था रोहित तैयाय हो गया था वैसे अशोक की टीम रोहित को शामिल नहीं करना चाहती थी पर और कोई चारा भी नहीं था हाँलाकि सारे रोहित के परिचित थे पर रोहित के सिद्धाँत उन्हें पसंद नहीं थे। जिस दिन सब भोपाल से रवाना हो रहे थे उस दिन सबने देखा कि बेग के अलावा रोहित के पास कपढ़े का एक थैला भी था रोहन ने पूछा इसमें क्या है उसने कहा इसमें खाना बनाने की सामग्री और पाँच लीटर की गैस की टंकी है इस पर विनीत भड़क गया कहाँ खाना बनाओगे? कैसे बनिओगे ?हर जगह पर होटल हैं ढ...

कहानी: तीसरा सुख

संसार में कई प्रकार के सुख बताए गए हैं जिसमें अच्छी पत्नी को तीसरा सुख कहा है पियूष की पत्नी रेवती बहुत अच्छे स्वभाव की थी जिसे पाकर पियूष अपने आपको भाग्यशाली समझता था। पहला सुख निरोगी काया को कहा है जो एक्सीडेंन्ट के बाद से उसे प्राप्त नहीं हुआ था। दूसरा सुख धन दौलत को कहा है जो उसकी बीमारी के कारण उसके पास नहीं थी। पर जो उसे पत्नी के रूप में तीसरा सुख मिला था उसे पाकर वो बहुत ख़ुश था। पियूष की शादी रेवती से बारह वर्ष पूर्व हुई थी। उस समय रेवती बीस वर्ष की थी और पियूष इक्कीस वर्ष का उसने बी कॉम किया था। माता पिता ने मजदूरी करके उसे पाला पोसा पढ़ाया लिखाया था। उसकी नौकरी लगी नहीं थी इसलिए वो भी अपने पिता चमनलाल के साथ मजदूरी करने लगा था उनके साथ रेवती की माँ कमला भी मजदूरी कर रही थी उसे पियूष अच्छा लड़का लगा उसने रेवती से पियूष के रिश्ते की बात चमनलाल से कही तो चमनलाल फौरन मान गए। पियूष भी इससे खुश हुआ क्योंकि रेवती कभी कभी दिन में माँ के लिए खाना लेकर आती थी तब रेवती की थोड़ी बहुत बात चमनलाल से भी होती थी। पियूष को भी वह अच्छी लगती थी। दोनों की शादी ह...

कहानी: पलायन

राकेश को बड़नगर में आए हुए अभी दो महीने ही हुए थे अभी एक महीने पहले  ही उसने अपनी बच्ची मोनिका का स्कूल में कक्षा 6 में एडमीशन कराया था और आज वो उसकी टी सी लेने स्कूल आ गया था स्कूल के प्रधान सोमेश जी ने कहा कि ऐसी क्या बात हो गई जो अभी एडमीशन कराया और टी सी लेने आ गए राकेश बोला सेठ से विवाद हो गया  और उन्होंने मेरा पूरा हिसाब कर नौकरी से निकाल दिया  और कहा कि अब देखता हूँ यहाँ कौन तुझे नौकरी पर रखता है। ऐसी स्थिति में अब  मेरे पास इस कस्बे को छोड़ने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा है।  राकेश ने सोमेश जी  को सारी बात बताते हुए कहा कि  वो  अपने गाँव भेरूगढ़ में  किसान शिवप्रसाद के यहाँ ट्रेक्टर चलाता था मेरे पिताजी रामप्रसाद जी के पास चार एकड़ जमीन थी। उनके निधन के बाद जब मैं अपनी जमीन पर गया तो पता चला कि वो जमीन तो पिता  जी ने शिवप्रसाद जी को बेच दी है  शिवप्रशाद ने जमीन पर कब्जा भी कर लिया था।  राकेश को पता चला कि पिताजी  घीसी लाल जी ने दो साल पहले उसकी बहन रजनी की शादी में शिवप्रसाद जी से रुपये उधार लिए थे तथा अपनी जमीन ग...

