अमित अपनी सौतेली माँ अनीता का बुढ़ापे में सगे बेटे से बढ़कर ख्याल रख रहा था। अनीता का सगा बेटा तो उसे उज्जैन रेल्वे स्टेशन पर छोड़कर चला गया था अनीता एक रात और पूरे दिन उसके आने की प्रतीक्षा करती रही थी भूख और प्यास से उसका बुरा हाल हुआ था अमित अपने मित्र को रोहन को छोड़ने रेल्वे स्टेशन पर आया था तब उसने माँ को घबराई हुई हालत में स्टेशन की बैंच पर बैठे देखा था। वहाँ से वो माँ को अपने घर ले आया था आज माँ को पूरे पाँच साल हो गए थे अमित के पास रहते वो रोज अमित और उसकी अमिता को खूब दुआएँ दिया करतीं थीं अब उनकी उम्र अठहत्तर वर्ष होने जा रही थी। अमित के पिता दौलतराम जी का निधन हुए आठ वर्ष हो गए थे। अमित को अच्छी तरह से याद है जब वो सात वर्ष का था तब उसकी सगी माँ नीता का डिलेवरी के दौरान निधन हो गया था। जब वो आठ वर्ष का हुआ तब उसके पिता दौलतराम जी ने अनीता से शादी कर ली अनीता ने अमित को तीन साल तक तो अच्छे से रखा फिर जब उसके बेटे सुमित का जन्म हुआ तो उसकी सारी ममता अपने सगे बेटे तक सिमटकर रह गई थी छः महीने तक सुनीता ने अमित के ऊपर वो अत्याचार किए ...