अपना फायदा देख किसी भी तरह का समझौता कर लेने वाले लोग बेहयाई की हर हद पार करने में ज़रा भी संकोच नहीं करते। इनका काम बनना चाहिए चाहे किसी का कितना ही बड़ा नुक्सान क्यों न हो जाए यह लोगों का इस्तेमाल सीढ़ी की तरह करते हैं और काम निकल जाने पर सीढी को तोड़ मोड़ कर फेंक देते हैं ताकि कोई ओर इस सीढ़ी का इस्तेमाल नहीं कर सके कुछ अगर गुरूघंटाल हैं तो ऐसे लोग उनका भी फायदा उठाने में माहिर होते हैं।
रमेश जी विधायक जी के करीब माने जाते थे । इसका फायदा एक चपल चालाक अवसरवादी व्यक्ति राकेश ने उठाया पहले उसने रमेश से दोस्ती की फिर रमेश जी का भरोसा जीता उनका सहारा लेकर वो विधायक जी तक पहुँचा इसके बाद दो महीने में ही उसने अपना कमाल दिखा दिया आजकल वो विधायक जी का खास है । रमेश को विधायक प्रतिनिधि के पद से हटवा दिया गया और वो उस पद पर काबिज हो गया है। रमेश जी ने नाराज होकर संगठन सचिव के पद से इस्तीफा दे दिया राकेश ने उसको मंजूर करा दिया उस पद पर अपने मतलब का आदमी बिठा दिया। अब वो विधायक जी का सहारा लेकर प्रभारी मंत्री जी का करीबी बनने का प्रयास कर रहा है जैसे ही वो इसमें सफल हो जाएगा तो विधायक जी को भी डँसने में वो तनिक भी नहीं हिचकिचाएगा।
ऐसे लोगों से बचना बडा मुश्किल है । इनका सारा समय ऐसे कामों में ही गुजर जाता है यह लोग किसी के प्रति भी निष्ठावान नहीं होते। चतुर सिंह सरपंच के खास आदमी थे सरपंच के चुनाव हारने के बाद चतरसिंह ने भी अपनी निष्ठा बदल ली अब वो वर्तमान सरपंच के भी खास बन गए हैं। ये लोग ऐसा करते हुए अपनी सारी जिंदगी गुजार देते हैं और अपनी चालाकी पर फूले नहीं समाते फिर जब इनका भी सवा शेर मिल जाता है तब ये कहीं के नहीं रहते फिर इनके पास घड़ी भर के लिए भी कोई नहीं रुकता न इनकी कोई बात सुनना पसंद करता है।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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