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व्यंग्य: विश्वासघातियों से कैसे बचें

विश्वास दिला कर विष देने वालों की संसार में कमी नहीं है ऐसे में मन में सहज ही ये प्रश्न उठता है कि विश्वासघातियों से कैसे बचें क्योंकि विश्वासघाती तो खास अपना भी हो सकता है सीधा सादा सा दिखने वाला इंसान भी हो सकता है। कहने वाले कहते हैं कि अगर कोई बात राज रखना है तो वो किसी से भी मत कहो चाहे कोई कितना ही खास अपना क्यों न हो कोई कितनी ही कसम खाले फिर भी राज की बात नहीं कहना चाहिए अगर राज की बात किसी एक से भी कह दी तो फिर वो छिपी नहीं रहेगी ऐसा अनुभवी कहते हैं। जिन पर हम विश्वास करते हैं। वो हमारी सबसे बड़ी कमजोरी भी बन सकता है। और अक्सर बनता ही है। हमारे दुश्मन ऐसे लोगों को साधने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ते। उससे हमारी सारी बातें जान लेते हैं और फिर हमे वो चोट पहुँचाते हैं जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते कब हमारा अपना ही हमें खाई में धकेल दे इसका हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते। आज के इस दौर में जब मतलब के लिए लोग किसी भी हद तक गिरने को तैयार रहते हैं वे विश्वास को कायम नहीं रख सकते। ये एक सामान्य बात है जो आप किसी से कह सकते हो कि आपके विश्वास को अपनों ने ही तोड़ा है आपने जिसका भी भला किया उसने ही आप के साथ बुरा किया और अक्सर ये बातें सच निकलती हैं। जब लोग मतलब के लिए एक दूसरे को धोखा दगा दे रहे हैं लूट रहे हैं ठग रहे हैं ऐसे में विश्वसनीय लोगों को खोजना बहुत मुश्किल हो गया है। जब हर आदमी एक दूसरे को धोखा देगा तो संबंध विश्वसनीय कैसे हो सकेंगे अगर समाज को स्वस्थ बनाना है तो हमें विश्वास तो कायम करना हो पड़ेगा। दोस्ती भी सच्चे दिल से रखना पड़ेगी तभी हम किसी का दिल जीत पाएँगे। तभी भरोसा कायम हो सकेगा।


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रचनाकार
प्रदीप कश्यप

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