ऐसा लोग मानते है कि चंदन के पेड़ की सुगंध और शीतल छाया के कारण उस पर कई विषधर साँप लिपटे होते हैं यह साथ तो रहते हैं लेकिन एक दूसरे के गुण अवगुण को कभी ग्रहण नहीं करते न चंदन की सोहबत से साँप के गुणधर्म बदलते न न साँप की सोहबत से चंदन के। फिर भी ये साथ रह लेते हैं इनकी यह सोहबत इन्हें कई अच्छे भले लोगों की संगति से दूर कर देती है।सामान्यतः लोग ऐसे वृक्ष के पास तक जाना पसंद नहीं करते जिस पर विषधर साँपों का वास हो ।
हाँलाकि चंदन का पेड़ तो अपनी खुश्बू बिना भेदभाव के सब पर लुटाता है। सभी को शीतल छाया भी प्रदान करता है । लेकिन साँप ऐसा नहीं होता उसके मुँह में विष दंत होते हैं उसकी जकड़ जानलेवा होती है वो किसी जीव को जिंदा ही निगल जाता है जिन्हें निगल नहीं पाता उन्हें डँसकर मार देता है यह साँप हर जगह रेंगकर अपना शिकार ढूँढते हैं और छिपकर डँसते हैं इनमें कुछ तो इतने विषैले होते हैं जिनका डँसा पानी तक नहीं माँग पाता और मर जाता है। लेकिन दुनिया में सबका समाधान हैं कुछ ऐसे भी हैं जो साँप को वश में कर के उसे पिटारी में बंद कर लेते हैं फिर उसे बीन पर नचाकर धन कमाते हैं । चंदन का पेड़ अपनी खुश्बू के कारण काटा दिया जाता है उसकी लकड़ी को घिसकर लोग उसका लेप लगाते हैं तथा उसकी मनमोहक खुश्बू से आनंदित होते हैं।
समाज के संदरूभ में इसे देखा जाए तो समाज में चंदन जैसे लोग भी हैं तो साँप जैसे भी जिनके मुँम में विष भरा होता है तथा चाल टेड़ी होती है। दूसरी ओर उनको वश में करने वाले सँपेरे भी होते हैं जो अपनी बीन पर उन्हें नचाते हैं। आम आदमी को इनसे कोई विशेष लाभ नहीं होता उसका जीवन तो संघर्ष कर के ही गुजरता है तब भी उसकी गुजर बसर ठीक से नहीं होती।
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रचनाकार
प्रदीप कश्यप
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