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व्यंग्य: गलत हथकण्डे अपनाने वाले

वैसे तो लोग मेहनत में विश्वास करने वाले होते हैं पर जो गलत हथकण्डे अपनाकर सफलता प्राप्त करना चाहते हैं। एक दिन उनको इस के बुरे परिणाम भुगतने पड़ते हैं तब ये कहीं के नहीं रहते ।फिर ये ईमानदार निष्ठावान लोगों की तरक्की देखकर जलने लगते हैं तथार उन्हें मिटाने के लिए कथित तांत्रिकों के पास जाते हैं तथा कई तरह के टोने टोटके कराते हैं उसमें खूब पैसा भी खर्च करते हैं जब इसका कुछ नतीजा नहीं निचलता तो बौखला जाते हैं।
बाज़ार में अच्छे ब्राण्ड की नकली चीजें कुछ दुकानों पर बिकती हुई मिल जाएँगी इनमें लेबल पैंकिंग सब हूबहू ब्राण्डेड कंपनी की नकल होता है पर सामान पूरा नकली होता है। एक दुकान पर चार सौ रुपये किलो देशी घी मिल रहा था और कुछ लोग सस्ते के लोभ में उसे खरीद रहे थे। जहाँ शुद्ध घी आठ सौ रुपये किलो से कम नहीं है वहाँ चार सौ रुपये किलो का घी कैसे शुद्ध होगा। सस्ते के फेर में लोग नकली चीजें खरीद लेते हैं। लेकिन जब उन्हें सच का पता चलता है तो वो दुकान ही छोड़ देते हैं एक दुकान पर ग्राहकों की हमेशा भीड़ लगी रहती थी जबकि उसके यहाँ चीजों के दाम थोड़े अधिक थे पर शुद्धता की पूरी गारंटी थी और यही कारण था कि उसकी दुकान खूब चल रही थी। कुछ लोग फुलकी का पानी टायलट साफ करने वाली एसिड से बनाते हैं और मुनाफा कमाने के लोभ में लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं। इनको किसी का डर नहीं रहता इनका एक ही मकसद रहता है अधिक से अधिक धन कमाना उसके लिए ये हर हद से गुजरने में जरा भी संकोच नहीं करते। जब तक इनको सख्ती से नहीं रोका जाएगा तब तक इसी तरह ये लोग दूसरों को धोखा देकर अपना स्वार्थसिद्ध करते रहेंगे। क्योंकि न तो इनमें नैतिकता है न मानवता न ही किसी का डर।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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