गजल
जिंदगी हमने गुजारी
*******************(
जिंदगी हमने गुजारी प्यार से।
क्यों शिकायत हम करें संसार से।
मुश्किलों का सामना डटकर करें।
दिख रहे हैं लोग क्यों लाचार से।
मानते जो बात फंसते जाल में।
बच गए हैं साफ हम इंकार से।
चाहते थे जो नहीं हमको मिला।
लौटकर खाली गए बाजार से।
जल गया वो रोशनी सबको मिली।
राख में बदला गया उजियार से।
अनसुनी करता रहा हर बात पे।
फोड़ते हम सर रहे दीवार से।
आश को कश्यप संजोकर लाए हम।
लौट खाली आ गए हैं द्वार से।
*******
रचनाकार
प्रदीप कश्यप
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें