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व्यंग्य: अपने वाले अगर जलने लगें तो

हमने किसी से पूछा अपने वाले ही अगर जलने लगें तो उसने जवाब दिया अपने वाले ही तो जलते हैं। वो बोला कि ये वो अपने अनुभव से कह रहा है और जब अपने वाले जलते हैं तो बहुत मज़ा आता है हमने कहा इसमें कैसा मज़ा? गुस्सा आना चाहिए ।वो बोला गुस्सा नहीं मज़ा आता है। क्योंकि अगर आप को देखकर अपने वाला जल रहा है तो समझ लेना की आप निरंतर प्रगति कर रहे हैं । ऐसे में आप वो सब करते रहें जिससे वो लगातार जलता रहे और आपको आनंद आता रहे उसको इतना भी नहीं जलाना चाहिए कि वो जल भुनकर राख हो जाए बल्कि समय समय पर उस पर ठंडे पानी का छिड़काव करते रहें ताकि वो धीरे धीरे जलता रहे और आपको आनंद प्रदान करता रहे।
अक्सर ऐसा होता है जब कोई अपने लक्ष्य को पाने के लिए संघर्ष करता है तब चंद अपने वाले मन ही मन खुश होते हैं वे यह मानकर चलते हैं कि सफल होना इतना आसान थोड़ी है थोड़े दिनों में जब आटे दाल का भाव मालूम पड़ेगा तब सारा भूत उतर जाएगा। फिर वो दूसरों से हमारी निंदा करेगा और हमारे पास आकर झूठी हमदर्दी दिखाएगा। वो हमें दिलासा नहीं देगा बल्कि यह कहेगा कि हम कोशिश करना छोड़ दें क्योंकि उसमें कोई लाभ नहीं है। इसके बाद भी हम कोशिश जारी रखें और सफलता हासिल करने रहें तो यही अपने वाले हमसे नफ़रत करने लगैंगे हमारी तरक्की देखकर जलने लगेंगे और हमें हर तरह से क्षति पहुँचाने का प्रयास करने लगेंगे। ऐसे अपने वालों की ख़ुशी के लिए खुद अपने प्रयास बंद नहीं करना चाहिए ये वो लोग हैं जब कोई मिटने की राह पर चलने लगे तो यह उसकी गति बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे । ऐसे लोगों में ज्यादातर वे लोग होते हैं जो जीवन में कभी सफल नहीं होते। तब इनके मन में विचार आता है कि जब हम सफल नहीं हुए तो किसी अपने वाले को भी सफल नहीं देंगे। 
बेहतर यही है कि अपने वालों की जलन कभी नहीं मिटे। क्योंकि यही तो वो मापक है जिससे पता चलता है कि हम अपनी सफलता बनाए हुए हैं।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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