कहानी: दरियादिल

ग्राम बारह खेड़ी के पटेल हरसुखलाल जब बाइस साल के थे तब उन्हें पटेली  मिली थी ये पटेली कोई उन्हें विरासत में नहीं मिली थी  बल्कि उनकी सादगी और सीधे सरल व्यवहार के कारण मिली थी गाँव में कोई ऐसा नहीं था जो उनके अहसानों के बोझ के नीचे न दबा हो वो हद दर्जे के भले आदमी थे इस समय उनकी उम्र बासठ साल की होने जा रही थी मगर अब भी वे युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में लोकप्रिय और सम्मानित थे ग्राम में आज तक कोई सरपंच  उनके समर्थन के बिना नहीं चुना गया था उनके होने से बारह खेड़ी गाँव आसपास के सौ गाँवों के बीच सबसे संपन्न  और विकसित गाँव था। आज उनके जन्मदिवस पर  प्रदेश स्तरीय पंचायत सम्मेलन का आयोजन हुआ था और सबसे बड़ा स्नेहभोज भी जिसमें दो लाख लोगों ने भोजन किया था। पर इसके बाद भी उनकी सादगी और सरलता वैसी ही थी उनकी नजर में सब वी आई पी थे उनकी यही विशेषता उन्हें सबसे लोकप्रिय बनाती थी ।  जब  हर सुख लाल जी  अठारह वर्ष के थे तब उनके पिताजी  मनसुखलाल जी का निधन हो गया था उनके पास कुल साढ़े चार एकड़ जमीन थी उनके बड़े भाई रामसुखलाल की शादी हो गई थी और वे खेत...

कहानी: शादी के लिए नौकरी

रवीन्द्रसिंह को एक प्राईवेट दवा कंपनी में नौकरी किए अभी एक महीना भी नहीं हुआ था कि वह नौकरी छोड़ने का इरादा करने लगा था  लेकिन उसकी  माँ कंचन  का कहना था  जब तक  तेरी शादी न हो जाए  तब तक नौकरी करता रह जब शादी हो जाए तब नौकरी छोड़ना जबकि रवीन्द्र सिंह सोच रहा था कि एक महीना गुजारना मुश्किल हो रहा है कब तो उसकी शादी होगी और कब वो ऐसी नौकरी से पीछा छुड़ाएगा रवीन्द्र सिंह की  उम्र पैंतीस वर्ष की होने जा रही थी  और वो अभी तक कुँवारा  था कंचन जी का वह इकलौता लड़का था  उनकी दो लड़कियाँ थीं दोनों रवीन्द्द से बड़ीं थीं दोनों की शादी हो गईं थी दोनों के बच्चे   कोई छठी में तो कोई सातवीं में तो कोई आठवीं में पढ़ रहा था।  कंचन जी कस्बे के  एक सरकारी दफ्तर में चपरासी की नौकरी कर रही थीं  उनके पति सुरेन्द्रसिंह  सरकारी दफ्तर में बाबू थे  सरकारी काम से जब वे कहीं जा रहे थे तब  एक ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी थी जिससे उनका वहीं दुखद निधन हो गया था।  जब रवीन्द्र एक साल का था तब उसके पिता का निधन हुआ था उसकी दोन...

कहानी: कुँवारापन

आजीवन कुँवारे रहे मनमोहन श्रीवास्तव जी का आज पिन्च्यानवे वर्ष की आयु में निधन हो गया था उनकी अंतिम यात्र में पूरा शहर उमड़ पड़ा था दूर दूर से और भी कई लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने आए थे शहर के कई बुजुर्गों का कहना था कि ऐसा अपार जनसमुदाय आज से पहले उन्होंने  किसी की अंतिम यात्रा में नहीं देखा था। मनमोहन श्रीवास्तव सीधे सरल स्वभाव के धनी थे उनकी किसी से  दुश्मनी नहीं थी पूरा शहर उनका घर था और शहर में रहने वाले लोग उनके परिवार के सदस्य  उनके कुँवारे पन को लेकर शहर में तरह तरह की चर्चाएँ चलती रहतीं उनमें  से एक चर्चा यह भी थी कि मनमोहन जी को जब वे कॉलेज में पढ़ते थे तब उन्हें किसी लड़की से प्यार हुआ था उस लड़की से वे शादी भी करना चाहते थे लेकिन उनके पिताजी शिवलाल जी ने कहा कि अगर तुमने हमारी पसंद की लड़की को छोड़ किसी और से शादी की तो मैं जहर खाकर अपनी जान दे दूँगा उधर उस लड़की की शादी उसके माता पिता ने किसी और से कर दी यह सब इतनी तेजी से हुआ कि उन्हें सँभलने का सोचने समझने का और कुछ कर गुजरने का मौका ही नहीं मिला मनमोहन जी ने इसके बाद उस लड़की का जिक्...

कहानी: मायके वाले

सिंचाई विभाग के बड़े बाबू राजेन्द्र जी आज बड़े दुखी थे अपने जिस छोटे भाई दीपक को उन्होंने पढ़ा लिखाकर इंजीनियर बनाया था आज वो जेल में था और जो उसके ससुराल वाले सबसे बड़े हिमायती बन ते थे उन सभी ने उससे कन्नी काट ली थी जिस पत्नी के कहने पर दीपक ने भ्रष्टाचार किया था वो उसे छोड़ गई थी उसके मायके वाले उसकी दूसरी शादी करने वाले थे दीपक से हुए दोनों बच्चे वो लावारिस छोड़ गई थी जिसे राजेन्द्र बाबू अपने घर ले आए थे तथा उनकी पढ़ाई लिखाई जारी रख रहे थे।आज राजेन्द्र बाबू जेल में दीपक से मिलकर आए थे दीपक की आँखों में आँसू थे वह कह रहा था भैया मैं तो इस योग्य भी नहीं रहा कि आपसे माफी भी माँग सकूँ इस पर राजेन्द्र जी ने कहा था माफी की जरूरत नहीं है वक्त पर अपने ही तो काम आते हैं। आज राजेन्द्र बाबू को वो समय याद आ रहा था जब दीपक आठवीं में पढ़ रहा था और उन्होंने बारहवीं की परीक्षा दी थी तभी उनके पिताजी रेवाराम जो मिस्त्री का काम करते थे वे अचानक तीन मंजिला निर्माणाधीन भवन से नीचे गिर गए जिससे अनकी दुखद मौत हो गई ये भवन ई ई आलोक सर का बन रहा था उन्होंने तरस खाकर राजेन्द्र जी को सिंचाई विभाग म...

कहानी: प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का आकस्मिक निरीक्षण

जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रविकुमार ने  उउ ने दो वर्ष पूर्व भारी बरसात में जो श्यामनगर कस्बे के प्राथमिक  स्वास्थ्य केन्द्र का निरी क्षण कर जो अनुपस्थित स्ठॉफ के खिलाफ कार्यवाही की थी  उसका दंड आज तक  पूरा अमला भोग र था  किसी की वेतन वृद्धि रुकी थी तो कोई सस्पेण्ड  हुआ था। सस्पेण्ड होपे वाले बहाल तो हो गए थे लेकिन उनकी रुकी वेतन वृद्धि आज तक नहीं मिली थी । जिससे  प्रतिमाह वेतन में बड़ा नुक्सान उठाना पड रहा था यहो हाल उन कुछ षासकीय स्कूलों के स्टॉफ का हुआ था जो बच्चों की छुट्टी होने पर खुद भी स्कू  अनुपस्थित रहे थे। बात दो वर्ष फूर्व की है भारी वर्षा  के कारण श्यामनगर में उल्टी दस्त वायरल फीवर एवं मलेरिया के मरीजों की संख्या बहुत बढ गई थी जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकेरी को यै सूचना मिली की श्यामनगर का पी  एच सी बंद है सिर्फ एक ड्रेसर  प्रभु सिंह ही उपस्थित हुए हैं  अधिकारी जी इस  सूचना   पर अस्पताल का निरीक्षण किया तो बात सही निकली उपस्थिति रजिस्टर लेखापाल की अल्मारी मैं बंद था अस्पताल का सारा स्टॉफ बी एम ओ...

कहानी: आरक्षण

रामाखेड़ी एक बड़ा गाँव था उसमें दलित तबके के दो मोहल्ले थे दोनों की स्थिति में जमीन आसमान का अंतर था एक तबके के लोग जहाँ सभी सरकारी नौकरी में थे तथा बडे बड़े पदों पर थे वहीं दूसरे तबके के लोग आज भी घोर गरीबी के बीच रह रहे थे ।जो उन्नत तबके वाला मोहल्ला था उस में क्षेत्रीय विधायक राधाकिशन मालवीय का परिवार भी रहता था विथायक जी के बड़े भाई राम किशन आज उस खबर को सुनकर बहुत दुखी थे जिसमें यह कहा गया था कि एस सी एस टी में भी क्रीमीलेयर को हटाकर आरक्षण दिया जाना चाहिए इससे वे सब असहमत थे। जो पिछड़ा दलित मोहल्ला था उसमें क्रीमी लेयर वाला कोई नहीं था जबकि उनमें,भी बहुत पढ़े लिखे युवक थे पर उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिला था उसी तबके के एक वृद्ध घीसूलाल कह रहे थे हम तो पीढ़ियों से साफ सफाई का काम करते आए हैं सबसे दलित हम ही हैं आरक्षण के बाद भी हमें उसका लाभ नहीं मिला है दूसरी और जो बुनकर काम करते थे जो शिल्पकार थे मिस्त्री थे उनमें से अधिकाँश सरकारी नौकरियों में ऊँचे पद पे हैं पहले भी उनकी आर्थिक स्थिति हमसे अच्छी थी जब वो अपने बच्चों को पढ़ा रहे थे तब हम जीवन यापन के लि...